{"_id":"69d29d869cf4e6e8160e7245","slug":"balrampur-news-balrampur-news-c-99-1-slko1018-145794-2026-04-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Balrampur News: अब कक्षा में तीन भाषाओं की होगी पढ़ाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Balrampur News: अब कक्षा में तीन भाषाओं की होगी पढ़ाई
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sun, 05 Apr 2026 11:06 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
बलरामपुर। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शिक्षा व्यवस्था में अहम बदलाव लागू किया है। कक्षा छह से तीसरी भाषा अनिवार्य कर दी गई है। इसके साथ ही कक्षा नौवीं के विद्यार्थियों के लिए गणित और विज्ञान की दो-स्तरीय प्रणाली भी लागू की जा रही है। नई व्यवस्था से अब कक्षा छह के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य होगा। सीबीएसई के इस निर्णय के बाद जिले के सभी संबद्ध विद्यालयों ने तैयारी तेज कर दी है।
नई नीति के तहत विद्यार्थियों को हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कम से कम एक और भाषा पढ़नी होगी। तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। वर्तमान में सीबीएसई स्कूलों में संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं सहित कुल 44 भाषाओं का विकल्प उपलब्ध है। इससे छात्रों को स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं को सीखने का अवसर मिलेगा। सीबीएसई के निर्देशों के अनुपालन में जिले के विद्यालयों ने तीसरी भाषा लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नवोदय विद्यालय में उर्दू को तीसरी भाषा के रूप में शामिल किया गया है। विद्यालय की प्राचार्य गीता मिश्रा ने बताया कि कक्षा छह के करीब 80 विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम, शिक्षक और समय-सारिणी की व्यवस्था कर ली गई है।
केंद्रीय विद्यालय में संस्कृत को तीसरी भाषा के रूप में लागू किया गया है। प्राचार्य वीरेंद्र सिंह ने बताया कि कक्षा छह के 81 विद्यार्थियों को नई व्यवस्था का लाभ मिलेगा और शिक्षण कार्य शुरू कराया जा रहा है। जिले के अन्य 11 निजी सीबीएसई विद्यालयों में भी तीसरी भाषा लागू करने की तैयारी चल रही है। विद्यालय प्रबंधन अतिरिक्त भाषा शिक्षकों की व्यवस्था, पाठ्यक्रम निर्धारण और समय-सारिणी तैयार करने में जुटे हैं। शिक्षा विभाग के जानकारों का मानना है कि नई व्यवस्था से छात्रों की भाषाई दक्षता बढ़ेगी और वे राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए अधिक सक्षम बन सकेंगे। (संवाद)
चरणबद्ध तरीके से लागू होगी नई व्यवस्था
सीबीएसई के निर्देशानुसार तीसरी भाषा की पढ़ाई सत्र 2026-27 में केवल कक्षा छह से शुरू होगी। इसके बाद प्रत्येक वर्ष इसे एक-एक कक्षा में बढ़ाया जाएगा। सत्र 2027-28 में कक्षा छह व सात, 2028-29 में छह से आठ, 2029-30 में कक्षा छह से नौवीं और 2030-31 तक कक्षा छह से दसवीं तक तीसरी भाषा अनिवार्य कर दी जाएगी। इस चरणबद्ध व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों पर अचानक अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव से बचाना है।
नौवीं में गणित-विज्ञान के दो स्तर से मिलेगा विकल्प
नवोदय की प्राचार्य गीता मिश्रा ने बताया कि बोर्ड ने कक्षा नौवीं के विद्यार्थियों के लिए गणित और विज्ञान विषयों में दो-स्तरीय प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। इससे छात्रों को अपनी क्षमता और रुचि के अनुरूप विषयों का चयन करने में सुविधा मिलेगी। शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह व्यवस्था कमजोर छात्रों का दबाव कम करेगी, वहीं मेधावी विद्यार्थियों को उन्नत स्तर पर अध्ययन का अवसर देगी।
Trending Videos
नई नीति के तहत विद्यार्थियों को हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कम से कम एक और भाषा पढ़नी होगी। तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। वर्तमान में सीबीएसई स्कूलों में संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं सहित कुल 44 भाषाओं का विकल्प उपलब्ध है। इससे छात्रों को स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं को सीखने का अवसर मिलेगा। सीबीएसई के निर्देशों के अनुपालन में जिले के विद्यालयों ने तीसरी भाषा लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नवोदय विद्यालय में उर्दू को तीसरी भाषा के रूप में शामिल किया गया है। विद्यालय की प्राचार्य गीता मिश्रा ने बताया कि कक्षा छह के करीब 80 विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम, शिक्षक और समय-सारिणी की व्यवस्था कर ली गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
केंद्रीय विद्यालय में संस्कृत को तीसरी भाषा के रूप में लागू किया गया है। प्राचार्य वीरेंद्र सिंह ने बताया कि कक्षा छह के 81 विद्यार्थियों को नई व्यवस्था का लाभ मिलेगा और शिक्षण कार्य शुरू कराया जा रहा है। जिले के अन्य 11 निजी सीबीएसई विद्यालयों में भी तीसरी भाषा लागू करने की तैयारी चल रही है। विद्यालय प्रबंधन अतिरिक्त भाषा शिक्षकों की व्यवस्था, पाठ्यक्रम निर्धारण और समय-सारिणी तैयार करने में जुटे हैं। शिक्षा विभाग के जानकारों का मानना है कि नई व्यवस्था से छात्रों की भाषाई दक्षता बढ़ेगी और वे राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए अधिक सक्षम बन सकेंगे। (संवाद)
चरणबद्ध तरीके से लागू होगी नई व्यवस्था
सीबीएसई के निर्देशानुसार तीसरी भाषा की पढ़ाई सत्र 2026-27 में केवल कक्षा छह से शुरू होगी। इसके बाद प्रत्येक वर्ष इसे एक-एक कक्षा में बढ़ाया जाएगा। सत्र 2027-28 में कक्षा छह व सात, 2028-29 में छह से आठ, 2029-30 में कक्षा छह से नौवीं और 2030-31 तक कक्षा छह से दसवीं तक तीसरी भाषा अनिवार्य कर दी जाएगी। इस चरणबद्ध व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों पर अचानक अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव से बचाना है।
नौवीं में गणित-विज्ञान के दो स्तर से मिलेगा विकल्प
नवोदय की प्राचार्य गीता मिश्रा ने बताया कि बोर्ड ने कक्षा नौवीं के विद्यार्थियों के लिए गणित और विज्ञान विषयों में दो-स्तरीय प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। इससे छात्रों को अपनी क्षमता और रुचि के अनुरूप विषयों का चयन करने में सुविधा मिलेगी। शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह व्यवस्था कमजोर छात्रों का दबाव कम करेगी, वहीं मेधावी विद्यार्थियों को उन्नत स्तर पर अध्ययन का अवसर देगी।