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Ballia News: मुंडन संस्कार में उजियार घाट पर उमड़े लोग, पांच किलोमीटर तक लगा जाम
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मुंडन संस्कार के दौरान उजियार घाट जाने वाले मार्ग पर लगा वाहनों का जाम।संवाद
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नरहीं। मुंडन संस्कार के विशेष मुहूर्त के कारण बुधवार को उजियार घाट गंगा तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही बस, जीप, पिकअप, बोलेरो, स्कॉर्पियो, मैजिक और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से लोग घाट की ओर जाने लगे। भीड़ बढ़ने के साथ ही सुबह करीब सात बजे उजियार तिराहा और एनएच-31 पर करीब पांच किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिससे सैकड़ों वाहन घंटों फंसे रहे। जाम की सूचना पर कोरंटाडीह पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात को सामान्य कराने का प्रयास किया। हालांकि सुबह घाट पहुंच चुके वाहनों के लौटने और नए वाहनों के पहुंचने से उजियार घाट जाने वाले मार्ग पर दोबारा जाम लग गया।
संकरे रास्ते पर आमने-सामने वाहनों के फंसने तथा दोनों ओर ठेलों के खड़े होने से पैदल यात्रियों को भी करीब एक घंटे तक परेशानी झेलनी पड़ी। तेज धूप और गर्म रेत के कारण महिलाओं को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा। एनएच-31 पर वाहनों को रोक दिए जाने के कारण कई महिलाओं को चार किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। गंगा की रेती पर नंगे पैर चलना और पानी की समुचित व्यवस्था न होने से श्रद्धालुओं को भारी परेशानी हुई।
दोपहर 12 बजे तक मुंडन संस्कार और ओहार का क्रम जारी रहा। भीड़ के कारण नावें कम पड़ गईं। गड़वार निवासी शिवानंद ने बताया कि नाविकों ने 1600 रुपये किराया लिया, लेकिन लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं कराई। वहीं सुधीर (रामपुर), धर्मेंद्र (चितबड़ागांव) और राकेश (बड़सरी) ने बताया कि घंटों इंतजार के बाद नाव मिली और ओहार के लिए 1700 रुपये लिए गए, जबकि सुरक्षा के लिए लाइफ जैकेट नहीं दी गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ नाविक क्षमता से अधिक सवारियां बैठाकर लोगों को नदी पार करा रहे थे। नरही थानाध्यक्ष हरिशंकर ने बताया कि कुछ वाहन दूसरे रास्तों से घाट तक पहुंच गए थे, जिससे थोड़ी दिक्कत हुई लेकिन पुलिस ने तत्काल व्यवस्था संभालते हुए आवागमन बहाल करा दिया।
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वहीं कोरंटाडीह चौकी प्रभारी अश्वनी मिश्रा ने बताया कि सुबह छह बजे से ही पुलिसकर्मी उजियार तिराहा पर तैनात थे और घाट की ओर जाने वाले वाहनों को नियंत्रित किया जा रहा था। कुछ वाहन गांव के सकरे रास्तों से पहुंच गए थे, जिनकी वजह से जाम लगा।
संकरे रास्ते पर आमने-सामने वाहनों के फंसने तथा दोनों ओर ठेलों के खड़े होने से पैदल यात्रियों को भी करीब एक घंटे तक परेशानी झेलनी पड़ी। तेज धूप और गर्म रेत के कारण महिलाओं को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा। एनएच-31 पर वाहनों को रोक दिए जाने के कारण कई महिलाओं को चार किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। गंगा की रेती पर नंगे पैर चलना और पानी की समुचित व्यवस्था न होने से श्रद्धालुओं को भारी परेशानी हुई।
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दोपहर 12 बजे तक मुंडन संस्कार और ओहार का क्रम जारी रहा। भीड़ के कारण नावें कम पड़ गईं। गड़वार निवासी शिवानंद ने बताया कि नाविकों ने 1600 रुपये किराया लिया, लेकिन लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं कराई। वहीं सुधीर (रामपुर), धर्मेंद्र (चितबड़ागांव) और राकेश (बड़सरी) ने बताया कि घंटों इंतजार के बाद नाव मिली और ओहार के लिए 1700 रुपये लिए गए, जबकि सुरक्षा के लिए लाइफ जैकेट नहीं दी गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ नाविक क्षमता से अधिक सवारियां बैठाकर लोगों को नदी पार करा रहे थे। नरही थानाध्यक्ष हरिशंकर ने बताया कि कुछ वाहन दूसरे रास्तों से घाट तक पहुंच गए थे, जिससे थोड़ी दिक्कत हुई लेकिन पुलिस ने तत्काल व्यवस्था संभालते हुए आवागमन बहाल करा दिया।
वहीं कोरंटाडीह चौकी प्रभारी अश्वनी मिश्रा ने बताया कि सुबह छह बजे से ही पुलिसकर्मी उजियार तिराहा पर तैनात थे और घाट की ओर जाने वाले वाहनों को नियंत्रित किया जा रहा था। कुछ वाहन गांव के सकरे रास्तों से पहुंच गए थे, जिनकी वजह से जाम लगा।