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Ballia News: 40 किमी दूर से पहुंचे मरीज, दो घंटे बाद मिल सका इलाज
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चिकित्सकों के ओपीडी कक्ष में न बैठने के लिए जिला अस्पताल के बरामदे और बाहर चिकित्सकों का इं
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बलिया। जिला अस्पताल की ओपीडी का समय सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक है। लेकिन तमाम दावों के बावजूद डॉक्टर समय से ओपीडी में नहीं बैठ रहे हैं। मंगलवार को 40 किमी दूर से मरीज सुबह आठ बजे जिला अस्पताल पहुंचने लगे। लेकिन उस समय ओपीडी में 28 में से सिर्फ छह डॉक्टर ही मौजूद थे। डॉक्टरों के देर से आने के कारण ओपीडी में दस बजे से इलाज शुरू हो सका।
जिला अस्पताल में मंगलवार को 1262 की ओपीडी हुई। पड़ताल के दौरान सुबह 9.35 बजे तक पर्ची काउंटर पर 124 से अधिक मरीजों का रजिस्ट्रेशन हो चुका था। चिकित्सक के इंतजार में मरीज ओपीडी के बाहर बैठकर व खड़े होकर इंतजार करते रहे। 40 किमी दूर रानीगंज से फरीदा बेगम बेटे जावेद के पैर में प्लास्टर लगवाने आई थी। आर्थो सर्जन के न बैठने के कारण मां-बेटे बाहर कुर्सी पर धूप में बैठकर इंतजार कर रहे थे।
अस्पताल में आयुष, दंप, ट्राॅमा में 50 चिकित्सकों की तैनाती का दावा विभाग कर रहा है। इनमें 28 डॉक्टर ओपीडी में बैठते हैं। ओपीडी में समय से सिर्फ छह चिकित्सक त्वचा रोग के डॉक्टर दीपक गुप्ता, ट्राॅमा सेंटर में डॉक्टर वीके सिंह, सर्जन डॉ. अनिल सिंह व एसएन राय मरीजों का इलाज कर रहे थे। बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर विनेश कुमार व एके उपाध्याय वार्ड में भर्ती मरीजों की जांच कर रहे थे। अन्य चिकित्सक अस्पताल परिसर में नहीं दिखे। पैथालॉजी में खून जांच कराने के लिए मरीजों की लाइन लगी थी। ओपीडी दो, तीन व चार के बाहर चिकित्सक के इंतजार में मरीज बेंच व जमीन पर बैठे थे।
कई मरीज खेजुरी, इंदरपुर, गढ़मलपुर, पचखोरा, सोहांव, टूटूवारी, बड़ागांव व कुछ तो गाजीपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी आए थे। सुबह आने वालों में अधिकतर मरीज दूर के रहे। 9.50 के बाद चिकित्सकों का ओपीडी में आना शुरू हो गया। दस बजे के आसपास सभी चिकित्सक ओपीडी में बैठ गए। चारों फिजिशियन की कुर्सी 9.38 बजे तक खाली होेने के कारण शुगर वाले मरीज खाली पेट खून जांच कराने व रेबीज इंजेक्शन लगवाने वाले मरीज भटकते मिले। दूरदराज के मरीज सुबह आठ बजे तक अस्पताल पहुंच रहे हैं, ताकि शाम होने से पूर्व घर लौट सकें। लेकिन ओपीडी में चिकित्सक के देर से बैठने के कारण खून व एक्स-रे जांच कराने में दोपहर एक बज जा रहा है। कई मरीजों की एक्स-रे जांच भी नहीं हो पाती है।
ठंड के बावजूद मरीज 30 से 40 किमी दूर से इलाज कराने पहुंच जा रहे हैं। लेकिन चिकित्सकों के समय से ओपीडी में न बैठने के कारण मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। सुबह आने का कोई फायदा नहीं मिलता है। - फरीदा बेगम, रानीगंज बैरिया।
गैस की समस्या लंबे समय से परेशान हूं। स्थानीय चिकित्सक से दिखाने के बाद राहत न मिलने पर बेहतर इलाज की आस में सुबह 8.30 तक अस्पताल पहुंच गया। लेकिन यहां एक घंटे इंतजार के बाद भी कोई चिकित्सक नहीं मिला। भीड़ बढ़ रही है, खून जांच लिखने पर शायद आज रिपोर्ट मिल सके। - कमलेश कुमार, बेलहरी।
बेहतर इलाज की आस में गाजीपुर जाने की जगह बलिया जिला अस्पताल आने के लिए सुबह घर से निकला। सुबह नौ बजे के बाद तक कोई फिजिशियन ओपीडी में नहीं बैठा है। समय से इलाज न होने पर घर लौटने में देर होगी।-- कमलेश कुमार, पिऊली, गाजीपुर।
नाती का हाथ फ्रैक्चर हो गया है। सुबह जल्दी आई कि भीड़ होने से पूर्व चिकित्सक एक्सरे जांच लिखेंगे तो अस्पताल में निशुल्क हो जाएगा। सुबह साढ़े नौ बजे कोई चिकित्सक नहीं बैठा है। भीड़ होने के कारण जांच व दवा लेने में देर होगी। चिकित्सकों की निगरानी करने वाला कोई नहीं है।-- सरस्वती देवी, सुखपुरा।
