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Banda News: दुनिया के प्रमुख वैज्ञानिकों में शामिल हुए अरुण, वैश्विक मंच पर लहराया परचम

Tue, 30 Jun 2026 12:14 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Tue, 30 Jun 2026 12:14 AM IST
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Arun joins the world's leading scientists, hoists flag on global stage
प्रोफेसर अरुण कुमार। स्रोत - परिजन - फोटो : 1
बदौसा। बुंदेलखंड की मिट्टी ने एक बार फिर दुनिया को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया है। जनपद बांदा के मूल निवासी प्रो. अरुण कुमार ने वह उपलब्धि हासिल की है, जिस पर पूरा देश गर्व कर रहा है। कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च के क्षेत्र में उन्हें प्रतिष्ठित एससीआई ग्लोबल की ताजा रैंकिंग में दुनिया के शीर्ष पांच प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल किया गया है। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष और प्रतिभा की पहचान है बल्कि बुंदेलखंड की शिक्षा, संस्कार और क्षमता का भी वैश्विक प्रमाण है।
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प्रो. अरुण कुमार की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा चित्रकूट से प्राप्त की। इसके बाद आईईआरटी, प्रयागराज से बीटेक और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) राउरकेला से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में एमटेक किया।
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उच्च शिक्षा की ललक ने उन्हें प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (एनटीयू), सिंगापुर तक पहुंचाया, जहां उन्हें पीएचडी के लिए स्कॉलरशिप मिली। पीएचडी के बाद उन्होंने एनटीयू में रिसर्च एसोसिएट, ताइवान की विश्वप्रसिद्ध एकेडेमिया सिनिका में पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च फेलो तथा नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (एनयूएस) में वरिष्ठ शोधकर्ता के रूप में महत्वपूर्ण शोध कार्य किए।
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दुनिया की चकाचौंध छोड़ मातृभूमि की सेवा चुनी



जब विश्व के प्रतिष्ठित संस्थान उनकी प्रतिभा का लाभ उठा रहे थे, तब प्रो. अरुण कुमार ने वर्ष 2018 में भारत लौटने का निर्णय लिया। उन्होंने एनआईटी राउरकेला में प्रोफेसर के रूप में कार्यभार संभाला और आज वे देश के युवाओं को अत्याधुनिक तकनीकों की शिक्षा देने के साथ-साथ विश्वस्तरीय शोध का नेतृत्व कर रहे हैं। उनकी कई शोध उपलब्धियां अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं और उनका कार्य वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में व्यापक रूप से उद्धृत किया जाता है।



पिता का सपना हुआ साकार, परिवार में जश्न का माहौल



प्रो. अरुण कुमार की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से उनके परिवार में खुशी की लहर है। उनके दिवंगत पिता दिवंगत बाबू लाल सिंह कुशवाहा ने जिस सपने को अपने बेटे की आंखों में देखा था, उसे उन्होंने साकार कर दिखाया है। उनकी बड़ी बहन एवं वरिष्ठ समाजसेविका उमा कुशवाहा ने कहा कि यह पूरे परिवार, बुंदेलखंड और कुशवाहा समाज के लिए गर्व का क्षण है। कहा कि भाई ने अपनी मेहनत, ईमानदारी और लगन से यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती।




बुंदेलखंड के युवाओं के लिए नई उम्मीद



प्रो. अरुण कुमार की उपलब्धि केवल एक वैज्ञानिक की सफलता नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड की क्षमता का परिचय है। उन्होंने सिद्ध किया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदार हो और आत्मविश्वास अटूट हो, तो गांव की गलियों से निकलकर भी विश्व के सर्वोच्च मंच तक पहुंचा जा सकता है। आज उनका नाम केवल बांदा या चित्रकूट की पहचान नहीं बल्कि भारत की वैज्ञानिक शक्ति का गौरव बन चुका है।
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