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Banda News: यूपी-सीएटीईटी में बांदा के सत्यम प्रदेश में तीसरे स्थान पर
Tue, 30 Jun 2026 12:14 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 30 Jun 2026 12:14 AM IST
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सत्यम बाबू। स्रोत: स्वयं
- फोटो : 1
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बांदा। मेहनत, अनुशासन और मजबूत इरादों के दम पर बांदा के एक किसान के बेटे ने वह मुकाम हासिल किया है, जो पूरे जिले के लिए गर्व का विषय बन गया है। कालिंजर क्षेत्र की ग्राम पंचायत पुरैनिया निवासी सत्यम बाबू ने यूपी-सीएटीईटी प्रवेश परीक्षा की अंडरग्रेजुएट एग्रीकल्चर श्रेणी में प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, गांव और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
सत्यम साधारण किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता राजा बाबू खेती-किसानी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि माता रन्नू देवी गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद माता-पिता ने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। सत्यम ने भी अपने परिवार के विश्वास और उम्मीदों को टूटने नहीं दिया और कठिन परिश्रम के बल पर प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया कि सफलता के लिए सुविधाओं से अधिक जरूरी दृढ़ संकल्प और निरंतर मेहनत होती है।
सत्यम की प्रारंभिक शिक्षा आठवीं कक्षा तक गांव के विद्यालय में ही हुई। इसके बाद उन्होंने अतर्रा स्थित हिंदू इंटर कॉलेज में प्रवेश लिया। उन्होंने हाईस्कूल में 80 प्रतिशत तथा इंटरमीडिएट में 78 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। पढ़ाई के दौरान उनका पूरा ध्यान अपने लक्ष्य पर रहा। उन्होंने नियमित अध्ययन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया और सोशल मीडिया व मोबाइल स्क्रीन से काफी हद तक दूरी बनाए रखी।
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सत्यम बताते हैं कि उन्होंने किसी शॉर्टकट पर भरोसा नहीं किया। रोजाना निर्धारित समय तक पढ़ाई की, पुराने प्रश्नपत्रों का अभ्यास किया और विषयों की मूल अवधारणाओं को समझने पर विशेष ध्यान दिया। उनका मानना है कि यदि विद्यार्थी ईमानदारी से नियमित पढ़ाई करें और समय का सही उपयोग करें तो सफलता अवश्य मिलती है।
अपनी सफलता का श्रेय सत्यम ने अपने माता-पिता, परिवार और शिक्षकों को दिया है। सत्यम का सपना पीसीएस अधिकारी बनकर समाज और प्रदेश की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि वह आगे भी पूरी मेहनत और लगन के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखेंगे ताकि अपने लक्ष्य को हासिल कर सकें।
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सत्यम साधारण किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता राजा बाबू खेती-किसानी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि माता रन्नू देवी गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद माता-पिता ने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। सत्यम ने भी अपने परिवार के विश्वास और उम्मीदों को टूटने नहीं दिया और कठिन परिश्रम के बल पर प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया कि सफलता के लिए सुविधाओं से अधिक जरूरी दृढ़ संकल्प और निरंतर मेहनत होती है।
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सत्यम की प्रारंभिक शिक्षा आठवीं कक्षा तक गांव के विद्यालय में ही हुई। इसके बाद उन्होंने अतर्रा स्थित हिंदू इंटर कॉलेज में प्रवेश लिया। उन्होंने हाईस्कूल में 80 प्रतिशत तथा इंटरमीडिएट में 78 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। पढ़ाई के दौरान उनका पूरा ध्यान अपने लक्ष्य पर रहा। उन्होंने नियमित अध्ययन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया और सोशल मीडिया व मोबाइल स्क्रीन से काफी हद तक दूरी बनाए रखी।
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सत्यम बताते हैं कि उन्होंने किसी शॉर्टकट पर भरोसा नहीं किया। रोजाना निर्धारित समय तक पढ़ाई की, पुराने प्रश्नपत्रों का अभ्यास किया और विषयों की मूल अवधारणाओं को समझने पर विशेष ध्यान दिया। उनका मानना है कि यदि विद्यार्थी ईमानदारी से नियमित पढ़ाई करें और समय का सही उपयोग करें तो सफलता अवश्य मिलती है।
अपनी सफलता का श्रेय सत्यम ने अपने माता-पिता, परिवार और शिक्षकों को दिया है। सत्यम का सपना पीसीएस अधिकारी बनकर समाज और प्रदेश की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि वह आगे भी पूरी मेहनत और लगन के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखेंगे ताकि अपने लक्ष्य को हासिल कर सकें।