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Bahraich News: नेपाल सीमा पर ट्रक चालकों की हड़ताल से 75 करोड़ का कारोबार प्रभावित

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jun 2026 11:55 PM IST
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Truck drivers' strike at Nepal border affects business worth Rs 75 crore
हड़ताल के दौरान रुपईडीहा में ​स्थित आईसीपी के बाहर खड़े ट्रक। - फोटो : हड़ताल के दौरान रुपईडीहा में ​स्थित आईसीपी के बाहर खड़े ट्रक।
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रुपईडीहा। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित एकीकृत चेक पोस्ट (आईसीपी) रुपईडीहा में दो दिन तक चली क्लीयरिंग एजेंटों और ट्रक चालकों की हड़ताल ने दोनों देशों के बीच होने वाले कारोबार की रफ्तार थाम दी। दो दिनों तक व्यापारिक गतिविधियां ठप रहने से करीब 300 ट्रक सीमा पर फंसे रहे, जिससे अनुमानित 75 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ।


कस्टम हाउस एजेंट हसीब अहमद ने बताया कि रुपईडीहा आईसीपी से प्रतिदिन औसतन 150 से 200 ट्रक नेपाल के लिए रवाना होते हैं। इनमें दाल, चावल, डीजल, पेट्रोल, एलपीजी गैस, दवाइयां, फल-सब्जियां, मशीनरी, कपड़ा, कोयला, फ्लाई ऐश, जिप्सम, मार्बल और हार्डवेयर जैसे उत्पाद लदे रहते हैं। एक ट्रक में औसतन 20 से 25 लाख रुपये तक का माल रहता है। दो दिन 300 से अधिक ट्रक आईसीपी पर खड़े रहे। इस आधार पर ट्रकों में लदे सामान का मूल्य 75 करोड़ रुपये होता है।
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हड़ताल का सबसे ज्यादा असर पेट्रोलियम उत्पादों और शीघ्र खराब होने वाले सामानों पर पड़ा। दर्जनों एलपीजी, डीजल और पेट्रोल टैंकर सीमा पर खड़े रहे, जबकि फल-सब्जियों से लदे वाहन समय पर नेपाल नहीं पहुंच सके। व्यापारियों का कहना है कि यदि हड़ताल एक-दो दिन और चलती तो नुकसान कई गुना बढ़ जाता।
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आईसीपी को भी हुआ 4.35 लाख का नुकसान
आईसीपी से गुजरने वाले प्रत्येक ट्रक से विभिन्न मदों में औसतन 1450 रुपये शुल्क प्राप्त होता है। हड़ताल के कारण दो दिनों में करीब 300 ट्रकों की आवाजाही प्रभावित होने से 4.35 लाख रुपये के प्रत्यक्ष राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। इसके अलावा ट्रांसपोर्टरों, निर्यातकों और व्यापारियों को अलग से आर्थिक क्षति उठानी पड़ी।

इन वस्तुओं का होता है बड़ा कारोबार
रुपईडीहा आईसीपी से भारत से नेपाल को दाल, चावल, फ्लाई ऐश, जिप्सम, डीजल, पेट्रोल, एलपीजी गैस, मशीनरी, कपड़ा, फल, सब्जियां, हार्डवेयर, मछली, कोयला, मक्का, मार्बल और दवाइयां निर्यात की जाती हैं। वहीं नेपाल से भारत में रोजिन, प्लाईवुड, जड़ी-बूटियां, कत्था और तारपीन तेल का आयात होता है। सीमा पर व्यापार रुकने से दोनों देशों के कारोबारी प्रभावित हुए।

अब क्लीयरेंस प्रक्रिया सामान्य करने की कवायद
नेपाल को पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति से जुड़े विजय जायसवाल ने बताया कि पिछले दो दिनों से एलपीजी गैस के टैंकर नेपाल नहीं जा सके हैं। ऐसे में नेपाल ऑयल निगम की ओर से लगातार टैंकर भेजने के लिए फोन आ रहे हैं। हड़ताल के दौरान नेपाल के बांके और सुर्खेत जिलों के लिए भेजे जाने वाले डीजल, पेट्रोल और एलपीजी गैस के टैंकर दो दिनों से फंसे थे। समय पर आपूर्ति न होने से वहां ईंधन उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई थी। हड़ताल समाप्त होने के बाद अब क्लीयरेंस प्रक्रिया सामान्य करने की कवायद शुरू कर दी गई है।
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