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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Balrampur News ›   Devipatan Four-Lane Project: Government cannot pressure anyone to sell land, High Court rules.

देवीपाटन फोरलेन मामला: जमीन बेचने के लिए किसी पर दबाव नहीं बना सकती सरकार, हाईकोर्ट ने दिया फैसला

Sun, 28 Jun 2026 08:36 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, अमेठी
अमर उजाला नेटवर्क, अमेठी Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Sun, 28 Jun 2026 08:36 PM IST
सार

देवीपाटन मंदिर परिक्षेत्र में फोरलेन सड़क निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण मामले में हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कहा कि भू-स्वामी जमीन बेचने को तैयार नहीं हैं तो कानून के तहत अधिग्रहण करें। जबरन सेल डीड नहीं कराई जा सकती।
 

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Devipatan Four-Lane Project: Government cannot pressure anyone to sell land, High Court rules.
- फोटो : Adobe Stock

विस्तार

देवीपाटन मंदिर परिक्षेत्र में फोरलेन सड़क निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि सरकार किसी भी भू-स्वामी को जबरन जमीन की बिक्री विलेख (सेल डीड) करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। यदि कोई व्यक्ति अपनी जमीन बेचना नहीं चाहता, तो सरकार को उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013 के तहत विधिक प्रक्रिया अपनाकर जमीन का अधिग्रहण करना होगा। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद तहसील प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी है।

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न्यायमूर्ति पंकज भाटिया और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने यह आदेश अनिल कुमार गुप्ता व आठ अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य की याचिका पर दिया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि तुलसीपुर के ग्राम देवीपाटन स्थित गाटा संख्या 271, 272 और 305 की जमीन फोरलेन सड़क चौड़ीकरण के लिए बिना विधिक अधिग्रहण प्रक्रिया अपनाए और उचित मुआवजा दिए लेने का प्रयास किया जा रहा है।
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सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि परियोजना के लिए करीब 80 प्रतिशत भूमि सेल डीड के माध्यम से खरीदी जा चुकी है और लगभग 100 रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं। सरकार का कहना था कि याचिकाकर्ताओं से सहमति नहीं बन सकी। इस पर याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि वे प्रस्तावित कीमत पर अपनी जमीन बेचने के लिए तैयार नहीं हैं और उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार किसी को भी जबरन जमीन बेचने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। यदि भू-स्वामी अपनी इच्छा से जमीन नहीं बेचता है तो सरकार को कानून के तहत अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनानी होगी। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग अपनी इच्छा से जमीन बेचना चाहते हैं, उनके लिए यह आदेश किसी प्रकार की बाधा नहीं होगा।


एसडीएम बोले- अदालत के आदेश का होगा पालन
उप जिलाधिकारी राकेश कुमार जयंत ने कहा कि न्यायालय के आदेश का पूरी तरह पालन किया जाएगा। अभिलेखों के अनुसार नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि ओवरब्रिज का डिजाइन पहले ही बदलवा दिया गया था। इससे परियोजना की लागत करीब 10 करोड़ रुपये बढ़ गई, लेकिन प्रभावित लोगों की काफी जमीन बच गई। अब मकानों और अन्य संपत्तियों का वर्तमान मूल्यांकन कराया जाएगा। उसी आधार पर नया मुआवजा तय होगा, जो पहले से कम या अधिक भी हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग अपनी इच्छा से बैनामा कराना चाहते हैं, वे तहसील आकर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

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