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Ballia News: 35 किमी दूर से इलाज कराने पहुंचीं महिलाएं, एक किमी से नहीं पहुंच सके चिकित्सक
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जिला महिला अस्पताल में चिकित्सकों के इंतजार में बैठे मरीज और तीमारदार।संवाद
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बलिया। जिला महिला की ओपीडी का समय सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक है। 35 किमी दूर से मरीज सुबह 8 से 9 बजे जिला महिला अस्पताल आकर नंबर लगा लेते हैं, लेकिन एक किमी दूर रहने वाले डॉक्टर समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं।
बुधवार को ओपीडी की पड़ताल के दौरान 9.40 बजे तक अधिकांश डॉक्टरों की कुर्सियां खाली पड़ी रहीं। पांच महिला व दो बाल रोग चित्सक की ओपीडी में सिर्फ डॉक्टर शिल्पी गुप्ता 9.33 बजे ओपीडी में आकर मरीजों की जांच कर रही थी। डॉक्टरों के देर से आने के कारण ओपीडी में दस बजे से इलाज शुरू हो सका। सुरक्षाकर्मी में तैनात जवान ने बताया कि कुछ डाक्टर राउंड व इमरजेंसी में मरीज देखने गई है। एक डाक्टर छुट्टी पर है। ओपीडी के बाहर फर्श, कुर्सी व इधर उधर धूम रही महिलाएं चिकित्सक का इंतजार करती नजर आई।
जिला महिला अस्पताल में बुधवार को करीब 529 से अधिक महिलाएं इलाज कराने ओपीडी में आए। पड़ताल के दौरान सुबह 9.35 बजे तक पर्ची काउंटर पर 46 से अधिक गर्भवती व महिलाओं का रजिस्ट्रेशन हो चुका था। चिकित्सक के इंतजार में मरीज ओपीडी के बाहर बैठकर व खड़े होकर इंतजार करते दिखे। महिला अस्पताल में छह महिला चिकित्सक व दो बाल रोग तैनात है। पद के सापेक्ष आधे से भी कम चिकित्सक है।
ओपीडी में लेट से चिकित्सक बैठने के कारण मरीजों को खून जांच व अल्ट्रासाउंड जांच रिपोर्ट के लिए दूसरे दिन आना पड़ता है। कई महिलाएं तो नरही, दुबहड़, हल्दी, बड़ागांव, सुखपुरा, इंदरपुर व कुछ तो गाजीपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी आई थी। सुबह आने वालों में अधिकतर मरीज दूर के रहे। 9.50 बजे के बाद चिकित्सकों का ओपीडी में आना शुरू हो गया। दस बजे के आसपास सभी चिकित्सक धीरे-धीरे ओपीडी में बैठ गए। दूरदराज के मरीज सुबह आठ बजे तक अस्पताल पहुंच रहे हैं, ताकि शाम होने से पूर्व घर लौट सकें। लेकिन ओपीडी में चिकित्सक के देर से बैठने के कारण खून व अल्ट्रासाउंड जांच कराने में दोपहर दो बज जा रहा है, तब तक चिकित्सक ओपीडी मे उठ जा रहे हैं।
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बेरुआरबारी पीएचसी पर बाल रोग चिकित्सक नहीं है, वहां तैनात डाॅक्टर से दिखाने के बाद राहत न मिलने पर बेहतर इलाज की आस में सुबह 8.40 तक अस्पताल पहुंच गई थीं। लेकिन यहां एक घंटे इंतजार के बाद भी कोई चिकित्सक अब तक नहीं बैठी है। खून जांच रिपोर्ट आने में विलंब होगा, जिससे घर लौटने में देरी होगी। -सरोज कुमार, बेरुआरबारी।
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35 किमी दूर से रेवती भाखर से बेहतर इलाज की आस में परिवार को लेकर आया हूं। नौ बजे से इंतजार किया जा रहा है। सुबह जल्दी इसलिए आए कि चिकित्सक से सलाह लेकर जांच व अल्ट्रासाउंड आराम से होने के बाद रिपोर्ट दिखाने के बाद दवा मिल सके। लेकिन अब देरी होगी।-- गुड्डू कुमार, रेवती।
