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Banda News: 408 कृषि सखियां बदल रहीं खेती और खुशहाली की तस्वीर
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Mon, 16 Mar 2026 12:26 AM IST
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बांदा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से प्रशिक्षित 408 कृषि सखियां बुंदेलखंड में खेती और पशुपालन के तरीकों में बदलाव ला रही हैं। ये सखियां किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा दे रही हैं। विभाग ने इन्हें फार्म आजीविका सखी नाम दिया है।
ये कृषि सखियां मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए जैविक कीटनाशक और खाद स्वयं तैयार करती हैं। धनजीव अमृत और बीज अमृत जैसे उत्पादों से फसलों का उत्पादन बढ़ा रही हैं। वे गांवों में कृषि पाठशाला और पशु पाठशाला आयोजित करती हैं। इन पाठशालाओं में किसानों को प्राकृतिक खेती के गुर सिखाए जाते हैं। साथ ही, पशुओं की साफ-सफाई, टीकाकरण और हर्बल उपचार के प्रति जागरूक किया जाता है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला मिशन प्रबंधक सुनील कुमार ने बताया कि ये सखियां लगन से कार्य कर रही हैं। इन्हें एक किचन गार्डन बनवाने के लिए 500 रुपये का भुगतान किया जाता है, जिससे उन्हें आर्थिक सहायता मिलती है।
पोषण वाटिका से बदलाव
ये प्रशिक्षित महिलाएं ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जाकर किचन गार्डन और प्रेरणा पोषण वाटिका तैयार करवा रही हैं। बड़ोखर खुर्द की सरिता द्विवेदी और रीगा की सरिता शर्मा जैसी कई सखियां इसमें शामिल हैं। महुआ क्षेत्र की ऋतु, बिसंडा की राधा और नरैनी की श्रीदेवी भी सक्रिय हैं। ये सभी कृषि सखियां अब अन्य महिला किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं।
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ये कृषि सखियां मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए जैविक कीटनाशक और खाद स्वयं तैयार करती हैं। धनजीव अमृत और बीज अमृत जैसे उत्पादों से फसलों का उत्पादन बढ़ा रही हैं। वे गांवों में कृषि पाठशाला और पशु पाठशाला आयोजित करती हैं। इन पाठशालाओं में किसानों को प्राकृतिक खेती के गुर सिखाए जाते हैं। साथ ही, पशुओं की साफ-सफाई, टीकाकरण और हर्बल उपचार के प्रति जागरूक किया जाता है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला मिशन प्रबंधक सुनील कुमार ने बताया कि ये सखियां लगन से कार्य कर रही हैं। इन्हें एक किचन गार्डन बनवाने के लिए 500 रुपये का भुगतान किया जाता है, जिससे उन्हें आर्थिक सहायता मिलती है।
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पोषण वाटिका से बदलाव
ये प्रशिक्षित महिलाएं ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जाकर किचन गार्डन और प्रेरणा पोषण वाटिका तैयार करवा रही हैं। बड़ोखर खुर्द की सरिता द्विवेदी और रीगा की सरिता शर्मा जैसी कई सखियां इसमें शामिल हैं। महुआ क्षेत्र की ऋतु, बिसंडा की राधा और नरैनी की श्रीदेवी भी सक्रिय हैं। ये सभी कृषि सखियां अब अन्य महिला किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं।