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Banda News: गांवों की राह भूलीं सीएम ग्राम परिवहन योजना की बसें
Tue, 21 Jul 2026 11:41 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 21 Jul 2026 11:41 PM IST
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बांदा। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना से जुड़ी बसों के चालक, गांवों का रास्ता भूल गए हैं। अपना राजस्व बढ़ाने के लिए वह गांव न जाकर सीधे ब्लॉक व तहसील से ही यात्रियों को मुख्यालय ला रहे हैं। गड़बड़ी की सूचना मिलते ही एआरएम ने जांच के निर्देश दिए हैं।
ग्राम पंचायत से ब्लॉक व तहसील मुख्यालय तक आने वाले यात्रियों के लिए मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना का संचालन शुरू किया गया था। योजना का उद्देश्य था कि गांव-गांव से रोजाना आने वाले यात्रियों को सुगम बस सेवा दी जाए। बांदा में परिवहन निगम ने छह बसों को इस योजना के लिए चयनित किया था। जो वर्तमान में संचालित भी हैं।
एआरएम डीके चौबे ने बताया कि ग्राम परिवहन योजना से जुड़े बस चालक, ग्राम पंचायत स्तर से यात्रियों को न लाकर, सीधे ब्लॉक या तहसील से मुख्यालय आ रहे हैं। इससे ग्राम पंचायत से रोजाना मिलने वाले यात्रियों को पहले की तरह दूसरे वाहनों से ब्लॉक व तहसील तक आना पड़ रहा है।
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जबकि बसों को ग्राम पंचायत के रूट पर चलना चाहिए। कहा कि कई जगहों से यह शिकायत मिली हैं, जिसकी जांच के लिए टीम को निर्देशित किया गया है। बसों की जांच रूट पर जाकर की जाएगी। जिससे शिकायत सही है या नहीं, इसका सत्यापन हो सके।
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रोडवेज के राजस्व को भी पहुंचा रहे नुकसान
बांदा। ग्राम परिवहन योजना से जुड़ी बसों का ब्लॉक व तहसील मुख्यालय से बांदा तक सफर करना, रोडवेज बसों के राजस्व पर भी संकट खड़ा कर सकता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि सभी ब्लॉक व तहसील मुख्यालय तक रोडवेज बसों का आवागमन करीब-करीब बना हुआ है। अब इसी रूट पर इन बसों की इंट्री राजस्व को नुकसान पहुंचा सकती है। रोडवेज बसों से प्राप्त होने वाला राजस्व सरकार के खजाने में जाता है। जबकि ग्राम परिवहन योजना में यात्रियों से लिया जाने वाला किराया बस मालिक के पास जाता है। इन बसों पर परिवहन निगम का नियंत्रण नहीं है।
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ग्राम पंचायत से ब्लॉक व तहसील मुख्यालय तक आने वाले यात्रियों के लिए मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना का संचालन शुरू किया गया था। योजना का उद्देश्य था कि गांव-गांव से रोजाना आने वाले यात्रियों को सुगम बस सेवा दी जाए। बांदा में परिवहन निगम ने छह बसों को इस योजना के लिए चयनित किया था। जो वर्तमान में संचालित भी हैं।
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एआरएम डीके चौबे ने बताया कि ग्राम परिवहन योजना से जुड़े बस चालक, ग्राम पंचायत स्तर से यात्रियों को न लाकर, सीधे ब्लॉक या तहसील से मुख्यालय आ रहे हैं। इससे ग्राम पंचायत से रोजाना मिलने वाले यात्रियों को पहले की तरह दूसरे वाहनों से ब्लॉक व तहसील तक आना पड़ रहा है।
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जबकि बसों को ग्राम पंचायत के रूट पर चलना चाहिए। कहा कि कई जगहों से यह शिकायत मिली हैं, जिसकी जांच के लिए टीम को निर्देशित किया गया है। बसों की जांच रूट पर जाकर की जाएगी। जिससे शिकायत सही है या नहीं, इसका सत्यापन हो सके।
रोडवेज के राजस्व को भी पहुंचा रहे नुकसान
बांदा। ग्राम परिवहन योजना से जुड़ी बसों का ब्लॉक व तहसील मुख्यालय से बांदा तक सफर करना, रोडवेज बसों के राजस्व पर भी संकट खड़ा कर सकता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि सभी ब्लॉक व तहसील मुख्यालय तक रोडवेज बसों का आवागमन करीब-करीब बना हुआ है। अब इसी रूट पर इन बसों की इंट्री राजस्व को नुकसान पहुंचा सकती है। रोडवेज बसों से प्राप्त होने वाला राजस्व सरकार के खजाने में जाता है। जबकि ग्राम परिवहन योजना में यात्रियों से लिया जाने वाला किराया बस मालिक के पास जाता है। इन बसों पर परिवहन निगम का नियंत्रण नहीं है।