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Ballia News: 1971 के युद्ध के वीर कैप्टन बिहारी सिंह को राजकीय सम्मान के साथ दी अंतिम विदाई
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लालगंज क्षेत्र के सती घाट पर 1971 के भरत पाक युद्ध का सिपाही के बहुआरा गांव निवासी बिहारी जी सि
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लालगंज। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के वीर योद्धा एवं बहुआरा गांव निवासी सेवानिवृत्त कैप्टन बिहारी जी सिंह का निधन हो गया।
रविवार को सती घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सैन्य सम्मान में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
परिजनों के अनुसार, कैप्टन बिहारी सिंह का निधन इलाहाबाद स्थित उनके आवास पर हुआ। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव बहुआरा लाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। चौकी प्रभारी लालगंज शिवमूर्ति तिवारी ने बताया कि सेना की सूचना पर जिले से गार्ड ऑफ ऑनर देने के लिए विशेष टीम पहुंची थी। सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कराया गया। उनके बड़े पुत्र प्रदीप कुमार सिंह ने मुखाग्नि दी।
कैप्टन बिहारी जी सिंह के चचेरे भाई सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि वह वर्ष 1968 में भारतीय सेना में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उन्होंने बहादुरी से हिस्सा लिया।
उनकी वीरता और सेवा को देखते हुए उन्हें समय-समय पर पदोन्नति मिली और वह कैप्टन के पद से वर्ष 1996 में सेवानिवृत्त हुए।
सेवानिवृत्ति के बाद वह समय-समय पर अपने पैतृक गांव बहुआरा और इलाहाबाद स्थित आवास पर रहते थे, जहां उनके पुत्र निवास करते हैं। पिछले कुछ समय से वह अस्वस्थ चल रहे थे।
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रविवार को सती घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सैन्य सम्मान में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
परिजनों के अनुसार, कैप्टन बिहारी सिंह का निधन इलाहाबाद स्थित उनके आवास पर हुआ। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव बहुआरा लाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। चौकी प्रभारी लालगंज शिवमूर्ति तिवारी ने बताया कि सेना की सूचना पर जिले से गार्ड ऑफ ऑनर देने के लिए विशेष टीम पहुंची थी। सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कराया गया। उनके बड़े पुत्र प्रदीप कुमार सिंह ने मुखाग्नि दी।
कैप्टन बिहारी जी सिंह के चचेरे भाई सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि वह वर्ष 1968 में भारतीय सेना में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उन्होंने बहादुरी से हिस्सा लिया।
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उनकी वीरता और सेवा को देखते हुए उन्हें समय-समय पर पदोन्नति मिली और वह कैप्टन के पद से वर्ष 1996 में सेवानिवृत्त हुए।
सेवानिवृत्ति के बाद वह समय-समय पर अपने पैतृक गांव बहुआरा और इलाहाबाद स्थित आवास पर रहते थे, जहां उनके पुत्र निवास करते हैं। पिछले कुछ समय से वह अस्वस्थ चल रहे थे।
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