बलिया। जनशिकायतों के निस्तारण में खानापूर्ति और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्ट्रेट में आयोजित आईजीआरएस पोर्टल की समीक्षा बैठक के दौरान डीएम ने स्पष्ट कर दिया कि जो अधिकारी जनता की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं हैं, उन्हें परिणाम भुगतने होंगे।
समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने पाया कि जनपद के नौ विभागों ने शिकायतकर्ताओं से फीडबैक लेने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई, जिसके कारण पोर्टल पर उनके अंक शून्य रहे। डीएम ने इसे घोर लापरवाही मानते हुए सीआरओ को निर्देश दिया कि फीडबैक की स्थिति शून्य होने पर संबंधित अधिकारियों का वेतन रोकने की कार्रवाई की जाए। जिलाधिकारी ने पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नए कड़े मानक तय किए हैं। शिकायत के निस्तारण के बाद शिकायतकर्ता से अनिवार्य रूप से फीडबैक लेना होगा और मौके की फोटोग्राफ भी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। निस्तारण रिपोर्ट को सभी 12 कॉलमों में विस्तृत रूप से भरना अनिवार्य होगा। जिन विभागों में 75 प्रतिशत से कम शिकायतकर्ताओं का फीडबैक प्राप्त होगा, उनके खिलाफ भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने कहा कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि निस्तारण आख्या अपलोड करने में गड़बड़ी या देरी पाए जाने पर वेतन रोका जाएगा। इस मौके पर सीडीओ ओजस्वी राज, सीआरओ त्रिभुवन, एडीएम अनिल कुमार, जिला विकास अधिकारी आनंद प्रकाश रहे।