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UP: पहले फोटो कॉपी की दुकान, 20 साल में बने करोड़पति; कारोबारियों के बैंक खाते और गहनों के साथ गाड़ियां सीज

अमर उजाला नेटवर्क, बांदा Published by: Sharukh Khan Updated Mon, 16 Mar 2026 04:06 PM IST
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सार

बांदा में कारोबारियों के बैंक खाते, गहने, गाड़ियां सीज हो गई हैं। संपत्ति की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। कुल 500 करोड़ रुपये से अधिक के नामी-बेनामी कारोबार का पर्दाफाश हुआ है।
 

Businessmen Bank Accounts Jewelry and Vehicles Seized Ban Imposed on Sale of Property In Banda
बांदा में आयकर विभाग की कार्रवाई - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

आयकर विभाग की ग्रेनाइट खनन, मेडिकल और रियल एस्टेट व्यवसायों से जुड़े 18 से 20 कारोबारियों और ठेकेदारों के ठिकानों पर छापे की कार्रवाई रविवार को खत्म हो गई। पांच दिनों तक चली इस गहन जांच में सालाना 10 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी का खुलासा हुआ है। 
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कुल 500 करोड़ रुपये से अधिक के नामी-बेनामी कारोबार का पर्दाफाश हुआ है। विभाग ने जांच के बाद सामने आए कारोबारियों के बैंक खातों, गाड़ियों, गहनों को सीज करने के साथ ही संपत्तियों की बिक्री पर भी रोक लगा दी है। रविवार को एक बार फिर टीम कारोबारी दिलीप सिंह के यहां भोर में पहुंची। यहां करीब तीन घंटे रुककर जरूरी दस्तावेज एकत्र कर लौट गई।
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कानपुर आयकर विभाग की टीमों ने बीते बुधवार को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में जीडी ग्रुप के संचालक दिलीप सिंह, शिवशरण सिंह, सीरजध्वज सिंह और अज्ञात गुप्ता जैसे प्रमुख कारोबारियों के ठिकानों पर एक साथ छापा मारा था। बिहार के एक मेडिकल कारोबारी व पूर्व मंत्री की शिकायत के बाद चित्रकूटधाम मंडल के बांदा, चित्रकूट और महोबा जनपदों में चल रहे स्टोन क्रशर, मौरंग खदान, अस्पताल, पेट्रोल पंप और रियल स्टेट जैसे व्यवसायों की जांच की गई। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि कारोबारी महज एक करोड़ रुपये के कारोबार पर होने वाली आय से संबंधित टैक्स का भुगतान कर रहे थे जबकि 400 करोड़ रुपये के कारोबार को फर्जी नामों से संचालित किया जा रहा था।
 

बरामदगी और सीज की गई संपत्तियां
जांच के दौरान आयकर विभाग ने करोड़ों रुपये के सोने के गहने, हीरे की अंगूठियां, हार, महंगी गाड़ियां और कई बैंक खातों का पता चला। टीम से गहनों, गाड़ियों के साथ ही बैंक खाते सीज किए हैं। इसके अलावा कई महानगरों में कारोबारियों के परिजन और रिश्तेदारों के नाम पर खरीदे गए मकानों की बिक्री पर भी रोक लगा दी गई है।
 

संभावित जुर्माना और आगे की कार्रवाई
आयकर विभाग के एक ज्वाइंट कमिश्नर ने बताया कि अब तक की जांच में सालाना 10 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी पाई गई है और यह सिलसिला दशकों से चल रहा था। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभाग इन कारोबारियों से 20 गुना जुर्माने के साथ टैक्स की वसूली करेगा। जांच में लगभग एक महीने का समय लगने का अनुमान है। बरामद दस्तावेजों की गहनता से जांच की जाएगी और कारोबारी सहित जिनके नाम पर संपत्तियां खरीदी गई हैं या फर्म बनाई गई हैं उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके लिए विभागीय नोटिस जारी किए जाएंगे।
 

पहले फोटो कॉपी की दुकान, 20 साल में बने करोड़पति
अवनि परिधि अस्पताल संचालक व ठेकेदार अज्ञात गुप्ता की गिनती आज शहर के अमीर लोगों में की जाती है। मूल रूप से पैलानी के खप्टिहा कलां निवासी अज्ञात करीब 30 वर्ष पहले शहर में किराये के घर में रहा करते थे। कचहरी परिसर के पास एक फोटो कॉपी की दुकान से काम शुरू किया और तीन दशक में करोड़ों के मालिक हो गए। शहर के अलावा गोमती नगर, लखनऊ में करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर ली।
 

एपीओ का बेटा आज अरबों का मालिक
हमीरपुर-महोबा-तिंदवारी संसदीय सीट से चुनाव लड़ चुके दिलीप सिंह आज अरबों के मालिक हैं। बांदा के महोखर गांव के रहने वाले दिलीप के पिता सहायक अभियोजन अधिकारी रहे। एक करीबी ने बताया कि 2001 में एक राजनीतिज्ञ व मौरंग कारोबारी के यहां कार्यरत थे। यहां विश्वासपात्र बनने के बाद दिलीप सिंह की किस्मत चमकी और वह 15 वर्षों में अकूत संपदा के मालिक हो गए। चर्चा तो यह भी है कि एक मंत्री के संपर्क में आने के बाद इन्होंने मौरंग खदानों से करोड़ों कमाए।
 
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