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Banda News: प्रशासन का बीड़ा बेअसर, फसलें चट कर रहे अन्ना जानवर
Tue, 11 Aug 2026 11:07 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 11 Aug 2026 11:07 PM IST
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फोटो-16-अनिल दीक्षित। संवाद
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बांदा/अतर्रा। कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले गोवंशों को पूरी तरह से संरक्षित करने का जो बीड़ा प्रशासन ने उठाया था। वह पूरी तरह से बेअसर दिख रहा है।
खेतों के पास घूमते गाेवंश संरक्षण के दावे की हवा निकालने के लिए काफी है। किसान, अपनी फसल बचाने का हर भरसक प्रयास कर रहे हैं लेकिन मवेशी, उनकी मेहनत को उजाड़ देने व चट कर जाने में कोई कमी नहीं कर रहे हैं।
अतर्रा तहसील क्षेत्र के किसान अन्ना गोवंश व जंगली जानवरों से परेशान हैं। हजारों कोशिश के बाद भी पशु उनकी फसलों को नष्ट कर रहे हैं।
महूटा गांव के किसान राजाराम तिवारी, दिलीप कुमार, राजू द्विवेदी का कहना है कि अभी तक किसानों की फसलों को बारिश न होने के चलते महंगे दामों में डीजल व बीज लेने की मार झेलनी पड़ती थी। अब निराश्रित मवेशियों से हो रहे नुकसान को भी झेलना पड़ रहा है।
तहसील क्षेत्र के गांव तुर्रा निवासी किसान संतोष पांडेय ने कहा कि पशुओं और नीलगाय के काफी संख्या में झुंड घूम रहे हैं। इनके झुंड धान की फसल नष्ट कर रहे हैं। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि बार-बार प्रशासन को सूचना देने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही।
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सेमरिया कुशल गांव निवासी किसान अनिल ने बताया कि दिनभर खेत में मेहनत करने के बाद रात में भी फसल की रखवाली करनी पड़ती है। बारिश के बीच खेत में जागकर धान और अन्य फसलों को अन्ना पशुओं व नीलगायों से बचाना पड़ रहा है।
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बोले किसान-जिम्मेदार अफसर कर रहे अनदेखी
सरकारी कर्मचारियों के साथ जिम्मेदार अफसरों के अनदेखी के कारण गोवंश खेतों के साथ सड़कों पर खुले में घूम रहे हैं। मवेशी बहुत नुकसान कर रहे हैं।
-अनिल दीक्षित, सेमरिया
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खेतों में फसल बचाने के लिए चारों तरफ तार लगवाए हैं। इसके बाद भी रात में नील गाय का झुंड तार तोड़कर खेत में घुस रहा। जानवर फसल को बर्बाद कर रहे हैं।
-मुन्ना मिश्रा, फतेहगंज
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बारिश में फसलों को चट कर रहे मवेशी
फतेहगंज और बदौसा क्षेत्र के किसानों का कहना है कि किसी तरह खाद-बीज का इंतजाम कर बारिश के भरोसे खेतों में तिल, मूंग, उड़द, अरहर, ज्वार और धान की बोआई व रोपाई की जाती है। बीज अंकुरित होने और फसल थोड़ी बड़ी होते ही नीलगाय, बंदर और अन्ना मवेशियों के झुंड खेतों में पहुंच जाते हैं।
नीलगाय फसल चरने के साथ ही पौधों को उखाड़कर नष्ट कर देती हैं। इससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ती है। तरसूमा, फाटापुरवा, बघेलावारी, फतेहगंज, भवानीपुर, कोलौहा, हड़हा, भुसासी, महुई, कुलसारी, कुरुहू और बघोलन समेत कई गांवों के किसान इस समस्या से परेशान हैं। किसान रामनिहिर, शंभु यादव, रामखेलावन, बिंदा पटेल और जागेश्वर पटेल सहित अन्य ने कहा कि मवेशियों से निजात दिलाने के लिए प्रशासन ठोस कदम उठाए।
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जनपद में 273 गोशाला में 35011 मवेशी संरक्षित
बांदा। जनपद में मौजूदा समय 273 गोशाला संचालित हो रही हैं। इसमें 35011 मवेशी संरक्षित किए जा चुके हैं। प्रशासन ने ऐसी गोशालाएं, जहां 50 से कम मवेशी हैं और व्यवस्थाएं भी कम हैं। उन गोशालाओं के मवेशियों को बड़ी गोशाला में मर्ज कराया जा रहा है। प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर निर्मल गुप्ता ने बताया कि अभी भी गांव व कस्बों से निराश्रित मवेशियों को गोशाला लाकर संरक्षित करने का अभियान चल रहा है।
