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Ballia News: दुकान में आग लगा बाहर से बंद किया था ताला, पोखरे में कूद की आत्महत्या
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गड़वार पुलिस द्वारा पकड़े गए मृतका के हत्यारोपी मां-बेटा। पुलिस विभाग
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बलिया। गड़वार थाना के चिलकहर चट्टी के मटिहि मार्ग स्थित गोदाम और दुकान में नीरज के पिता पिता झूलन चौरसिया ने ही आग लगाई थी। आग लगाने के बाद बाहर से ताला बंद कर दौड़ता हुआ निकला। इसमे बहू रितिका चौरसिया (24) पत्नी नीरज चौरसिया व चार वर्षीय पौत्र धीरज कुमार की जलकर मौत हो गई। घटना की रात से गायब झूलन चौरिया का शव मंगलवार को पास के शिव मंदिर स्थित पोखरे में मिला।
थानाध्यक्ष गड़वार हितेश कुमार ने बताया कि पुलिस जांच के दौरान एक सीसी कैमरे में झूलन चौरसिया (65) पोखरे की तरफ जाते दिखाई पड़े। पोखरे में खोजबीन करने पर शव मिला। थानाध्यक्ष हितेश कुमार ने बताया कि परिजनों से पूछताछ और अब तक की जांच में पता चला कि पिता झूलन चौरसिया मझले बेटे नीरज को मकान से हटाना चाहते थे। नीरज पास में बने नए मकान में कुछ दिन बाद जाने की बात कहकर समय आगे बढ़ा दे रहा था। कुछ दिनों से झूलन भी गांव के घर की जगह इसी मकान में रहते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार घटना की शाम को झूलन चौरसिया शराब के नशे में नीरज को गाली दे रहे थे। विवाद भी किया था जो काफी देर तक चला था। नीरज ने बताया कि पिता झूलन चौरसिया बरामदे में ही सोए थे। पुलिस के अनुसार रात में सभी के सो जाने के बाद झूलन ने नीरज की दुकान व गोदाम में आग लगाकर दरवाजा बाहर से बंद कर ताला लगाने के बाद पास स्थित पोखरे में कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद झूलन के गायब होने से तमाम आशंका व्यक्त की जा रही थी, जो शव मिलने के बाद पुष्ट हो गई।
सास और जेठ भी गिरफ्तार
रसड़ा के परसिया निवासी उत्तम चौरसिया ने बेटी रितिका व नाती अभिषेक की संपत्ति विवाद में जलाकर हत्या करने का आरोप सास, ससुर व जेठ पर लगाया था। पुलिस तहरीर पर तीनों पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच पड़ताल कर रही थी। थाना प्रभारी हितेश कुमार ने बताया कि घटना के दूसरे दिन पुलिस टीम ने चिलकहर रेलवे क्राॅसिंग के पास से अभियुक्त दीपक चौरसिया और उसकी मां कांति देवी को गिरफ्तार कर लिया।
भाई और मां को खटकती थी नीरज की अच्छी आमदनी
बलिया। संपत्ति विवाद के लालच में परिवार में मासूम सहित तीन की मौत के बाद जो बचा वो जेल चला गया, पूरा परिवार बिखर गया। सिर्फ मझला भाई पंकज का परिवार व नीरज बचा है। पंकज संवरूपुर में मकान बनाकर दुकान चलाता है।
सोमवार की देर शाम पोस्टमार्टम के बाद पत्नी व बेटे का घर पहुंचा तो हर किसी की आंखें नम हो गई। पति नीरज कभी पत्नी तो कभी मासूम से लिपट कर रो रो रहा था। वह बार बार एक ही बात कह रहा था, मैंने मां व पिता से खरमास के बाद नवनिर्मित घर में जाने की बात कही थी। इसके बावजूद इन लोगों ने मेरे पूरे परिवार को तबाह कर दिया। मुझे मालूम रहता तो पिता को रात में अपने साथ नहीं सुलाया होता। धीरज उन्हें बाबा कह कर बुलाता था और खेलता था।
तीन भाइयों में छोटे नीरज चौरसिया का होलसेल का व्यवसाय अच्छा चल रहा था। अच्छी आमदनी होती देख बड़े भाई दीपक चौरसिया ने भी सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी छोड़कर उसी मकान में दुकान खोल दिया, लेकिन उसकी आमदनी ठीक नहीं थी। नीरज के व्यवहार के कारण दुकान अच्छी चलती थी। दीपक मां-बाप के साथ पैतृक मकान में रहता था। मां के नाम पर जमीन होने के कारण उक्त मकान से निकलने की लिए कई बार विवाद व थाने में पंचायत भी हुई थी। विवाद के कारण ही पंकज दो किमी दूर संवरुपुर चट्टी पर किराने की दुकान चलाता था और परिवार के साथ रहता था। यही कारण था कि वह इन विवाद से दूर था। बड़ा भाई व मां की गिरफ्तारी होने के बाद पिता का दाह संस्कार उसी ने किया।
