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Ballia News: लिफ्ट और एस्केलेटर को चालू करने का समय नहीं, जान जोखिम में डाल कर पार करते हैं ट्रैक
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रेलवे स्टेशन परिसर में बंद पड़ा एक्सलेटर।संवाद
- फोटो : Samvad
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बलिया। रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण पर डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो गए। अमृत भारत योजना के तहत बनाए गए एस्केलेटर, लिफ्ट बंद रहती है। इससे लोगों को रेलवे ट्रैक पारकर दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाना पड़ता है।
रोज दस हजार से ज्यादा यात्री आते-जाते हैं। हाल ही में दिल्ली से आने वाली स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस से अपने परिवार के साथ बलिया स्टेशन पहुंचे बांसडीह निवासी कमलेश के परिवार को भी इसी परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्लेटफाॅर्म संख्या दो से प्लेटफाॅर्म संख्या चार पर जाने के लिए लिफ्ट बंद मिली। भारी सामान और परिवार के साथ सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं। इसी दौरान परिवार की एक 48 वर्षीय महिला ट्रैक के बीच गिरकर घायल हो गई। ऐसे दृश्य स्टेशन पर ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान के समय आम हो गए हैं।
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रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए अमृत भारत योजना के तहत तीन लिफ्ट, स्वचालित सीढ़ियां (एस्केलेटर) और फुट ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया है। लेकिन यात्रियों का आरोप है कि अधिकांश समय एस्केलेटर बंद रहता है। बताया जाता है कि इसके संचालन के लिए पर्याप्त कर्मियों की व्यवस्था नहीं होने से यह सुविधा पूरी तरह उपयोग में नहीं आ पा रही है।
ऐसे में यात्रियों को लगभग 20 फीट ऊंची सीढ़ियां चढ़कर एक प्लेटफाॅर्म से दूसरे प्लेटफाॅर्म तक जाना पड़ता है। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगों और बीमार यात्रियों के लिए यह बड़ी चुनौती बन गई है। भारी ट्रॉली बैग, झोले और अन्य सामान लेकर चलने वाले यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
रोज दस हजार से ज्यादा यात्री आते-जाते हैं। हाल ही में दिल्ली से आने वाली स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस से अपने परिवार के साथ बलिया स्टेशन पहुंचे बांसडीह निवासी कमलेश के परिवार को भी इसी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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प्लेटफाॅर्म संख्या दो से प्लेटफाॅर्म संख्या चार पर जाने के लिए लिफ्ट बंद मिली। भारी सामान और परिवार के साथ सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं। इसी दौरान परिवार की एक 48 वर्षीय महिला ट्रैक के बीच गिरकर घायल हो गई। ऐसे दृश्य स्टेशन पर ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान के समय आम हो गए हैं।
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ऐसे में यात्रियों को लगभग 20 फीट ऊंची सीढ़ियां चढ़कर एक प्लेटफाॅर्म से दूसरे प्लेटफाॅर्म तक जाना पड़ता है। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगों और बीमार यात्रियों के लिए यह बड़ी चुनौती बन गई है। भारी ट्रॉली बैग, झोले और अन्य सामान लेकर चलने वाले यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।