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Balrampur News: बदलती जीवनशैली से बढ़ रहे मधुमेह-बीपी के मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Tue, 24 Mar 2026 11:43 PM IST
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फोटो-24-बलरामपुर के जिला मेमोरियल अस्पताल में आयोजित संवाद कार्यक्रम में मौजूद लोग ।-संवाद
- फोटो : सांकेतिक
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बलरामपुर। जिला मेमोरियल अस्पताल सभागार में मंगलवार को अमर उजाला की ओर से आयोजित संवाद कार्यक्रम में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बदलती जीवनशैली और संक्रमण के बढ़ते प्रभावों को लेकर चिंता जताई। चिकित्सकों ने बताया कि एक ओर मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर क्षय रोग जैसे संक्रमण अब बच्चों में भी देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने लोगों को नियमित जांच कराने, स्वच्छता बनाए रखने और समय पर उपचार लेने की सलाह दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश सिंह, चेस्ट फिजिशियन डॉ. गिरधर चौहान और एनसीडी क्लीनिक के चिकित्साधिकारी डॉ. ऋषि श्रीवास्तव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद चिकित्सकों ने अलग-अलग विषयों पर जानकारी देते हुए लोगों के सवालों के जवाब दिए।
एनसीडी क्लीनिक के चिकित्साधिकारी डॉ. ऋषि श्रीवास्तव ने बताया कि गैर संचारी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं, जिनमें मधुमेह, कैंसर, हृदय रोग और उच्च रक्तचाप प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि असंतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी और तनाव इसके मुख्य कारण हैं। इन बीमारियों के लक्षण देर से सामने आते हैं, इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि जिला मेमोरियल अस्पताल के कमरा नंबर दो में संचालित एनसीडी क्लीनिक में इन रोगों की जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है। चेस्ट फिजिशियन डॉ. गिरधर चौहान ने फेफड़ों से संबंधित बीमारियों पर जानकारी देते हुए कहा कि धूम्रपान और प्रदूषण के कारण अस्थमा, निमोनिया और क्षय रोग के मामले बढ़ रहे हैं। इन बीमारियों में सांस लेने में दिक्कत, लगातार खांसी, सीने में दर्द और थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। उन्होंने बताया कि लक्षण दिखने पर जांच कराना जरूरी है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि क्षय रोग अब बच्चों में भी सामने आ रहा है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, बुखार, वजन कम होना, भूख न लगना और सुस्ती जैसे लक्षण टीबी के संकेत हो सकते हैं। ऐसे में अभिभावकों को तुरंत जांच करानी चाहिए।
लोगों ने किए सवाल, चिकित्सकों ने दिए जवाब
अभिभावक सरला व कांता ने क्षय रोग के इलाज के बारे में प्रश्न पूछा। इस पर चेस्ट फिजिशियन ने कहा कि जिला अस्पताल व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर क्षय रोग का इलाज मुफ्त है। क्षय रोगियों को पोषण के लिए एक हजार रुपये प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि भी दिया जाता है। रामजानकी व सुधीर ने मधुमेह व ब्लड प्रेशर के बारे में सवाल पूछे। डॉ. ऋषि श्रीवास्तव ने कहा कि बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास-भूख लगना, बिना कारण वजन घटना, थकान, धुंधली दृष्टि और सिरदर्द की समस्या है तो व्यक्ति ब्लड प्रेशर का शिकार हो सकता है। जबकि मधुमेह में त्वचा में संक्रमण व घाव धीरे भरने की समस्या देखी जा सकती है।
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कार्यक्रम का शुभारंभ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश सिंह, चेस्ट फिजिशियन डॉ. गिरधर चौहान और एनसीडी क्लीनिक के चिकित्साधिकारी डॉ. ऋषि श्रीवास्तव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद चिकित्सकों ने अलग-अलग विषयों पर जानकारी देते हुए लोगों के सवालों के जवाब दिए।
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एनसीडी क्लीनिक के चिकित्साधिकारी डॉ. ऋषि श्रीवास्तव ने बताया कि गैर संचारी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं, जिनमें मधुमेह, कैंसर, हृदय रोग और उच्च रक्तचाप प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि असंतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी और तनाव इसके मुख्य कारण हैं। इन बीमारियों के लक्षण देर से सामने आते हैं, इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि जिला मेमोरियल अस्पताल के कमरा नंबर दो में संचालित एनसीडी क्लीनिक में इन रोगों की जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है। चेस्ट फिजिशियन डॉ. गिरधर चौहान ने फेफड़ों से संबंधित बीमारियों पर जानकारी देते हुए कहा कि धूम्रपान और प्रदूषण के कारण अस्थमा, निमोनिया और क्षय रोग के मामले बढ़ रहे हैं। इन बीमारियों में सांस लेने में दिक्कत, लगातार खांसी, सीने में दर्द और थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। उन्होंने बताया कि लक्षण दिखने पर जांच कराना जरूरी है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि क्षय रोग अब बच्चों में भी सामने आ रहा है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, बुखार, वजन कम होना, भूख न लगना और सुस्ती जैसे लक्षण टीबी के संकेत हो सकते हैं। ऐसे में अभिभावकों को तुरंत जांच करानी चाहिए।
लोगों ने किए सवाल, चिकित्सकों ने दिए जवाब
अभिभावक सरला व कांता ने क्षय रोग के इलाज के बारे में प्रश्न पूछा। इस पर चेस्ट फिजिशियन ने कहा कि जिला अस्पताल व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर क्षय रोग का इलाज मुफ्त है। क्षय रोगियों को पोषण के लिए एक हजार रुपये प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि भी दिया जाता है। रामजानकी व सुधीर ने मधुमेह व ब्लड प्रेशर के बारे में सवाल पूछे। डॉ. ऋषि श्रीवास्तव ने कहा कि बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास-भूख लगना, बिना कारण वजन घटना, थकान, धुंधली दृष्टि और सिरदर्द की समस्या है तो व्यक्ति ब्लड प्रेशर का शिकार हो सकता है। जबकि मधुमेह में त्वचा में संक्रमण व घाव धीरे भरने की समस्या देखी जा सकती है।