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Ballia News: पीपा पुल पर रेलिंग नहीं, लोहे की प्लेटें भी असुरक्षित
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मझौंवा क्षेत्र के नौरंगा गंगाघाट पर बिना सुरक्षा घेरा का बनाया गया पीपापुल दे रहा हादसे का दावत
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मझौवां। बैरिया तहसील क्षेत्र के नौरंगा गंगा घाट पर बना पीपा पुल इन दिनों लोगों के लिए राहत से ज्यादा खतरे का कारण बन गया है। पीपा पुल पर रेलिंग नहीं है। लोहे की प्लेटें भी असुरक्षित हैं। लाखों रुपये की लागत से 99 पीपों पर तैयार इस अस्थायी पुल से प्रतिदिन करीब 35 हजार की आबादी आवागमन करती है, लेकिन पुल पर बुनियादी सुरक्षा इंतजाम तक नहीं किए गए हैं। गंगा नदी के दक्षिणी तट पर बसे नौरंगा, भुआल छपरा, चक्की नौरंगा, भगवानपुर सहित करीब 15 से अधिक गांवों के लोगों को जिला मुख्यालय और जिला चिकित्सालय जाने के लिए इसी पुल का सहारा लेना पड़ता है। वहीं गंगा के उत्तर दिशा में स्थित दर्जनों मौजों के किसानों की खेती दक्षिणी तट पर होने के कारण उन्हें रोजाना इस पुल से गुजरना पड़ता है। पुल की स्थिति इतनी जर्जर और असुरक्षित है कि कई किसान और ग्रामीण पुल के बजाय नाव से आना-जाना ज्यादा सुरक्षित समझ रहे हैं।
रेलिंग न होने से हर पल हादसे का डर
मझौवां। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि पुल के दोनों तरफ सुरक्षा रेलिंग तक नहीं लगाई गई है। पुल पर डेढ़ से दो फीट तक की गैप छोड़कर लकड़ी के गार्डर बिछाए गए हैं, जबकि ऊपर लोहे की प्लेट भी बिना सही फिटिंग किए जैसे-तैसे रख दी गई है। इससे पैदल चलने वालों और बाइक सवारों के लिए हर कदम पर हादसे का खतरा बना रहता है। खास कर स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
बालू पर भी नहीं बिछाई गई प्लेट
मझौवां। नौरंगा घाट पर बना पीपा पुल सिर्फ कागजों पर चमक रहा है। जमीनी हकीकत इससे उलट बताई जा रही है। भुआल छपरा निवासी लकड़ी मिश्र ने बताया कि पुल के दोनों छोर पर बालू का पट्टा हुआ है लेकिन उस पर लोहे की प्लेट नहीं बिछाई गई। इससे वाहन फिसलने और पलटने का खतरा बढ़ गया है। प्रतिदिन फोर ह्वीलर से लेकर बाइक तक बालू में फंसते हैं।
सुरक्षा के जरूरी इंतजाम नहीं किए गए
मझौवां। नियमों के अनुसार लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को यह पीपा पुल 15 नवम्बर तक तैयार कर देना चाहिए था, लेकिन जनवरी के तीसरे सप्ताह में इसे चालू किया गया। वह भी अधूरे और असुरक्षित हाल में। हर साल 16 जून को यह पीपा पुल खोल दिया जाता है। ऐसे में अब इसकी उपयोग अवधि मात्र करीब 93 दिन ही बची है, लेकिन अभी तक सुरक्षा के जरूरी इंतजाम नहीं किए गए हैं। क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों में इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है। अमरनाथ मिश्र, राजमंगल ठाकुर, शम्भूनाथ मिश्र, संजय ठाकुर, यदुनाथ मिश्र और अक्षय चौबे समेत सैकड़ों किसानों ने प्रशासन से मांग उठाते हुए कहा है कि पुल के दोनों तरफ तत्काल सुरक्षा रेलिंग लगाई जाए और लोहे की प्लेट को नट-बोल्ट से मजबूती से फिट किया जाए, ताकि लोगों की जान जोखिम में न पड़े। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर बनाए गए इस पुल में अगर जल्द सुधार नहीं किया गया, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन को समय रहते जागना होगा, वरना इसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल नहीं होगा।
पीपा पुल पर लोहे की प्लेटों की फिटिंग यदि अभी तक नहीं कराई गई है, तो तत्काल संबंधित ठेकेदार से वार्ता कर शीघ्र ही रेलिंग एवं प्लेटों की फिटिंग कराई जाएगी। - शिवमोहन राम, जेई, लोक निर्माण विभाग
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रेलिंग न होने से हर पल हादसे का डर
मझौवां। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि पुल के दोनों तरफ सुरक्षा रेलिंग तक नहीं लगाई गई है। पुल पर डेढ़ से दो फीट तक की गैप छोड़कर लकड़ी के गार्डर बिछाए गए हैं, जबकि ऊपर लोहे की प्लेट भी बिना सही फिटिंग किए जैसे-तैसे रख दी गई है। इससे पैदल चलने वालों और बाइक सवारों के लिए हर कदम पर हादसे का खतरा बना रहता है। खास कर स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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बालू पर भी नहीं बिछाई गई प्लेट
मझौवां। नौरंगा घाट पर बना पीपा पुल सिर्फ कागजों पर चमक रहा है। जमीनी हकीकत इससे उलट बताई जा रही है। भुआल छपरा निवासी लकड़ी मिश्र ने बताया कि पुल के दोनों छोर पर बालू का पट्टा हुआ है लेकिन उस पर लोहे की प्लेट नहीं बिछाई गई। इससे वाहन फिसलने और पलटने का खतरा बढ़ गया है। प्रतिदिन फोर ह्वीलर से लेकर बाइक तक बालू में फंसते हैं।
सुरक्षा के जरूरी इंतजाम नहीं किए गए
मझौवां। नियमों के अनुसार लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को यह पीपा पुल 15 नवम्बर तक तैयार कर देना चाहिए था, लेकिन जनवरी के तीसरे सप्ताह में इसे चालू किया गया। वह भी अधूरे और असुरक्षित हाल में। हर साल 16 जून को यह पीपा पुल खोल दिया जाता है। ऐसे में अब इसकी उपयोग अवधि मात्र करीब 93 दिन ही बची है, लेकिन अभी तक सुरक्षा के जरूरी इंतजाम नहीं किए गए हैं। क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों में इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है। अमरनाथ मिश्र, राजमंगल ठाकुर, शम्भूनाथ मिश्र, संजय ठाकुर, यदुनाथ मिश्र और अक्षय चौबे समेत सैकड़ों किसानों ने प्रशासन से मांग उठाते हुए कहा है कि पुल के दोनों तरफ तत्काल सुरक्षा रेलिंग लगाई जाए और लोहे की प्लेट को नट-बोल्ट से मजबूती से फिट किया जाए, ताकि लोगों की जान जोखिम में न पड़े। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर बनाए गए इस पुल में अगर जल्द सुधार नहीं किया गया, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन को समय रहते जागना होगा, वरना इसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल नहीं होगा।
पीपा पुल पर लोहे की प्लेटों की फिटिंग यदि अभी तक नहीं कराई गई है, तो तत्काल संबंधित ठेकेदार से वार्ता कर शीघ्र ही रेलिंग एवं प्लेटों की फिटिंग कराई जाएगी। - शिवमोहन राम, जेई, लोक निर्माण विभाग