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Balrampur News: 707 विद्यालयों में विकसित होगा किचन गार्डन
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बलरामपुर के कंपोजिट विद्यालय हिंडुलीकला में स्थापित किचन गार्डेन ।-संवाद
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बलरामपुर। जिले के 707 परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की थाली में ताजी और जैविक सब्जियां शामिल करने की पहल शुरू हो गई है। इसके तहत 14 लाख 14 हजार रुपये से सभी चयनित स्कूलों में किचन गार्डन विकसित किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय को दो-दो हजार रुपये की धनराशि आवंटित की गई है।
इस योजना का उद्देश्य मिड-डे मील (पीएम पोषण योजना) को और पौष्टिक बनाना है, ताकि बच्चों को ताजी सब्जियां मिल सकें और कुपोषण की समस्या को दूर किया जा सके। किचन गार्डन के जरिये बच्चों को न केवल पौष्टिक आहार मिलेगा, बल्कि वे प्रकृति और खेती-बाड़ी से भी जुड़ेंगे। विद्यालय परिसर में किचन गार्डन विकसित करने के लिए पॉली बैग, ग्रो बैग, मटके, जूट की थैलियां, क्यारियां और गमलों का उपयोग किया जाएगा। इनमें लौकी, कद्दू, करेला, खीरा, तरोई जैसी हरी सब्जियों के साथ-साथ अमरूद, आंवला, सहजन, पपीता, मीठा नीम, तुलसी, करौंदा, नींबू और अनार के पौधे लगाए जाएंगे।
बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक होगी यह पहल
इस पहल से बच्चे पौधों की देखभाल, सिंचाई और टीम वर्क जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेकर जिम्मेदारी और सहयोग की भावना भी सीखेंगे। यह पहल बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक होगी। इससे स्कूलों का वातावरण हरा-भरा बनेगा और विद्यार्थी प्रकृति के और करीब आएंगे।
- शुभम शुक्ल, बीएसए बलरामपुर
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इस योजना का उद्देश्य मिड-डे मील (पीएम पोषण योजना) को और पौष्टिक बनाना है, ताकि बच्चों को ताजी सब्जियां मिल सकें और कुपोषण की समस्या को दूर किया जा सके। किचन गार्डन के जरिये बच्चों को न केवल पौष्टिक आहार मिलेगा, बल्कि वे प्रकृति और खेती-बाड़ी से भी जुड़ेंगे। विद्यालय परिसर में किचन गार्डन विकसित करने के लिए पॉली बैग, ग्रो बैग, मटके, जूट की थैलियां, क्यारियां और गमलों का उपयोग किया जाएगा। इनमें लौकी, कद्दू, करेला, खीरा, तरोई जैसी हरी सब्जियों के साथ-साथ अमरूद, आंवला, सहजन, पपीता, मीठा नीम, तुलसी, करौंदा, नींबू और अनार के पौधे लगाए जाएंगे।
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बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक होगी यह पहल
इस पहल से बच्चे पौधों की देखभाल, सिंचाई और टीम वर्क जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेकर जिम्मेदारी और सहयोग की भावना भी सीखेंगे। यह पहल बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक होगी। इससे स्कूलों का वातावरण हरा-भरा बनेगा और विद्यार्थी प्रकृति के और करीब आएंगे।
- शुभम शुक्ल, बीएसए बलरामपुर