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Ballia News: -एनएच-31 व 6 गांवों को बचाने के लिए 3 साल में 15 कराड़े के काम गंगा में बह गए

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jan 2026 01:02 AM IST
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To protect NH-31 and 6 villages, work worth 15 crore rupees was washed away in the Ganges River over the course of 3 years.
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मझौवां। राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को गंगा की कटान से बचाने के लिए दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं में विलंब पर लोगों ने अनियमितता का आरोप लगाया है। बाढ़ खंड की तरफ से किमी 27.500 से 27.950 के बीच तथा किमी 27.500 पर क्षतिग्रस्त स्पर के लांचिंग एप्रन के पुनःस्थापन का कार्य कराया जा रहा है। 3 साल में 15 कराड़े के कराए गए काम गंगा में बह गए।
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इन दोनों परियोजनाओं की अंतिम तिथि 26 जून 2025 निर्धारित थी, लेकिन बीते वर्ष अधूरे छोड़ दिए गए थे। परिणामस्वरूप घटिया और मानक-विहीन निर्माण कार्य जुलाई की भीषण बाढ़ में गंगा की धारा में समा गया। अब उसी असफल कार्यशैली को दोहराते हुए फिर से बचाव कार्य कराए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यदायी संस्था बाढ़ खंड द्वारा निर्माण कार्य में मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। यही वजह है कि बीते तीन वर्षों में कराए गए कटानरोधी कार्यों का आज कोई नामोनिशान नहीं बचा।
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इस लापरवाही से न केवल राष्ट्रीय राजमार्ग-31 पर संकट मंडरा रहा है, बल्कि सुघर छपरा, दूबे छपरा, गोपालपुर और उदई छपरा जैसे तटवर्ती गांवों के अस्तित्व पर भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है। गौरतलब है कि तीन वर्ष पूर्व इसी स्थल पर 8 करोड़ 86 लाख 10 हजार रुपये की लागत से रिवेटमेंट कार्य कराया गया था, जो उसी वर्ष गंगा के तेज बहाव में ध्वस्त हो गया। नियमों के तहत गंगा की तलहटी में 20 मीटर तक जाली में बालू भरकर डालना जरूरी है, लेकिन यहां बिना बालू भरे ही कटान रोधी कार्य किया जा रहा है।
इधर, हुकुम छपरा के किमी 26.250 पर 6 करोड़ 32 लाख 95 हजार रुपये की लागत से स्पर के पीचिंग का कार्य चल रहा है। डेंजर जोन स्पर के अगल-बगल और तटबंध की पटरी तक 35 मीटर गहरी खोदाई कर दी गई है, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग-31 के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। तटवर्ती लोगों का आरोप है कि खोदाई से निकली मिट्टी को ठेकेदार 500 से 600 रुपये प्रति ट्रॉली की दर से बेच रहे हैं। मानकों के अनुसार स्पर निर्माण में नदी के भीतर 20 मीटर तक पीचिंग कार्य होना चाहिए, लेकिन ठोकर से सटे हुए ही निर्माण कराया जा रहा है। कटानरोधी कार्य में प्रयुक्त जालियों की लंबाई भी निर्धारित 3 मीटर के बजाय 1 मीटर है। यही कारण है कि जून में कराया गया आधा-अधूरा कार्य गंगा की धारा में बह गया था।
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वर्जन--
रामगढ़ में 27.500 से 27.950 के बीच का कार्य एक लेयर का क्रेटेड है, जिसमें ऊपर पिचिंग का कार्य किया जा रहा है। पूर्व में यह रिवेटमेंट थ्रू-आउट बनाया गया था, किंतु इस बार थ्रू-आउट नहीं है। यह स्लोप पिचिंग का कार्य है, जिसमें केवल एक लेयर की पिचिंग की जा रही है। 26.250 पर भी स्पर का पिचिंग कार्य जेई की देखरेख में हो रहा है। दोनों परियोजनाओं पर मानक के अनुसार कार्य प्रगति पर है। - श्रवण कुमार प्रियदर्शी, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड
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