{"_id":"6a32f413992aa73e9c04f91e","slug":"anil-yadav-scales-the-6111-meter-high-mount-yunam-peak-ballia-news-c-190-1-bal1001-166541-2026-06-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ballia News: अनिल यादव ने फतह की 6111 मीटर ऊंची माउंट यूनाम चोटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ballia News: अनिल यादव ने फतह की 6111 मीटर ऊंची माउंट यूनाम चोटी
विज्ञापन
हिमाचल प्रदेश की 6111 मीटर ऊंची माउंट यूनाम चोटी पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराने वाला करनई गांव नि
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
सुखपुरा। बलिया के करनई गांव के युवा पर्वतारोही अनिल यादव ने हिमाचल प्रदेश की 6111 मीटर ऊंची माउंट यूनाम चोटी पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया है। अनिल ने बर्फीले तूफान, कड़ाके की ठंड और चुनौतीपूर्ण मौसम को मात दी।
दशरथ यादव के पुत्र अनिल की प्रारंभिक शिक्षा क्षेत्र में ही हुई थी। उन्होंने सुखपुरा इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट और बलिया से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। बचपन से ही ऊंचाइयों को छूने का सपना देखने वाले अनिल ने पर्वतारोहण को अपना कॅरिअर चुना। पर्वतारोहण में दक्षता हासिल करने के लिए अनिल ने दार्जिलिंग के प्रतिष्ठित संस्थान से प्रशिक्षण लिया। उन्होंने वहां ए श्रेणी प्राप्त की। इसके बाद मनाली के अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं संबद्ध खेल संस्थान (एबीवीआईएमएएस) से उन्नत पर्वतारोहण और मास्टर प्रशिक्षक पाठ्यक्रम पूरा किया। माउंट यूनाम अभियान के दौरान अनिल और उनकी टीम को बर्फीले तूफान, अत्यधिक ठंड और कम दृश्यता जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
अनिल ने रात नौ बजे चढ़ाई शुरू की और लगातार 12 घंटे के संघर्ष के बाद सुबह नौ बजे शिखर पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर बर्फ के नीचे बहता पानी होने से हर कदम जोखिम भरा था। दिशा पहचानना भी बेहद मुश्किल हो गया था। इससे पहले 7135 मीटर ऊंची माउंट नन पर अभियान के दौरान उनके एक साथी पर्वतारोही की मृत्यु भी हो गई थी। दो असफल प्रयासों के बाद तीसरे प्रयास में मिली यह सफलता अनिल के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। अब उनका अगला लक्ष्य विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह करना है।
विज्ञापन
दशरथ यादव के पुत्र अनिल की प्रारंभिक शिक्षा क्षेत्र में ही हुई थी। उन्होंने सुखपुरा इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट और बलिया से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। बचपन से ही ऊंचाइयों को छूने का सपना देखने वाले अनिल ने पर्वतारोहण को अपना कॅरिअर चुना। पर्वतारोहण में दक्षता हासिल करने के लिए अनिल ने दार्जिलिंग के प्रतिष्ठित संस्थान से प्रशिक्षण लिया। उन्होंने वहां ए श्रेणी प्राप्त की। इसके बाद मनाली के अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं संबद्ध खेल संस्थान (एबीवीआईएमएएस) से उन्नत पर्वतारोहण और मास्टर प्रशिक्षक पाठ्यक्रम पूरा किया। माउंट यूनाम अभियान के दौरान अनिल और उनकी टीम को बर्फीले तूफान, अत्यधिक ठंड और कम दृश्यता जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन
अनिल ने रात नौ बजे चढ़ाई शुरू की और लगातार 12 घंटे के संघर्ष के बाद सुबह नौ बजे शिखर पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर बर्फ के नीचे बहता पानी होने से हर कदम जोखिम भरा था। दिशा पहचानना भी बेहद मुश्किल हो गया था। इससे पहले 7135 मीटर ऊंची माउंट नन पर अभियान के दौरान उनके एक साथी पर्वतारोही की मृत्यु भी हो गई थी। दो असफल प्रयासों के बाद तीसरे प्रयास में मिली यह सफलता अनिल के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। अब उनका अगला लक्ष्य विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह करना है।