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Ballia News: कृषि ऋण में फर्जीवाड़े के तीन मामलों में प्राथमिकी
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पंदह। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की खड़सरा शाखा से कृषि ऋण प्राप्त करने में फर्जीवाड़े के तीन मामलों में न्यायालय के आदेश पर खेजुरी थाने में तीन आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
शाखा प्रबंधक राजकुमार यादव ने बताया कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक अभिषेक सिंह ने न्यायालय में प्रार्थना-पत्र दाखिल कर आरोप लगाया था कि तीन ऋणधारकों ने गलत एवं भ्रामक दस्तावेज प्रस्तुत कर कृषि ऋण प्राप्त किया। बैंक की आंतरिक जांच में कई अनियमितताएं सामने आने के बाद न्यायालय के निर्देश पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
बैंक के अनुसार, पिपराकला निवासी दिनेश वर्मा ने वर्ष 2015 में 2.07 लाख रुपये का कृषि ऋण लेने के लिए अपने हिस्से से अधिक भूमि दर्शाते हुए कथित रूप से फर्जी खतौनी प्रस्तुत की थी। ऋण खाता अनियमित होने पर कराई गई जांच में प्रस्तुत अभिलेखों और वास्तविक भूमि स्थिति में अंतर पाया गया।
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इसी प्रकार रतसड़ निवासी राजेश कुमार चौबे पर राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर अपने हिस्से में अधिक भूमि दर्शाने और उसी आधार पर कृषि ऋण स्वीकृत कराने का आरोप है। बैंक की जांच में यह कथित अनियमितता उजागर हुई।
तीसरे मामले में सोनाडीह निवासी रमेशमणि त्रिपाठी पर बैंक में बंधक रखी गई भूमि का एक हिस्सा बिना बैंक की अनुमति के बेचने का आरोप लगाया गया है।
बैंक का कहना है कि ऋण स्वीकृति के समय दिए गए शपथ-पत्र में उन्होंने बंधक भूमि का विक्रय या पुनः बंधक न रखने का आश्वासन दिया था।
बैंक प्रबंधन ने बताया कि स्थानीय स्तर पर कार्रवाई न होने पर न्यायालय की शरण ली गई, जिसके बाद प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश मिला।
खेजुरी थानाध्यक्ष लालमणि सरोज ने बताया कि तीनों आरोपितों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बैंक रिकॉर्ड, राजस्व अभिलेख और ऋण संबंधी दस्तावेजों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शाखा प्रबंधक राजकुमार यादव ने बताया कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक अभिषेक सिंह ने न्यायालय में प्रार्थना-पत्र दाखिल कर आरोप लगाया था कि तीन ऋणधारकों ने गलत एवं भ्रामक दस्तावेज प्रस्तुत कर कृषि ऋण प्राप्त किया। बैंक की आंतरिक जांच में कई अनियमितताएं सामने आने के बाद न्यायालय के निर्देश पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
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बैंक के अनुसार, पिपराकला निवासी दिनेश वर्मा ने वर्ष 2015 में 2.07 लाख रुपये का कृषि ऋण लेने के लिए अपने हिस्से से अधिक भूमि दर्शाते हुए कथित रूप से फर्जी खतौनी प्रस्तुत की थी। ऋण खाता अनियमित होने पर कराई गई जांच में प्रस्तुत अभिलेखों और वास्तविक भूमि स्थिति में अंतर पाया गया।
इसी प्रकार रतसड़ निवासी राजेश कुमार चौबे पर राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर अपने हिस्से में अधिक भूमि दर्शाने और उसी आधार पर कृषि ऋण स्वीकृत कराने का आरोप है। बैंक की जांच में यह कथित अनियमितता उजागर हुई।
तीसरे मामले में सोनाडीह निवासी रमेशमणि त्रिपाठी पर बैंक में बंधक रखी गई भूमि का एक हिस्सा बिना बैंक की अनुमति के बेचने का आरोप लगाया गया है।
बैंक का कहना है कि ऋण स्वीकृति के समय दिए गए शपथ-पत्र में उन्होंने बंधक भूमि का विक्रय या पुनः बंधक न रखने का आश्वासन दिया था।
बैंक प्रबंधन ने बताया कि स्थानीय स्तर पर कार्रवाई न होने पर न्यायालय की शरण ली गई, जिसके बाद प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश मिला।
खेजुरी थानाध्यक्ष लालमणि सरोज ने बताया कि तीनों आरोपितों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बैंक रिकॉर्ड, राजस्व अभिलेख और ऋण संबंधी दस्तावेजों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।