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थानाध्यक्ष गड़वार हितेश कुमार ने बताया कि पुलिस जांच के दौरान एक सीसी कैमरे में झूलन चौरसिया (65) पोखरे की तरफ जाते दिखाई पड़े। पोखरे में खोजबीन करने पर शव मिला। थानाध्यक्ष हितेश कुमार ने बताया कि परिजनों से पूछताछ और अब तक की जांच में पता चला कि पिता झूलन चौरसिया मझले बेटे नीरज को मकान से हटाना चाहते थे। नीरज पास में बने नए मकान में कुछ दिन बाद जाने की बात कहकर समय आगे बढ़ा दे रहा था। कुछ दिनों से झूलन भी गांव के घर की जगह इसी मकान में रहते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार घटना की शाम को झूलन चौरसिया शराब के नशे में नीरज को गाली दे रहे थे। विवाद भी किया था जो काफी देर तक चला था। नीरज ने बताया कि पिता झूलन चौरसिया बरामदे में ही सोए थे। पुलिस के अनुसार रात में सभी के सो जाने के बाद झूलन ने नीरज की दुकान व गोदाम में आग लगाकर दरवाजा बाहर से बंद कर ताला लगाने के बाद पास स्थित पोखरे में कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद झूलन के गायब होने से तमाम आशंका व्यक्त की जा रही थी, जो शव मिलने के बाद पुष्ट हो गई।
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सास और जेठ भी गिरफ्तार
रसड़ा के परसिया निवासी उत्तम चौरसिया ने बेटी रितिका व नाती अभिषेक की संपत्ति विवाद में जलाकर हत्या करने का आरोप सास, ससुर व जेठ पर लगाया था। पुलिस तहरीर पर तीनों पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच पड़ताल कर रही थी। थाना प्रभारी हितेश कुमार ने बताया कि घटना के दूसरे दिन पुलिस टीम ने चिलकहर रेलवे क्राॅसिंग के पास से अभियुक्त दीपक चौरसिया और उसकी मां कांति देवी को गिरफ्तार कर लिया।
भाई और मां को खटकती थी नीरज की अच्छी आमदनी
बलिया। संपत्ति विवाद के लालच में परिवार में मासूम सहित तीन की मौत के बाद जो बचा वो जेल चला गया, पूरा परिवार बिखर गया। सिर्फ मझला भाई पंकज का परिवार व नीरज बचा है। पंकज संवरूपुर में मकान बनाकर दुकान चलाता है।
सोमवार की देर शाम पोस्टमार्टम के बाद पत्नी व बेटे का घर पहुंचा तो हर किसी की आंखें नम हो गई। पति नीरज कभी पत्नी तो कभी मासूम से लिपट कर रो रो रहा था। वह बार बार एक ही बात कह रहा था, मैंने मां व पिता से खरमास के बाद नवनिर्मित घर में जाने की बात कही थी। इसके बावजूद इन लोगों ने मेरे पूरे परिवार को तबाह कर दिया। मुझे मालूम रहता तो पिता को रात में अपने साथ नहीं सुलाया होता। धीरज उन्हें बाबा कह कर बुलाता था और खेलता था।
तीन भाइयों में छोटे नीरज चौरसिया का होलसेल का व्यवसाय अच्छा चल रहा था। अच्छी आमदनी होती देख बड़े भाई दीपक चौरसिया ने भी सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी छोड़कर उसी मकान में दुकान खोल दिया, लेकिन उसकी आमदनी ठीक नहीं थी। नीरज के व्यवहार के कारण दुकान अच्छी चलती थी। दीपक मां-बाप के साथ पैतृक मकान में रहता था। मां के नाम पर जमीन होने के कारण उक्त मकान से निकलने की लिए कई बार विवाद व थाने में पंचायत भी हुई थी। विवाद के कारण ही पंकज दो किमी दूर संवरुपुर चट्टी पर किराने की दुकान चलाता था और परिवार के साथ रहता था। यही कारण था कि वह इन विवाद से दूर था। बड़ा भाई व मां की गिरफ्तारी होने के बाद पिता का दाह संस्कार उसी ने किया।