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Banda News: कारोबारियों के बैंक खाते, गहने, गाड़ियां सीज, संपत्ति की बिक्री पर रोक
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Mon, 16 Mar 2026 12:39 AM IST
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फोटो- 07 शिवशरण सिंह के यहां जांच के दौरान गेट में बैठे पुलिस कर्मी। संवाद
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बांदा। आयकर विभाग की ग्रेनाइट खनन, मेडिकल और रियल एस्टेट व्यवसायों से जुड़े 18 से 20 कारोबारियों और ठेकेदारों के ठिकानों पर छापे की कार्रवाई रविवार को खत्म हो गई। पांच दिनों तक चली इस गहन जांच में सालाना 10 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी का खुलासा हुआ है। कुल 500 करोड़ रुपये से अधिक के नामी-बेनामी कारोबार का पर्दाफाश हुआ है। विभाग ने जांच के बाद सामने आए कारोबारियों के बैंक खातों, गाड़ियों, गहनों को सीज करने के साथ ही संपत्तियों की बिक्री पर भी रोक लगा दी है। रविवार को एक बार फिर टीम कारोबारी दिलीप सिंह के यहां भोर में पहुंची। यहां करीब तीन घंटे रुककर जरूरी दस्तावेज एकत्र कर लौट गई।
कानपुर आयकर विभाग की टीमों ने बीते बुधवार को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में जीडी ग्रुप के संचालक दिलीप सिंह, शिवशरण सिंह, सीरजध्वज सिंह और अज्ञात गुप्ता जैसे प्रमुख कारोबारियों के ठिकानों पर एक साथ छापा मारा था। बिहार के एक मेडिकल कारोबारी व पूर्व मंत्री की शिकायत के बाद चित्रकूटधाम मंडल के बांदा, चित्रकूट और महोबा जनपदों में चल रहे स्टोन क्रशर, मौरंग खदान, अस्पताल, पेट्रोल पंप और रियल स्टेट जैसे व्यवसायों की जांच की गई। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि कारोबारी महज एक करोड़ रुपये के कारोबार पर होने वाली आय से संबंधित टैक्स का भुगतान कर रहे थे जबकि 400 करोड़ रुपये के कारोबार को फर्जी नामों से संचालित किया जा रहा था।
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बरामदगी और सीज की गई संपत्तियां
जांच के दौरान आयकर विभाग ने करोड़ों रुपये के सोने के गहने, हीरे की अंगूठियां, हार, महंगी गाड़ियां और कई बैंक खातों का पता चला। टीम से गहनों, गाड़ियों के साथ ही बैंक खाते सीज किए हैं। इसके अलावा कई महानगरों में कारोबारियों के परिजन और रिश्तेदारों के नाम पर खरीदे गए मकानों की बिक्री पर भी रोक लगा दी गई है।
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संभावित जुर्माना और आगे की कार्रवाई
आयकर विभाग के एक ज्वाइंट कमिश्नर ने बताया कि अब तक की जांच में सालाना 10 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी पाई गई है और यह सिलसिला दशकों से चल रहा था। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभाग इन कारोबारियों से 20 गुना जुर्माने के साथ टैक्स की वसूली करेगा। जांच में लगभग एक महीने का समय लगने का अनुमान है। बरामद दस्तावेजों की गहनता से जांच की जाएगी और कारोबारी सहित जिनके नाम पर संपत्तियां खरीदी गई हैं या फर्म बनाई गई हैं उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके लिए विभागीय नोटिस जारी किए जाएंगे।
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पहले फोटो कॉपी की दुकान, 20 साल में बने करोड़पति
बांदा। अवनि परिधि अस्पताल संचालक व ठेकेदार अज्ञात गुप्ता की गिनती आज शहर के अमीर लोगों में की जाती है। मूल रूप से पैलानी के खप्टिहा कलां निवासी अज्ञात करीब 30 वर्ष पहले शहर में किराये के घर में रहा करते थे। कचहरी परिसर के पास एक फोटो कॉपी की दुकान से काम शुरू किया और तीन दशक में करोड़ों के मालिक हो गए। शहर के अलावा गोमती नगर, लखनऊ में करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर ली।
