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Bahraich News: घास काटने गई महिला पर बाघ का हमला, मौत
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बाघ के हमले में जान गंवाने वाली महिला रीता देवी।
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मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के मुर्तिहा रेंज अंतर्गत अमृतपुर पुरैना गांव में सोमवार सुबह बाघ के हमले में एक महिला की मौत हो गई। महिला मवेशियों के लिए चारा लाने खेत को गई थी। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल शुरू कर दी है।
गांव निवासी रीता (45) सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे मवेशियों के लिए घास काटने गांव से कुछ दूरी पर जंगल किनारे खेतों की ओर गई थीं। बताया जा रहा है कि वह रोज की तरह खेतों के पास घास काट रही थीं। इसी दौरान झाड़ियों में पहले से घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक उस पर हमला कर दिया। रीता को संभलने का मौका तक नहीं मिला। महिला की चीख सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग दौड़े लेकिन सामने बाघ को देखकर सभी सकते में आ गए। ग्रामीणों ने दूर से ही शोर मचाना शुरू किया। ग्रामीणों के शोर के चलते लगभग पांच मिनट के बाद बाघ महिला को छोड़कर जंगल की ओर गया।
डरे सहमे ग्रामीण मौके पर पहुंचे लेकिन तब तक रीता की मौत हो चुकी थी। महिला का शव पड़ा देख सभी के होश उड़ गए। ग्रामीणों ने बताया कि घटनास्थल के आसपास बाघ के ताजे पदचिह्न मिले हैं। कुछ दूरी पर बाघ की दहाड़ भी सुनाई दी, जिससे मौके पर मौजूद लोग दहशत में आ गए। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए।
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घटना की सूचना तत्काल मुर्तिहा रेंज कार्यालय को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण शुरू किया। टीम ने बाघ के हमले की पुष्टि करते हुए ग्रामीणों को अलर्ट रहने को कहा है। सुबह हुई घटना के बाद अमृतपुर पुरैना समेत आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है।
प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) अपूर्व दीक्षित ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम को मौके पर भेज दिया गया है, आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और अकेले जंगल किनारे या खेतों की ओर न जाएं। डीएफओ ने कहा कि विभाग की ओर से प्रभावित परिवार को नियमानुसार सहायता दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
रीता ही थी पूरे परिवार का सहारा
बाघ के हमले में जान गंवाने वाली रीता ही अपने पूरे परिवार का एकमात्र सहारा थी। मृतका का पति मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया जा रहा है। परिवार में उसके तीन छोटे बेटे हैं, जो अभी नाबालिग हैं और पूरी तरह मां पर निर्भर थे। रीता मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रही थी। उसकी अचानक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव के लोग परिवार की हालत देखकर बेहद व्यथित हैं।
पोस्टमार्टम के लिए शव के साथ आए ग्रामीण
परिवार में मानसिक रूप से अस्वस्थ पति और छोटे बच्चों के अलावा कोई सक्षम सदस्य न होने के कारण गांव के आस-पड़ोस के लोग ही रीता के शव को पोस्टमार्टम के लिए लेकर जिला मुख्यालय पहुंचे। गांव के राधेश्याम, राजेश ने बताया कि पीड़ित परिवार को शीघ्र आर्थिक सहायता प्रदान की जाए जिससे बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
गांव निवासी रीता (45) सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे मवेशियों के लिए घास काटने गांव से कुछ दूरी पर जंगल किनारे खेतों की ओर गई थीं। बताया जा रहा है कि वह रोज की तरह खेतों के पास घास काट रही थीं। इसी दौरान झाड़ियों में पहले से घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक उस पर हमला कर दिया। रीता को संभलने का मौका तक नहीं मिला। महिला की चीख सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग दौड़े लेकिन सामने बाघ को देखकर सभी सकते में आ गए। ग्रामीणों ने दूर से ही शोर मचाना शुरू किया। ग्रामीणों के शोर के चलते लगभग पांच मिनट के बाद बाघ महिला को छोड़कर जंगल की ओर गया।
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डरे सहमे ग्रामीण मौके पर पहुंचे लेकिन तब तक रीता की मौत हो चुकी थी। महिला का शव पड़ा देख सभी के होश उड़ गए। ग्रामीणों ने बताया कि घटनास्थल के आसपास बाघ के ताजे पदचिह्न मिले हैं। कुछ दूरी पर बाघ की दहाड़ भी सुनाई दी, जिससे मौके पर मौजूद लोग दहशत में आ गए। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए।
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घटना की सूचना तत्काल मुर्तिहा रेंज कार्यालय को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण शुरू किया। टीम ने बाघ के हमले की पुष्टि करते हुए ग्रामीणों को अलर्ट रहने को कहा है। सुबह हुई घटना के बाद अमृतपुर पुरैना समेत आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है।
प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) अपूर्व दीक्षित ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम को मौके पर भेज दिया गया है, आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और अकेले जंगल किनारे या खेतों की ओर न जाएं। डीएफओ ने कहा कि विभाग की ओर से प्रभावित परिवार को नियमानुसार सहायता दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
रीता ही थी पूरे परिवार का सहारा
बाघ के हमले में जान गंवाने वाली रीता ही अपने पूरे परिवार का एकमात्र सहारा थी। मृतका का पति मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया जा रहा है। परिवार में उसके तीन छोटे बेटे हैं, जो अभी नाबालिग हैं और पूरी तरह मां पर निर्भर थे। रीता मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रही थी। उसकी अचानक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव के लोग परिवार की हालत देखकर बेहद व्यथित हैं।
पोस्टमार्टम के लिए शव के साथ आए ग्रामीण
परिवार में मानसिक रूप से अस्वस्थ पति और छोटे बच्चों के अलावा कोई सक्षम सदस्य न होने के कारण गांव के आस-पड़ोस के लोग ही रीता के शव को पोस्टमार्टम के लिए लेकर जिला मुख्यालय पहुंचे। गांव के राधेश्याम, राजेश ने बताया कि पीड़ित परिवार को शीघ्र आर्थिक सहायता प्रदान की जाए जिससे बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।