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ओपीडी में सभी चिकित्सकों को समय से बैठ कर मरीजों के इलाज का निर्देश दिया गया है। दो चिकित्सक छुट्टी पर होने से समस्या है। सुबह आठ बजे तक सभी चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी आ जाते हैं। वार्ड व इमरजेंसी में राउंड करने के कारण थोड़ा विलंब से ओपीडी में बैठे होंगे। जानकारी की जा रही है।-- डॉक्टर राकेश चंद्र, सीएमएसम, जिला महिला अस्पताल।
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बुधवार को ओपीडी की पड़ताल के दौरान 9.40 बजे तक अधिकांश डॉक्टरों की कुर्सियां खाली पड़ी रहीं। पांच महिला व दो बाल रोग चित्सक की ओपीडी में सिर्फ डॉक्टर शिल्पी गुप्ता 9.33 बजे ओपीडी में आकर मरीजों की जांच कर रही थी। डॉक्टरों के देर से आने के कारण ओपीडी में दस बजे से इलाज शुरू हो सका। सुरक्षाकर्मी में तैनात जवान ने बताया कि कुछ डाक्टर राउंड व इमरजेंसी में मरीज देखने गई है। एक डाक्टर छुट्टी पर है। ओपीडी के बाहर फर्श, कुर्सी व इधर उधर धूम रही महिलाएं चिकित्सक का इंतजार करती नजर आई।
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जिला महिला अस्पताल में बुधवार को करीब 529 से अधिक महिलाएं इलाज कराने ओपीडी में आए। पड़ताल के दौरान सुबह 9.35 बजे तक पर्ची काउंटर पर 46 से अधिक गर्भवती व महिलाओं का रजिस्ट्रेशन हो चुका था। चिकित्सक के इंतजार में मरीज ओपीडी के बाहर बैठकर व खड़े होकर इंतजार करते दिखे। महिला अस्पताल में छह महिला चिकित्सक व दो बाल रोग तैनात है। पद के सापेक्ष आधे से भी कम चिकित्सक है।
ओपीडी में लेट से चिकित्सक बैठने के कारण मरीजों को खून जांच व अल्ट्रासाउंड जांच रिपोर्ट के लिए दूसरे दिन आना पड़ता है। कई महिलाएं तो नरही, दुबहड़, हल्दी, बड़ागांव, सुखपुरा, इंदरपुर व कुछ तो गाजीपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी आई थी। सुबह आने वालों में अधिकतर मरीज दूर के रहे। 9.50 बजे के बाद चिकित्सकों का ओपीडी में आना शुरू हो गया। दस बजे के आसपास सभी चिकित्सक धीरे-धीरे ओपीडी में बैठ गए। दूरदराज के मरीज सुबह आठ बजे तक अस्पताल पहुंच रहे हैं, ताकि शाम होने से पूर्व घर लौट सकें। लेकिन ओपीडी में चिकित्सक के देर से बैठने के कारण खून व अल्ट्रासाउंड जांच कराने में दोपहर दो बज जा रहा है, तब तक चिकित्सक ओपीडी मे उठ जा रहे हैं।
बेरुआरबारी पीएचसी पर बाल रोग चिकित्सक नहीं है, वहां तैनात डाॅक्टर से दिखाने के बाद राहत न मिलने पर बेहतर इलाज की आस में सुबह 8.40 तक अस्पताल पहुंच गई थीं। लेकिन यहां एक घंटे इंतजार के बाद भी कोई चिकित्सक अब तक नहीं बैठी है। खून जांच रिपोर्ट आने में विलंब होगा, जिससे घर लौटने में देरी होगी। -सरोज कुमार, बेरुआरबारी।
35 किमी दूर से रेवती भाखर से बेहतर इलाज की आस में परिवार को लेकर आया हूं। नौ बजे से इंतजार किया जा रहा है। सुबह जल्दी इसलिए आए कि चिकित्सक से सलाह लेकर जांच व अल्ट्रासाउंड आराम से होने के बाद रिपोर्ट दिखाने के बाद दवा मिल सके। लेकिन अब देरी होगी।
ओपीडी में सभी चिकित्सकों को समय से बैठ कर मरीजों के इलाज का निर्देश दिया गया है। दो चिकित्सक छुट्टी पर होने से समस्या है। सुबह आठ बजे तक सभी चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी आ जाते हैं। वार्ड व इमरजेंसी में राउंड करने के कारण थोड़ा विलंब से ओपीडी में बैठे होंगे। जानकारी की जा रही है।
