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Banda News: पड़ोहरा पुल पर आवागमन बंद, अब नाव बनी सहारा
Thu, 13 Aug 2026 12:27 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Thu, 13 Aug 2026 12:27 AM IST
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फोटो-20-ईंटे डालकर बाधित किया गया क्षतिग्रस्त रपटा पुल का रास्ता। संवाद
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पैलानी (बांदा)। नांदादेव और पड़ोहरा के बीच चंद्रावल नदी पर बने रपटा पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद आवागमन रोक दिया गया है।
प्रशासन की ओर से अब ग्रामीणों के लिए नाव का संचालन कराया जा रहा है। सुरक्षा के लिए पुल के दोनों ओर पुलिस और होमगार्ड तैनात किए गए हैं। वहीं, बांदा और हमीरपुर जाने के लिए एक बड़ी आबादी को लंबा सफर तय करना पड़ रहा है।
10 अगस्त को पुल क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिलने के बाद राजस्व और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने मौके पर निरीक्षण किया था। निरीक्षण में पुल का पिलर धंसने और पुल के ऊपर दरार पड़ने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद प्रशासन ने पुल से भारी वाहनों के साथ दोपहिया वाहनों का आवागमन भी रोक दिया।
लोगों को क्षतिग्रस्त पुल पर जाने से रोकने के लिए लोक निर्माण विभाग ने दोनों ओर ईंट की दीवार खड़ी कर दी है। प्रशासन की ओर से आसपास के गांवों में मुनादी भी कराई गई है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों को पुल से आवागमन न करने की जानकारी दी जा रही है।
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पुल पर आवागमन बंद होने के कारण गांव अमारा, कुटी डेरा, बरेहटा, रामपुर, मड़ौली समेत 30 मजरों की करीब 70 हजार की आबादी की आवाजाही पर संकट खड़ा हो गया है।
बांदा और हमीरपुर तक आने के लिए वाहनों को 20 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। हमीरपुर के लिए ग्रामीणों को पहले पैलानी जाना होगा। यहां से खप्टिहा कलां होते हुए सिसौल होते हुए सफर करना होगा। वहीं, बांदा के लिए पैलानी से खप्टिहा कलां होते हुए बांदा आना होगा। इससे खर्च के साथ-साथ समय भी अधिक लग रहा है।
वैकल्पिक रास्ते के तौर पर नाव का संचालन
पुल से आवागमन बंद होने के बाद लोगों की सुविधा के लिए प्रशासन ने नाव का संचालन शुरू कराया है। तहसील प्रशासन क्षतिग्रस्त पुल की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। अधिकारियों ने ग्रामीणों और राहगीरों से अपील की है कि जान जोखिम में डालकर क्षतिग्रस्त पुल से आवागमन न करें। सुरक्षित आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग और नाव की सुविधा का उपयोग करें।
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प्रशासन की ओर से अब ग्रामीणों के लिए नाव का संचालन कराया जा रहा है। सुरक्षा के लिए पुल के दोनों ओर पुलिस और होमगार्ड तैनात किए गए हैं। वहीं, बांदा और हमीरपुर जाने के लिए एक बड़ी आबादी को लंबा सफर तय करना पड़ रहा है।
10 अगस्त को पुल क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिलने के बाद राजस्व और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने मौके पर निरीक्षण किया था। निरीक्षण में पुल का पिलर धंसने और पुल के ऊपर दरार पड़ने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद प्रशासन ने पुल से भारी वाहनों के साथ दोपहिया वाहनों का आवागमन भी रोक दिया।
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लोगों को क्षतिग्रस्त पुल पर जाने से रोकने के लिए लोक निर्माण विभाग ने दोनों ओर ईंट की दीवार खड़ी कर दी है। प्रशासन की ओर से आसपास के गांवों में मुनादी भी कराई गई है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों को पुल से आवागमन न करने की जानकारी दी जा रही है।
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पुल पर आवागमन बंद होने के कारण गांव अमारा, कुटी डेरा, बरेहटा, रामपुर, मड़ौली समेत 30 मजरों की करीब 70 हजार की आबादी की आवाजाही पर संकट खड़ा हो गया है।
बांदा और हमीरपुर तक आने के लिए वाहनों को 20 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। हमीरपुर के लिए ग्रामीणों को पहले पैलानी जाना होगा। यहां से खप्टिहा कलां होते हुए सिसौल होते हुए सफर करना होगा। वहीं, बांदा के लिए पैलानी से खप्टिहा कलां होते हुए बांदा आना होगा। इससे खर्च के साथ-साथ समय भी अधिक लग रहा है।
वैकल्पिक रास्ते के तौर पर नाव का संचालन
पुल से आवागमन बंद होने के बाद लोगों की सुविधा के लिए प्रशासन ने नाव का संचालन शुरू कराया है। तहसील प्रशासन क्षतिग्रस्त पुल की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। अधिकारियों ने ग्रामीणों और राहगीरों से अपील की है कि जान जोखिम में डालकर क्षतिग्रस्त पुल से आवागमन न करें। सुरक्षित आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग और नाव की सुविधा का उपयोग करें।