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Banda News: बननी थी वर्कशाॅप, जल निगम ने लगा दिए दो नलकूल

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 03 Jun 2026 11:29 PM IST
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A workshop was to be built, the Jal Nigam installed two tap coolers.
फोटो - 01 रोडवेज बस स्टैंड में लगा नलकूप व बना भवन। संवाद
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अतर्रा (बांदा)। अमृत योजना के तहत जल निगम सोलहवीं शाखा की ओर से राजकीय रोडवेज बस स्टैंड परिसर में बिना अनुमति के दो नलकूपों की स्थापना और भवन निर्माण का कार्य परिवहन निगम के अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बन गया है। इस मामले में परिवहन निगम ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है क्योंकि प्रस्तावित भूमि पर रोडवेज का क्षेत्रीय वर्कशॉप स्थापित किया जाना है।

अतर्रा कस्बे में जीर्ण-शीर्ण पेयजल परियोजना के जीर्णोद्धार के लिए शासन ने वर्ष 2023 में अमृत योजना (शहरी) के तहत 47.58 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी थी। इस परियोजना का जिम्मा जल निगम सोलहवीं शाखा को सौंपा गया है। योजना के अंतर्गत 10 नलकूप, तीन पानी की टंकी और 93 हजार किलोमीटर पाइपलाइन बिछाकर 10 हजार से अधिक परिवारों तक पानी पहुंचाना है। निर्माण कार्य लगभग 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है। समस्या तब उत्पन्न हुई जब कार्यदायी संस्था ने परिवहन निगम के रोडवेज बस स्टैंड की खाली पड़ी जमीन पर दो नलकूप स्थापित कर भवन का निर्माण शुरू कर दिया। परिवहन निगम के अधिकारियों का कहना है कि यह भूमि उनके क्षेत्रीय वर्कशॉप के लिए प्रस्तावित है और जल निगम ने बिना उनकी अनुमति के इस पर निर्माण कार्य किया है जो कि नियम विरुद्ध है।
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परिवहन निगम के अधिकारियों ने इस निर्माण पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह उनकी प्रस्तावित भूमि पर अवैध कब्जा है। परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) रामलवट ने स्पष्ट किया है कि उन्हें जमीन आवंटित करने का कोई अधिकार नहीं है, लेकिन यदि उनकी जमीन पर बिना अनुमति के अवैध निर्माण किया जाता है तो वे इसका कड़ा विरोध करेंगे।
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वहीं, जल निगम के अधिशासी अभियंता तपिश कुमार बालियान का कहना है कि जिस जमीन पर परिवहन निगम ने आपत्ति दर्ज कराई है उस जमीन के लिए तत्कालीन एसडीएम और प्रभारी अधिशासी अधिकारी नगर पालिका से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि निगम के पास नलकूप लगाने के लिए कोई अन्य भूमि उपलब्ध नहीं है।
गतिरोध और वित्तीय नुकसान

परिवहन निगम की आपत्ति के बाद फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया गया है। हालांकि दो नलकूपों की स्थापना और भवन निर्माण पर लगभग 25 लाख रुपये से अधिक का खर्च पहले ही हो चुका है। जल निगम अब परिवहन निगम के अधिकारियों से जमीन उपलब्ध कराने के लिए गणेश परिक्रमा कर रहा है। जब बात नहीं बनी तो डीएम के माध्यम से परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक (एमडी) को पत्र भेजकर जनहित में बेकार पड़ी जमीन जल निगम को देने का अनुरोध किया गया है ताकि पेयजल परियोजना का कार्य जल्द पूरा कराया जा सके।
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