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Banda News: युवक की हत्या के मामले में दोषी को आजीवन कारावास
Thu, 02 Jul 2026 11:48 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Thu, 02 Jul 2026 11:48 PM IST
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बांदा। पीड़ितों की मदद करने वाले युवक की 20 साल आठ माह पहले हत्या के मामले में दोषी को विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी डॉ. विकास श्रीवास्तव की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 21 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की अदायगी न करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। मुकदमे में एक आरोपी उदयवीर की मृत्यु हो चुकी और दो आरोपियों की गलत नामजदगी व गलत आरोप पत्र प्रस्तुत करने पर व साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
गिरवां थानाक्षेत्र के तिंदुही गांव निवासी बाबूलाल ने 26 अक्तूबर 2005 को तहरीर देकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि उसके बच्चे अशोक व नरेश हैं। दोनों बच्चे गरीबों व पीड़ितों की सहायता करते थे। उसी के गांव का राम सुरेश लगभग 7-8 माह से गांव की जनता के साथ मारपीट व गुंडागर्दी करता था। जबकि अशोक व नरेश पीड़ितों की मदद करते थे। ऐसे में राम सुरेश बाबूलाल के परिवार से रंजिश मानने लगा था।
26 अक्तूबर 2005 को जब नरेश खेत से दोपहर बाद लगभग 3:30 बजे अपने घर आ रहा था, तभी राम सुरेश, बच्चा यादव व अरविंद यादव और एक अन्य साथी के साथ तमंचा व लाठियों से बुकुआ प्रजापति के दरवाजे के पास उसे घेरकर जाति सूचक शब्दों से गाली गलौज करने लगे तो नरेश ने गुहार लगाई तो पिता बाबूलाल पहुंचे थे। कुछ देर विवाद के बाद पिता और पुत्र भागे तो बांस की कोठी के पास लकड़ी में उलझकर गिर गए थे। तभी राम सुरेश हाथ में तमंचा लिए और तीनों अन्य साथी लाठियों से पीटने लगे थे। आसपास के लोग इकट्ठा हुए तो आरोपी लोग भाग निकले थे।
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वहीं, घायल नरेश को इलाज के लिए कानपुर ले जाया गया था। वहां इलाज के दौरान 29 अक्तूबर 2005 को नरेश की मौत हो गई थी। तत्कालीन विवेचक क्षेत्राधिकारी नरैनी तेजपाल ने विवेचना करके एफआईआर से हटकर उदयवीर व शिवकुमार यादव निवासी अनथुआं व कमलेश यादव निवासी खरौच के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया था। दोनों को दोषमुक्त किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से नौ गवाह पेश किए गए। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों व वादी मुकदमा के बयान के आधार पर न्यायाधीश ने अपने 39 पृष्ठीय फैसले में केवल राम सुरेश को दोषी पाकर सजा व जुर्माने से दंडित किया।
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गिरवां थानाक्षेत्र के तिंदुही गांव निवासी बाबूलाल ने 26 अक्तूबर 2005 को तहरीर देकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि उसके बच्चे अशोक व नरेश हैं। दोनों बच्चे गरीबों व पीड़ितों की सहायता करते थे। उसी के गांव का राम सुरेश लगभग 7-8 माह से गांव की जनता के साथ मारपीट व गुंडागर्दी करता था। जबकि अशोक व नरेश पीड़ितों की मदद करते थे। ऐसे में राम सुरेश बाबूलाल के परिवार से रंजिश मानने लगा था।
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26 अक्तूबर 2005 को जब नरेश खेत से दोपहर बाद लगभग 3:30 बजे अपने घर आ रहा था, तभी राम सुरेश, बच्चा यादव व अरविंद यादव और एक अन्य साथी के साथ तमंचा व लाठियों से बुकुआ प्रजापति के दरवाजे के पास उसे घेरकर जाति सूचक शब्दों से गाली गलौज करने लगे तो नरेश ने गुहार लगाई तो पिता बाबूलाल पहुंचे थे। कुछ देर विवाद के बाद पिता और पुत्र भागे तो बांस की कोठी के पास लकड़ी में उलझकर गिर गए थे। तभी राम सुरेश हाथ में तमंचा लिए और तीनों अन्य साथी लाठियों से पीटने लगे थे। आसपास के लोग इकट्ठा हुए तो आरोपी लोग भाग निकले थे।
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वहीं, घायल नरेश को इलाज के लिए कानपुर ले जाया गया था। वहां इलाज के दौरान 29 अक्तूबर 2005 को नरेश की मौत हो गई थी। तत्कालीन विवेचक क्षेत्राधिकारी नरैनी तेजपाल ने विवेचना करके एफआईआर से हटकर उदयवीर व शिवकुमार यादव निवासी अनथुआं व कमलेश यादव निवासी खरौच के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया था। दोनों को दोषमुक्त किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से नौ गवाह पेश किए गए। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों व वादी मुकदमा के बयान के आधार पर न्यायाधीश ने अपने 39 पृष्ठीय फैसले में केवल राम सुरेश को दोषी पाकर सजा व जुर्माने से दंडित किया।