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Banda News: किशोरी से दुष्कर्म में एक दोषी को 20 साल की सजा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 31 Mar 2026 11:30 PM IST
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सा
बांदा। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो प्रदीप कुमार मिश्रा ने 15 वर्षीय किशोरी के साथ दुष्कर्म और अपहरण के दोषी अर्जुन पाल को 20 वर्ष का कठोर कारावास सुनाया है। अदालत ने उस पर सात रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जिसे अदा न करने पर उसे चार माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अर्थदंड की पूरी राशि पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी।
मामला कोतवाली नगर क्षेत्र के एक गांव का है। जहां पीड़िता के पिता ने चार फरवरी 2014 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके अनुसार 2 फरवरी 2014 की रात लगभग 8 बजे उसकी 15 वर्षीय नाबालिग बेटी जो इंटर कॉलेज में पढ़ती थी, अपनी मां के साथ खेतों की ओर गई थी। इसी दौरान अर्जुन पाल जो गांव के रामविशाल पाल के घर में किराए पर रहता था, अपने दो साथियों सुक्खू उर्फ अरविंद यादव और बद्री उर्फ लाला के साथ बाइक पर खड़ा था। खेत की ओर जाने के दौरान तीनों आरोपियों ने उसका हाथ पकड़कर उसे जबरन घसीटते हुए मोटरसाइकिल पर बैठा लिया था। तत्कालीन एसआई अनिरुद्ध प्रताप सिंह ने मामले की विवेचना कर तीनों आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था।
इस मामले में दो अन्य आरोपी भी थे। सुक्खू उर्फ अरविंद यादव की पत्रावली सुनवाई के लिए अलग कर दी गई थी। हालांकि 17 नवंबर 2022 को गवाहों के मुकर जाने के कारण न्यायाधीश ने उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। वहीं, बद्री उर्फ लाला को अदालत ने नाबालिग घोषित करते हुए उसकी पत्रावली जुवेनाइल कोर्ट में भेज दी थी, जो अभी भी विचाराधीन है।
वहीं, तीसरे आरोपी अर्जुन पाल जो कुछ दिनों तक अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, उसकी पत्रावली भी अलग कर सुनवाई की गई। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह पेश किए गए। अदालत ने पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया और दलीलों को सुना। इसके बाद विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने अपने 22 पृष्ठों के फैसले में अर्जुन पाल को दोषी पाया और उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास सुनाया। इसके अतिरिक्त उस पर सात रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
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बांदा। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो प्रदीप कुमार मिश्रा ने 15 वर्षीय किशोरी के साथ दुष्कर्म और अपहरण के दोषी अर्जुन पाल को 20 वर्ष का कठोर कारावास सुनाया है। अदालत ने उस पर सात रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जिसे अदा न करने पर उसे चार माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अर्थदंड की पूरी राशि पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी।
मामला कोतवाली नगर क्षेत्र के एक गांव का है। जहां पीड़िता के पिता ने चार फरवरी 2014 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके अनुसार 2 फरवरी 2014 की रात लगभग 8 बजे उसकी 15 वर्षीय नाबालिग बेटी जो इंटर कॉलेज में पढ़ती थी, अपनी मां के साथ खेतों की ओर गई थी। इसी दौरान अर्जुन पाल जो गांव के रामविशाल पाल के घर में किराए पर रहता था, अपने दो साथियों सुक्खू उर्फ अरविंद यादव और बद्री उर्फ लाला के साथ बाइक पर खड़ा था। खेत की ओर जाने के दौरान तीनों आरोपियों ने उसका हाथ पकड़कर उसे जबरन घसीटते हुए मोटरसाइकिल पर बैठा लिया था। तत्कालीन एसआई अनिरुद्ध प्रताप सिंह ने मामले की विवेचना कर तीनों आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था।
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इस मामले में दो अन्य आरोपी भी थे। सुक्खू उर्फ अरविंद यादव की पत्रावली सुनवाई के लिए अलग कर दी गई थी। हालांकि 17 नवंबर 2022 को गवाहों के मुकर जाने के कारण न्यायाधीश ने उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। वहीं, बद्री उर्फ लाला को अदालत ने नाबालिग घोषित करते हुए उसकी पत्रावली जुवेनाइल कोर्ट में भेज दी थी, जो अभी भी विचाराधीन है।
वहीं, तीसरे आरोपी अर्जुन पाल जो कुछ दिनों तक अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, उसकी पत्रावली भी अलग कर सुनवाई की गई। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह पेश किए गए। अदालत ने पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया और दलीलों को सुना। इसके बाद विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने अपने 22 पृष्ठों के फैसले में अर्जुन पाल को दोषी पाया और उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास सुनाया। इसके अतिरिक्त उस पर सात रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।