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Banda News: आईटी एक्ट के मामले में मुख्य गवाह से अधिवक्ता ने की जिरह
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-नाबालिगों के साथ यौन शोषण में आईटी एक्ट का बहुचर्चित मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। नाबालिगों से यौन शोषण के प्रकरण में चल रहे आईटी एक्ट के मामले में विशेष न्यायालय में बृहस्पतिवार को पेशी हुई। जेल से निलंबित जेई रामभवन (फांसी की सजा पा चुके) को न्यायालय में पेश कराया गया। जबकि सहआरोपी दिल्ली के इंजीनियर मोहम्मद आकिफ के अधिवक्ता ने स्वास्थ्य सही न होने में हाजिरी माफी का प्रार्थना पत्र दिया। सीबीआई लोक अभियोजक धारा सिंह मीना की ओर से मुख्य गवाह दिल्ली के केनरा बैंक मैनेजर मनोज सिंह गौतम को पेश किया गया। यहां अधिवक्ता की ओर से आधे घंटे तक जिरह की गई। दर्ज मुकदमे के आधार पर गवाह के दिए गए बयानों को लेकर अधिवक्ता ने कई सवाल किए। जिसका मुख्य गवाह ने जवाब दिया। न्यायालय ने इस मामले की अगली तारीख 12 अगस्त निर्धारित की है। सीबीआई के लोक अभियोजक अब किसी दूसरे गवाह को भी न्यायालय में पेश कर सकते हैं। आइटी एक्ट के दर्ज मुकदमे में कुल 12 गवाहों के नाम शामिल किए गए हैं।
जेई रामभवन व सह आरोपी दिल्ली के इंजीनियर मो. आकिफ की बृहस्पतिवार को विशेष न्यायालय पाक्सो एक्ट न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा के यहां पेशी की तारीख निर्धारित थी। इसके पूर्व 13 मार्च की पिछली सुनवाई में केस की पैरवी कर रहे सीबीआई के लोक अभियोजक धारा सिंह मीना ने मुख्य स्वतंत्र गवाह को न्यायालय में पेश किया था। इसी तरह सात अप्रैल को भी मुख्य गवाह के सीबीआई के लोक अभियोजक ने शेष रह गए बयान दर्ज कराए थे। 15 अप्रैल व 18 अप्रैल को हुई पेशी में जिरह आदि नहीं हुई थी। जेई की ओर से बचाव पक्ष के अधिवक्ता भूरा निषाद ने प्रार्थना पत्र देकर जिरह करने से मना किया था। बाद में 14 मई को बचाव पक्ष के अधिवक्ता की अपील को न्यायालय ने खारिज करते हुए मुकदमा चलने का आर्डर दिया था। इसके बाद लगातार तारीखें चल रही हैं। 27 जुलाई को मुख्य गवाह व सीबीआइ के न आने से कोई जिरह बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की ओर से नहीं की गई थी। मुख्य गवाह के न होने से तारीख बृहस्पतिवार की दी गई थी। जिसमें दिल्ली के इंजीनियर मो. आकिफ नहीं पेश हुआ। जबकि मुख्य गवाह से निलंबित जेई रामभवन के अधिवक्ता ने मुकदमा दर्ज करते समय दर्शाए गए घटनाक्रम को लेकर कई सवाल किए। मुख्य गवाह के पूर्व में दिए गए बयानों को लेकर भी सवाल किए गए। जिसका मुख्य गवाह ने जवाब दिया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। नाबालिगों से यौन शोषण के प्रकरण में चल रहे आईटी एक्ट के मामले में विशेष न्यायालय में बृहस्पतिवार को पेशी हुई। जेल से निलंबित जेई रामभवन (फांसी की सजा पा चुके) को न्यायालय में पेश कराया गया। जबकि सहआरोपी दिल्ली के इंजीनियर मोहम्मद आकिफ के अधिवक्ता ने स्वास्थ्य सही न होने में हाजिरी माफी का प्रार्थना पत्र दिया। सीबीआई लोक अभियोजक धारा सिंह मीना की ओर से मुख्य गवाह दिल्ली के केनरा बैंक मैनेजर मनोज सिंह गौतम को पेश किया गया। यहां अधिवक्ता की ओर से आधे घंटे तक जिरह की गई। दर्ज मुकदमे के आधार पर गवाह के दिए गए बयानों को लेकर अधिवक्ता ने कई सवाल किए। जिसका मुख्य गवाह ने जवाब दिया। न्यायालय ने इस मामले की अगली तारीख 12 अगस्त निर्धारित की है। सीबीआई के लोक अभियोजक अब किसी दूसरे गवाह को भी न्यायालय में पेश कर सकते हैं। आइटी एक्ट के दर्ज मुकदमे में कुल 12 गवाहों के नाम शामिल किए गए हैं।
जेई रामभवन व सह आरोपी दिल्ली के इंजीनियर मो. आकिफ की बृहस्पतिवार को विशेष न्यायालय पाक्सो एक्ट न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा के यहां पेशी की तारीख निर्धारित थी। इसके पूर्व 13 मार्च की पिछली सुनवाई में केस की पैरवी कर रहे सीबीआई के लोक अभियोजक धारा सिंह मीना ने मुख्य स्वतंत्र गवाह को न्यायालय में पेश किया था। इसी तरह सात अप्रैल को भी मुख्य गवाह के सीबीआई के लोक अभियोजक ने शेष रह गए बयान दर्ज कराए थे। 15 अप्रैल व 18 अप्रैल को हुई पेशी में जिरह आदि नहीं हुई थी। जेई की ओर से बचाव पक्ष के अधिवक्ता भूरा निषाद ने प्रार्थना पत्र देकर जिरह करने से मना किया था। बाद में 14 मई को बचाव पक्ष के अधिवक्ता की अपील को न्यायालय ने खारिज करते हुए मुकदमा चलने का आर्डर दिया था। इसके बाद लगातार तारीखें चल रही हैं। 27 जुलाई को मुख्य गवाह व सीबीआइ के न आने से कोई जिरह बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की ओर से नहीं की गई थी। मुख्य गवाह के न होने से तारीख बृहस्पतिवार की दी गई थी। जिसमें दिल्ली के इंजीनियर मो. आकिफ नहीं पेश हुआ। जबकि मुख्य गवाह से निलंबित जेई रामभवन के अधिवक्ता ने मुकदमा दर्ज करते समय दर्शाए गए घटनाक्रम को लेकर कई सवाल किए। मुख्य गवाह के पूर्व में दिए गए बयानों को लेकर भी सवाल किए गए। जिसका मुख्य गवाह ने जवाब दिया है।
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