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एपीओ का बेटा आज अरबों का मालिक
हमीरपुर-महोबा-तिंदवारी संसदीय सीट से चुनाव लड़ चुके दिलीप सिंह आज अरबों के मालिक हैं। बांदा के महोखर गांव के रहने वाले दिलीप के पिता सहायक अभियोजन अधिकारी रहे। एक करीबी ने बताया कि 2001 में एक राजनीतिज्ञ व मौरंग कारोबारी के यहां कार्यरत थे। यहां विश्वासपात्र बनने के बाद दिलीप सिंह की किस्मत चमकी और वह 15 वर्षों में अकूत संपदा के मालिक हो गए। चर्चा तो यह भी है कि एक मंत्री के संपर्क में आने के बाद इन्होंने मौरंग खदानों से करोड़ों कमाए।
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कर्मचारियों का हस्ताक्षर कराया और अभिलेख लेकर लौटी आयकर टीम
- चार दिन तक चली जांच शनिवार की रात हुई समाप्त
- रविवार को क्रशर प्लांटों में गूंजी मशीनों की आवाज, लौटी रौनक
फोटो 15 एमएएचपी 11 परिचय-आयकर टीम की जांच के बाद पांचवें दिन पत्थरमंडी कबरई स्थित श्रिया ग्रेनाइट में चलता क्रशर प्लांट। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कबरई (महोबा)। पत्थरमंडी कबरई में 11 से 14 मार्च की रात तक तीन क्रशर प्लांटों में चली आयकर विभाग की जांच देर रात समाप्त हो गई। विभाग की टीमों ने तीनों प्लांट से बड़ी संख्या में जब्त किए गए अभिलेखों पर वहां मौजूद कर्मचारियों के हस्ताक्षर कराए और उसे लेकर रात 10 बजे लौट गई। टीमों के रवाना होते ही दूसरे क्रशर प्लांट कारोबारियों ने राहत की सांस ली। रविवार की सुबह से पहले की तरह क्रशर प्लांटों से मशीनों के पत्थर तोड़ने व उन्हें पीसने की आवाजें आने लगी और पत्थरमंडी की रौनक लौटी।
आयकर विभाग की तीन टीमों ने 11 मार्च को कबरई स्थित जगदंबा ग्रेनाइट, श्रिया ग्रेनाइट और दिदवारा स्थित श्रिया ग्रेनाइट पर छापा मारा था। इस दौरान कर्मचारियों के मोबाइल जब्त कर लिए गए और उनके बाहर जाने पर रोक लगाते हुए टीमों ने प्लांट में मिले अभिलेखों की विस्तार से जांच शुरू की। इसके बाद शुक्रवार को ड्रोन के जरिए मकरबई, खजुरिहा पहरा, रमकुंडा पहाड़ समेत कुछ अन्य खनन क्षेत्रों में मैपिंग कराई गई और फिर शनिवार को बड़ी संख्या में दस्तावेजों को कब्जे में लिया गया था। जांच के अंतिम चरण में आयकर टीम की ओर यह जानकारी दी गई कि चार दिन की जांच में अनियमित खनन की पुष्टि हुई है और करोड़ों की कर चोरी की आशंका है। संचालकों के दूसरे कारोबार के अभिलेखों से मिलान के बाद ही वास्तविक कर चोरी का पता चल सकेगा। इसके बाद टीम ने जब्त पुराने व नए अभिलेखों पर कर्मचारियों के हस्ताक्षर लिए और फिर रात दस बजे लौट गई।
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कानपुर आयकर विभाग की टीमों ने बीते बुधवार को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में जीडी ग्रुप के संचालक दिलीप सिंह, शिवशरण सिंह, सीरजध्वज सिंह और अज्ञात गुप्ता जैसे प्रमुख कारोबारियों के ठिकानों पर एक साथ छापा मारा था। बिहार के एक मेडिकल कारोबारी व पूर्व मंत्री की शिकायत के बाद चित्रकूटधाम मंडल के बांदा, चित्रकूट और महोबा जनपदों में चल रहे स्टोन क्रशर, मौरंग खदान, अस्पताल, पेट्रोल पंप और रियल स्टेट जैसे व्यवसायों की जांच की गई। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि कारोबारी महज एक करोड़ रुपये के कारोबार पर होने वाली आय से संबंधित टैक्स का भुगतान कर रहे थे जबकि 400 करोड़ रुपये के कारोबार को फर्जी नामों से संचालित किया जा रहा था।
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बरामदगी और सीज की गई संपत्तियां
जांच के दौरान आयकर विभाग ने करोड़ों रुपये के सोने के गहने, हीरे की अंगूठियां, हार, महंगी गाड़ियां और कई बैंक खातों का पता चला। टीम से गहनों, गाड़ियों के साथ ही बैंक खाते सीज किए हैं। इसके अलावा कई महानगरों में कारोबारियों के परिजन और रिश्तेदारों के नाम पर खरीदे गए मकानों की बिक्री पर भी रोक लगा दी गई है।
