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Banda News: भूरागढ़ दुर्ग में लगा मेला, नटबली की समाधि पर प्रेमियों ने टेका मत्था
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Fri, 16 Jan 2026 01:12 AM IST
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फोटो - 11 तालाब में स्थान करते श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : 1
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बांदा। मकर संक्रांति के अवसर पर शहर के ऐतिहासिक भूरागढ़ दुर्ग में दो दिवसीय मेले का भव्य आयोजन किया गया। जिसने हजारों श्रद्धालुओं और आगंतुकों को आकर्षित किया। यह मेला न केवल धार्मिक महत्व का प्रतीक रहा, बल्कि प्रेम, शौर्य और परंपराओं का संगम भी बना। केन नदी में स्नान, नौका विहार, विराट दंगल और नटबली की समाधि पर प्रेमियों के मत्था टेकने जैसे विभिन्न आकर्षणों ने मेले को खास बनाया।
मेले का एक प्रमुख आकर्षण नटबली की समाधि रही। जहां प्रेमी जोड़ों ने आकर मत्था टेका और अपनी मन्नतें मांगी। यह समाधि लगभग 600 वर्ष पूर्व ग्राम भूरागढ़ के नट, भूरा, और भूरागढ़ राजघराने की एक राजकुमारी के बीच पनपी एक अनूठी प्रेम कहानी की गवाह है। कहा जाता है कि राजघराने के विरोध के कारण प्रेमी को मार दिया गया, जिससे आहत होकर प्रेमिका ने भी अपनी जान दे दी।
उनकी याद में बना यह छोटा सा मंदिर हर साल मकर संक्रांति पर प्रेमियों के लिए आस्था का केंद्र बन जाता है। इसके अलावा ऐतिहासिक भूरागढ़ दुर्ग में स्थित शहीद स्मारक पर सेवानिवृत्त सैनिकों और समाजसेवियों ने जंगे-आज़ादी के शहीदों और भारतीय सेना के वीर जवानों को नमन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह स्थान 300 स्वतंत्रता सेनानियों की शहादत का गवाह है, जो देश के प्रति उनके सर्वोच्च बलिदान की याद दिलाता है।
मेले के दौरान एक विराट दंगल का भी आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न प्रदेशों के पुरुष और महिला पहलवानों ने अपनी कुश्ती कला का अद्भुत प्रदर्शन किया।
मकर संक्रांति पर किया स्नान, वैवाहिक रस्में निभाईं
फोटो - 11 तालाब में स्थान करते श्रद्धालु। संवाद
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बांदा : मटौंध कस्बे सहित पूरे क्षेत्र में मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं और बच्चों ने तालाबों और कुंडों में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
मकर संक्रांति के अवसर पर वैवाहिक संबंधों में भी रस्मों की अदायगी की गई। परंपरा के अनुसार, जिन लड़कियों की शादी तय हो चुकी है, उनके मायके पक्ष की ओर से ससुराल पक्ष को खिचड़ी आदि भेजकर इस रस्म को निभाया गया।
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मेले का एक प्रमुख आकर्षण नटबली की समाधि रही। जहां प्रेमी जोड़ों ने आकर मत्था टेका और अपनी मन्नतें मांगी। यह समाधि लगभग 600 वर्ष पूर्व ग्राम भूरागढ़ के नट, भूरा, और भूरागढ़ राजघराने की एक राजकुमारी के बीच पनपी एक अनूठी प्रेम कहानी की गवाह है। कहा जाता है कि राजघराने के विरोध के कारण प्रेमी को मार दिया गया, जिससे आहत होकर प्रेमिका ने भी अपनी जान दे दी।
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उनकी याद में बना यह छोटा सा मंदिर हर साल मकर संक्रांति पर प्रेमियों के लिए आस्था का केंद्र बन जाता है। इसके अलावा ऐतिहासिक भूरागढ़ दुर्ग में स्थित शहीद स्मारक पर सेवानिवृत्त सैनिकों और समाजसेवियों ने जंगे-आज़ादी के शहीदों और भारतीय सेना के वीर जवानों को नमन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह स्थान 300 स्वतंत्रता सेनानियों की शहादत का गवाह है, जो देश के प्रति उनके सर्वोच्च बलिदान की याद दिलाता है।
मेले के दौरान एक विराट दंगल का भी आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न प्रदेशों के पुरुष और महिला पहलवानों ने अपनी कुश्ती कला का अद्भुत प्रदर्शन किया।
मकर संक्रांति पर किया स्नान, वैवाहिक रस्में निभाईं
फोटो - 11 तालाब में स्थान करते श्रद्धालु। संवाद
बांदा : मटौंध कस्बे सहित पूरे क्षेत्र में मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं और बच्चों ने तालाबों और कुंडों में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
मकर संक्रांति के अवसर पर वैवाहिक संबंधों में भी रस्मों की अदायगी की गई। परंपरा के अनुसार, जिन लड़कियों की शादी तय हो चुकी है, उनके मायके पक्ष की ओर से ससुराल पक्ष को खिचड़ी आदि भेजकर इस रस्म को निभाया गया।

फोटो - 11 तालाब में स्थान करते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : 1

फोटो - 11 तालाब में स्थान करते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : 1

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