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Balrampur News: इलाज में लापरवाही पर नवजात की मौत, नोवा हॉस्पिटल सील

Sun, 16 Aug 2026 11:06 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Sun, 16 Aug 2026 11:06 PM IST
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Newborn dies due to negligence in treatment; Nova Hospital sealed
फोटो-36-बलरामपुर के उतरौला रोड पर ​स्थित नाेवा हा​स्पिटल ।-स्रोत: विभाग
बलरामपुर। नगर के भगवतीगंज-उतरौला मार्ग स्थित नोवा हॉस्पिटल में उपचार के दौरान नवजात की मौत का मामला सामने आया है। बच्चे की मौत के बाद परिजनों से अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। पुलिस बल के पहुंचने के बाद परिजन शांत हुए। स्वास्थ्य विभाग की जांच में नोवा हॉस्पिटल बिना लाइसेंस के ही संचालित पाया गया। नवजात की मौत के बाद मामला बढ़ता देख सीएमओ के निर्देश पर हॉस्पिटल को सील कर दिया गया है।
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थाना हरैया सतघरवा के कटकुइयां निवासी अमित कुमार यादव ने नगर कोतवाली में तहरीर देकर बताया कि पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर 13 अगस्त की रात तीन बजे उसने नोवा हॉस्पिटल में भर्ती कराया। भोर 4:30 बजे खुशबू ने एक बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा दोनों बिल्कुल स्वस्थ थे। बताया कि अस्पताल में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। अप्रशिक्षित नर्स ने जांच के नाम पर बच्चे के शरीर से दो बार खून निकाला। जांच के एवज में उससे कई बार पैसे भी लिए गए। 15 अगस्त की सुबह हालत बिगड़ने पर करीब 11 बजे बच्चे की मौत हो गई। अमित का कहना है कि यदि डॉक्टर की देखरेख में बच्चे का इलाज होता वह स्वस्थ रहता। बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल के सामने हंगामा किया। अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। नगर कोतवाली की पुलिस ने कार्रवाई का भरोसा देते हुए परिजनों को शांत कराया। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.मीनाक्षी चौधरी, प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. जावेद अख्तर व राजेश कुमार हंस की टीम ने 15 अगस्त की देर शाम बिना लाइसेंस के संचालित नोवा हॉस्पिटल को सील कर दिया। नगर कोतवाल संतोष कुमार मिश्र ने बताया कि तहरीर मिली है। मामले की जांच की जा रही है।
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छह महीने तक जिम्मेदारों की नहीं पड़ी नजर
बलरामपुर-उतरौला मुख्य मार्ग पर धर्मपुर के पास नोवा हॉस्पिटल का संचालन बीते छह माह से चल रहा था। इसी मार्ग से दिन भर स्वास्थ्य विभाग के मुखिया व अन्य अधिकारियों का आवागमन होता है, बावजूद किसी ने जांच करना मुनासिब नहीं समझा। विभागीय कर्मियों की मानें तो निजी प्रतिष्ठान का नोडल जिन्हें बनाया गया है, वह अक्सर जिले में ही नहीं रहते हैं। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रवि नंदन त्रिपाठी नोडल हैं। निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर, नर्सिंग होम व अस्पतालों के पंजीकरण व नवीनीकरण की जिम्मेदारी उन्हीं के ऊपर है।
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अलग-अलग टीमें करेंगी जांच
जिले में संचालित सभी निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर, नर्सिंग होम व अस्पतालों के लाइसेंस व नवीनीकरण की जांच के लिए अलग-अलग टीमें बनाई जाएगी। जो भी प्रतिष्ठान बिना लाइसेंस के संचालित हैं, उनके संचालक खुद ही लाइसेंस के लिए आवेदन कर दें, नहीं तो प्रतिष्ठान सील के साथ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी, सीएमओ बलरामपुर

फोटो-36-बलरामपुर के उतरौला रोड पर स्थित नाेवा हास्पिटल ।-स्रोत: विभाग

फोटो-36-बलरामपुर के उतरौला रोड पर स्थित नाेवा हास्पिटल ।-स्रोत: विभाग

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