संभावित जुर्माना और आगे की कार्रवाई
आयकर विभाग के एक ज्वाइंट कमिश्नर ने बताया कि अब तक की जांच में सालाना 10 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी पाई गई है और यह सिलसिला दशकों से चल रहा था। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभाग इन कारोबारियों से 20 गुना जुर्माने के साथ टैक्स की वसूली करेगा। जांच में लगभग एक महीने का समय लगने का अनुमान है। बरामद दस्तावेजों की गहनता से जांच की जाएगी और कारोबारी सहित जिनके नाम पर संपत्तियां खरीदी गई हैं या फर्म बनाई गई हैं उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके लिए विभागीय नोटिस जारी किए जाएंगे।
पहले फोटो कॉपी की दुकान, 20 साल में बने करोड़पति
बांदा। अवनि परिधि अस्पताल संचालक व ठेकेदार अज्ञात गुप्ता की गिनती आज शहर के अमीर लोगों में की जाती है। मूल रूप से पैलानी के खप्टिहा कलां निवासी अज्ञात करीब 30 वर्ष पहले शहर में किराये के घर में रहा करते थे। कचहरी परिसर के पास एक फोटो कॉपी की दुकान से काम शुरू किया और तीन दशक में करोड़ों के मालिक हो गए। शहर के अलावा गोमती नगर, लखनऊ में करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर ली।
एपीओ का बेटा आज अरबों का मालिक
हमीरपुर-महोबा-तिंदवारी संसदीय सीट से चुनाव लड़ चुके दिलीप सिंह आज अरबों के मालिक हैं। बांदा के महोखर गांव के रहने वाले दिलीप के पिता सहायक अभियोजन अधिकारी रहे। एक करीबी ने बताया कि 2001 में एक राजनीतिज्ञ व मौरंग कारोबारी के यहां कार्यरत थे। यहां विश्वासपात्र बनने के बाद दिलीप सिंह की किस्मत चमकी और वह 15 वर्षों में अकूत संपदा के मालिक हो गए। चर्चा तो यह भी है कि एक मंत्री के संपर्क में आने के बाद इन्होंने मौरंग खदानों से करोड़ों कमाए।
कर्मचारियों का हस्ताक्षर कराया और अभिलेख लेकर लौटी आयकर टीम
- चार दिन तक चली जांच शनिवार की रात हुई समाप्त
- रविवार को क्रशर प्लांटों में गूंजी मशीनों की आवाज, लौटी रौनक
फोटो 15 एमएएचपी 11 परिचय-आयकर टीम की जांच के बाद पांचवें दिन पत्थरमंडी कबरई स्थित श्रिया ग्रेनाइट में चलता क्रशर प्लांट। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कबरई (महोबा)। पत्थरमंडी कबरई में 11 से 14 मार्च की रात तक तीन क्रशर प्लांटों में चली आयकर विभाग की जांच देर रात समाप्त हो गई। विभाग की टीमों ने तीनों प्लांट से बड़ी संख्या में जब्त किए गए अभिलेखों पर वहां मौजूद कर्मचारियों के हस्ताक्षर कराए और उसे लेकर रात 10 बजे लौट गई। टीमों के रवाना होते ही दूसरे क्रशर प्लांट कारोबारियों ने राहत की सांस ली। रविवार की सुबह से पहले की तरह क्रशर प्लांटों से मशीनों के पत्थर तोड़ने व उन्हें पीसने की आवाजें आने लगी और पत्थरमंडी की रौनक लौटी।
आयकर विभाग की तीन टीमों ने 11 मार्च को कबरई स्थित जगदंबा ग्रेनाइट, श्रिया ग्रेनाइट और दिदवारा स्थित श्रिया ग्रेनाइट पर छापा मारा था। इस दौरान कर्मचारियों के मोबाइल जब्त कर लिए गए और उनके बाहर जाने पर रोक लगाते हुए टीमों ने प्लांट में मिले अभिलेखों की विस्तार से जांच शुरू की। इसके बाद शुक्रवार को ड्रोन के जरिए मकरबई, खजुरिहा पहरा, रमकुंडा पहाड़ समेत कुछ अन्य खनन क्षेत्रों में मैपिंग कराई गई और फिर शनिवार को बड़ी संख्या में दस्तावेजों को कब्जे में लिया गया था। जांच के अंतिम चरण में आयकर टीम की ओर यह जानकारी दी गई कि चार दिन की जांच में अनियमित खनन की पुष्टि हुई है और करोड़ों की कर चोरी की आशंका है। संचालकों के दूसरे कारोबार के अभिलेखों से मिलान के बाद ही वास्तविक कर चोरी का पता चल सकेगा। इसके बाद टीम ने जब्त पुराने व नए अभिलेखों पर कर्मचारियों के हस्ताक्षर लिए और फिर रात दस बजे लौट गई।

फोटो- 07 शिवशरण सिंह के यहां जांच के दौरान गेट में बैठे पुलिस कर्मी। संवाद