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Balrampur News: अंतरिक्ष की बारीकियों से रूबरू हो रहे गांव के बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 06 May 2026 11:11 PM IST
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फोटो-14-बलरामपुर के परिषदीय विद्यालय में स्थापित स्पैस लैब में खगोल विज्ञान के बारे में जानकार
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बलरामपुर। ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों के लिए अब अंतरिक्ष केवल किताबों का विषय नहीं रहा। जिले के परिषदीय विद्यालयों में स्थापित स्पेस लैब के माध्यम से बच्चे अंतरिक्ष की जटिल अवधारणाओं को प्रत्यक्ष रूप से समझ रहे हैं। इससे उनमें जिज्ञासा के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी विकसित हो रहा है।
खगोल विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों को ब्रह्मांड की सुंदरता से जोड़ने के लिए सात मई को अंतरराष्ट्रीय खगोल विज्ञान दिवस मनाया जाता है। जिले में गांव के बच्चों को खगोल विज्ञान के प्रति जागरूक करने और उनमें वैज्ञानिक सोच विकसित करने के उद्देश्य से जिले के सात परिषदीय विद्यालयों में स्पेस लैब की स्थापना की गई है। इनमें सदर विकास खंड के कंपोजिट विद्यालय कलवारी, पचपेड़वा के प्राथमिक विद्यालय शंकरपुर कला, श्रीदत्तगंज के कंपोजिट विद्यालय बायभीट, रेहरा बाजार के कंपोजिट विद्यालय सरायखास, उतरौला के कंपोजिट विद्यालय इमिलिया बनघुसरा, तुलसीपुर के कंपोजिट विद्यालय महराजगंज तराई तथा गैंड़ास बुजुर्ग के जूनियर हाईस्कूल दुधरा शामिल हैं। यहां छात्र-छात्राएं ग्रहों की संरचना, उपग्रह तंत्र, अंतरिक्ष यानों की कार्यप्रणाली और वैज्ञानिक उपकरणों के प्रयोग को करीब से देख पा रहे हैं।
ग्रामीण शिक्षा में बदलाव की नई पहल
बीएसए शुभम शुक्ला ने बताया कि प्रयोग आधारित शिक्षा से बच्चों की समझ बेहतर हो रही है और वे जटिल विषयों को आसानी से ग्रहण कर रहे हैं। इन स्पेस लैब के माध्यम से बच्चों को पारंपरिक पढ़ाई से आगे बढ़ाकर व्यावहारिक ज्ञान दिया जा रहा है। आधुनिक उपकरणों और मॉडलों की मदद से विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को सरल बनाया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों की विषय में रुचि लगातार बढ़ रही है।
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प्रयोगों से विकसित हो रही वैज्ञानिक सोच
सीडीओ हिमांशु गुप्ता ने बताया कि स्पेस लैब में विद्यार्थियों को ग्रहों की गति, सौरमंडल की संरचना और अंतरिक्ष तकनीक जैसे विषयों को प्रयोगों के जरिए समझाया जा रहा है। इससे बच्चों की तार्किक क्षमता मजबूत हो रही है और वे नई खोजों के प्रति उत्साहित हो रहे हैं, जो भविष्य में उनके करियर के लिए भी लाभकारी साबित हो सकता है।
खगोल विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों को ब्रह्मांड की सुंदरता से जोड़ने के लिए सात मई को अंतरराष्ट्रीय खगोल विज्ञान दिवस मनाया जाता है। जिले में गांव के बच्चों को खगोल विज्ञान के प्रति जागरूक करने और उनमें वैज्ञानिक सोच विकसित करने के उद्देश्य से जिले के सात परिषदीय विद्यालयों में स्पेस लैब की स्थापना की गई है। इनमें सदर विकास खंड के कंपोजिट विद्यालय कलवारी, पचपेड़वा के प्राथमिक विद्यालय शंकरपुर कला, श्रीदत्तगंज के कंपोजिट विद्यालय बायभीट, रेहरा बाजार के कंपोजिट विद्यालय सरायखास, उतरौला के कंपोजिट विद्यालय इमिलिया बनघुसरा, तुलसीपुर के कंपोजिट विद्यालय महराजगंज तराई तथा गैंड़ास बुजुर्ग के जूनियर हाईस्कूल दुधरा शामिल हैं। यहां छात्र-छात्राएं ग्रहों की संरचना, उपग्रह तंत्र, अंतरिक्ष यानों की कार्यप्रणाली और वैज्ञानिक उपकरणों के प्रयोग को करीब से देख पा रहे हैं।
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ग्रामीण शिक्षा में बदलाव की नई पहल
बीएसए शुभम शुक्ला ने बताया कि प्रयोग आधारित शिक्षा से बच्चों की समझ बेहतर हो रही है और वे जटिल विषयों को आसानी से ग्रहण कर रहे हैं। इन स्पेस लैब के माध्यम से बच्चों को पारंपरिक पढ़ाई से आगे बढ़ाकर व्यावहारिक ज्ञान दिया जा रहा है। आधुनिक उपकरणों और मॉडलों की मदद से विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को सरल बनाया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों की विषय में रुचि लगातार बढ़ रही है।
प्रयोगों से विकसित हो रही वैज्ञानिक सोच
सीडीओ हिमांशु गुप्ता ने बताया कि स्पेस लैब में विद्यार्थियों को ग्रहों की गति, सौरमंडल की संरचना और अंतरिक्ष तकनीक जैसे विषयों को प्रयोगों के जरिए समझाया जा रहा है। इससे बच्चों की तार्किक क्षमता मजबूत हो रही है और वे नई खोजों के प्रति उत्साहित हो रहे हैं, जो भविष्य में उनके करियर के लिए भी लाभकारी साबित हो सकता है।