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वर्जन
रोजाना संरक्षित मवेशियों की मॉनिटरिंग की जा रही है। जिन क्षेत्रों में मवेशी घूमने की सूचना होती है, वहां पर किसी ने किसी कर्मचारी को भेजकर उन्हें गोशाला में संरक्षित करने के निर्देश दिए जाते हैं।
-डॉ. निर्मल कुमार गुप्ता, प्रभारी सीवीओ
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खेतों के पास घूमते गाेवंश संरक्षण के दावे की हवा निकालने के लिए काफी है। किसान, अपनी फसल बचाने का हर भरसक प्रयास कर रहे हैं लेकिन मवेशी, उनकी मेहनत को उजाड़ देने व चट कर जाने में कोई कमी नहीं कर रहे हैं।
अतर्रा तहसील क्षेत्र के किसान अन्ना गोवंश व जंगली जानवरों से परेशान हैं। हजारों कोशिश के बाद भी पशु उनकी फसलों को नष्ट कर रहे हैं।
महूटा गांव के किसान राजाराम तिवारी, दिलीप कुमार, राजू द्विवेदी का कहना है कि अभी तक किसानों की फसलों को बारिश न होने के चलते महंगे दामों में डीजल व बीज लेने की मार झेलनी पड़ती थी। अब निराश्रित मवेशियों से हो रहे नुकसान को भी झेलना पड़ रहा है।
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तहसील क्षेत्र के गांव तुर्रा निवासी किसान संतोष पांडेय ने कहा कि पशुओं और नीलगाय के काफी संख्या में झुंड घूम रहे हैं। इनके झुंड धान की फसल नष्ट कर रहे हैं। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि बार-बार प्रशासन को सूचना देने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही।
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सेमरिया कुशल गांव निवासी किसान अनिल ने बताया कि दिनभर खेत में मेहनत करने के बाद रात में भी फसल की रखवाली करनी पड़ती है। बारिश के बीच खेत में जागकर धान और अन्य फसलों को अन्ना पशुओं व नीलगायों से बचाना पड़ रहा है।
बोले किसान-जिम्मेदार अफसर कर रहे अनदेखी
सरकारी कर्मचारियों के साथ जिम्मेदार अफसरों के अनदेखी के कारण गोवंश खेतों के साथ सड़कों पर खुले में घूम रहे हैं। मवेशी बहुत नुकसान कर रहे हैं।
-अनिल दीक्षित, सेमरिया
खेतों में फसल बचाने के लिए चारों तरफ तार लगवाए हैं। इसके बाद भी रात में नील गाय का झुंड तार तोड़कर खेत में घुस रहा। जानवर फसल को बर्बाद कर रहे हैं।
-मुन्ना मिश्रा, फतेहगंज
बारिश में फसलों को चट कर रहे मवेशी
फतेहगंज और बदौसा क्षेत्र के किसानों का कहना है कि किसी तरह खाद-बीज का इंतजाम कर बारिश के भरोसे खेतों में तिल, मूंग, उड़द, अरहर, ज्वार और धान की बोआई व रोपाई की जाती है। बीज अंकुरित होने और फसल थोड़ी बड़ी होते ही नीलगाय, बंदर और अन्ना मवेशियों के झुंड खेतों में पहुंच जाते हैं।
नीलगाय फसल चरने के साथ ही पौधों को उखाड़कर नष्ट कर देती हैं। इससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ती है। तरसूमा, फाटापुरवा, बघेलावारी, फतेहगंज, भवानीपुर, कोलौहा, हड़हा, भुसासी, महुई, कुलसारी, कुरुहू और बघोलन समेत कई गांवों के किसान इस समस्या से परेशान हैं। किसान रामनिहिर, शंभु यादव, रामखेलावन, बिंदा पटेल और जागेश्वर पटेल सहित अन्य ने कहा कि मवेशियों से निजात दिलाने के लिए प्रशासन ठोस कदम उठाए।
जनपद में 273 गोशाला में 35011 मवेशी संरक्षित
बांदा। जनपद में मौजूदा समय 273 गोशाला संचालित हो रही हैं। इसमें 35011 मवेशी संरक्षित किए जा चुके हैं। प्रशासन ने ऐसी गोशालाएं, जहां 50 से कम मवेशी हैं और व्यवस्थाएं भी कम हैं। उन गोशालाओं के मवेशियों को बड़ी गोशाला में मर्ज कराया जा रहा है। प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर निर्मल गुप्ता ने बताया कि अभी भी गांव व कस्बों से निराश्रित मवेशियों को गोशाला लाकर संरक्षित करने का अभियान चल रहा है।
वर्जन
रोजाना संरक्षित मवेशियों की मॉनिटरिंग की जा रही है। जिन क्षेत्रों में मवेशी घूमने की सूचना होती है, वहां पर किसी ने किसी कर्मचारी को भेजकर उन्हें गोशाला में संरक्षित करने के निर्देश दिए जाते हैं।
-डॉ. निर्मल कुमार गुप्ता, प्रभारी सीवीओ

फोटो-16-अनिल दीक्षित। संवाद