ओपीडी में सभी चिकित्सकों को समय से बैठ कर मरीजों के इलाज का निर्देश दिया गया है। इसकी लगातार माॅनिटरिंग की जाती है। वार्डों में भर्ती मरीज व इमरजेंसी के कारण कुछ चिकित्सक ओपीडी में देर से बैठे हैं। मरीजों को समय से चिकित्सकीय सुविधा मिले, इस पर विशेष ध्यान है। चिकित्सकों से विलंब से बैठने का कारण जाना जाएगा। - डाॅक्टर सुजीत यादव, सीएमएसम जिला अस्पताल।
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जिला अस्पताल में मंगलवार को 1262 की ओपीडी हुई। पड़ताल के दौरान सुबह 9.35 बजे तक पर्ची काउंटर पर 124 से अधिक मरीजों का रजिस्ट्रेशन हो चुका था। चिकित्सक के इंतजार में मरीज ओपीडी के बाहर बैठकर व खड़े होकर इंतजार करते रहे। 40 किमी दूर रानीगंज से फरीदा बेगम बेटे जावेद के पैर में प्लास्टर लगवाने आई थी। आर्थो सर्जन के न बैठने के कारण मां-बेटे बाहर कुर्सी पर धूप में बैठकर इंतजार कर रहे थे।
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अस्पताल में आयुष, दंप, ट्राॅमा में 50 चिकित्सकों की तैनाती का दावा विभाग कर रहा है। इनमें 28 डॉक्टर ओपीडी में बैठते हैं। ओपीडी में समय से सिर्फ छह चिकित्सक त्वचा रोग के डॉक्टर दीपक गुप्ता, ट्राॅमा सेंटर में डॉक्टर वीके सिंह, सर्जन डॉ. अनिल सिंह व एसएन राय मरीजों का इलाज कर रहे थे। बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर विनेश कुमार व एके उपाध्याय वार्ड में भर्ती मरीजों की जांच कर रहे थे। अन्य चिकित्सक अस्पताल परिसर में नहीं दिखे। पैथालॉजी में खून जांच कराने के लिए मरीजों की लाइन लगी थी। ओपीडी दो, तीन व चार के बाहर चिकित्सक के इंतजार में मरीज बेंच व जमीन पर बैठे थे।
कई मरीज खेजुरी, इंदरपुर, गढ़मलपुर, पचखोरा, सोहांव, टूटूवारी, बड़ागांव व कुछ तो गाजीपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी आए थे। सुबह आने वालों में अधिकतर मरीज दूर के रहे। 9.50 के बाद चिकित्सकों का ओपीडी में आना शुरू हो गया। दस बजे के आसपास सभी चिकित्सक ओपीडी में बैठ गए। चारों फिजिशियन की कुर्सी 9.38 बजे तक खाली होेने के कारण शुगर वाले मरीज खाली पेट खून जांच कराने व रेबीज इंजेक्शन लगवाने वाले मरीज भटकते मिले। दूरदराज के मरीज सुबह आठ बजे तक अस्पताल पहुंच रहे हैं, ताकि शाम होने से पूर्व घर लौट सकें। लेकिन ओपीडी में चिकित्सक के देर से बैठने के कारण खून व एक्स-रे जांच कराने में दोपहर एक बज जा रहा है। कई मरीजों की एक्स-रे जांच भी नहीं हो पाती है।
ठंड के बावजूद मरीज 30 से 40 किमी दूर से इलाज कराने पहुंच जा रहे हैं। लेकिन चिकित्सकों के समय से ओपीडी में न बैठने के कारण मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। सुबह आने का कोई फायदा नहीं मिलता है। - फरीदा बेगम, रानीगंज बैरिया।
गैस की समस्या लंबे समय से परेशान हूं। स्थानीय चिकित्सक से दिखाने के बाद राहत न मिलने पर बेहतर इलाज की आस में सुबह 8.30 तक अस्पताल पहुंच गया। लेकिन यहां एक घंटे इंतजार के बाद भी कोई चिकित्सक नहीं मिला। भीड़ बढ़ रही है, खून जांच लिखने पर शायद आज रिपोर्ट मिल सके। - कमलेश कुमार, बेलहरी।
बेहतर इलाज की आस में गाजीपुर जाने की जगह बलिया जिला अस्पताल आने के लिए सुबह घर से निकला। सुबह नौ बजे के बाद तक कोई फिजिशियन ओपीडी में नहीं बैठा है। समय से इलाज न होने पर घर लौटने में देर होगी।
नाती का हाथ फ्रैक्चर हो गया है। सुबह जल्दी आई कि भीड़ होने से पूर्व चिकित्सक एक्सरे जांच लिखेंगे तो अस्पताल में निशुल्क हो जाएगा। सुबह साढ़े नौ बजे कोई चिकित्सक नहीं बैठा है। भीड़ होने के कारण जांच व दवा लेने में देर होगी। चिकित्सकों की निगरानी करने वाला कोई नहीं है।
ओपीडी में सभी चिकित्सकों को समय से बैठ कर मरीजों के इलाज का निर्देश दिया गया है। इसकी लगातार माॅनिटरिंग की जाती है। वार्डों में भर्ती मरीज व इमरजेंसी के कारण कुछ चिकित्सक ओपीडी में देर से बैठे हैं। मरीजों को समय से चिकित्सकीय सुविधा मिले, इस पर विशेष ध्यान है। चिकित्सकों से विलंब से बैठने का कारण जाना जाएगा। - डाॅक्टर सुजीत यादव, सीएमएसम जिला अस्पताल।