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Banda News: रात में धधक रहे फसल अवशेष, दिनभर तप रहे लोग
Sat, 23 May 2026 11:52 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 23 May 2026 11:52 PM IST
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फोटो - 14 शहर से 10 किलोमीटर दूर जलने के बाद खेत में बिछी राख। संवाद
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बांदा। भीषण गर्मी के मौसम में फसल अवशेष जलाने से परेशानी बढ़ती जा रही है। अत्यधिक तापमान के कारण आग तेजी से फैलती है, जिससे अनियंत्रित आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। इससे न केवल भूमि को नुकसान होता है बल्कि तापमान में अधिक बढ़ोतरी होती है। वहीं, गर्मी के कारण हवा की गुणवत्ता पहले से ही खराब होती है और अवशेष जलाने से निकलने वाला धुआं इस समस्या को और बढ़ा देता है, जिससे सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसे लेकर शनिवार को शहर के मवई बाईपास से 10 किमी चिल्ला मार्ग तक की पड़ताल की गई। जिसमें 19 खेतों में आग लगने के बाद खेत राख में तब्दील दिखा।
12:10 मिनट पर मवई बाईपास से बाइक लेकर चले। अभी महज तीन किमी ही चले थे कि बाएं तरफ खेत में धुआं निकल रहा था। जानकारी करने पर पता चला कि इस खेत में उगे फसल अवशेषों को शुक्रवार देर रात ही आग लगाई गई होगी। इसके बाद यह सुबह तक सुलगने के बाद दोपहर तक धुआं देता रहा। पूरे 10 किमी तक बाइक से पड़ताल में हाईवे के दोनों ओर 19 स्थानों पर फसल अवशेष जले मिले। जबकि शासन को सख्त आदेश के बावजूद किसान मनमानी कर रहे हैं। जहां बांदा का तापमान पहले ही देश में सर्वाधिक है, वहीं फसल अवशेष जलाए जाने के बाद इसमें और बढ़ोतरी होना तय है।
होने वाले नुकसान
फसल अवशेष जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी खतरनाक गैसें निकलती हैं। इसके धुएं से हवा की गुणवत्ता बहुत खराब हो जाती है, जिससे लोगों और पशुओं में दमा, फेफड़ों और आंखों में जलन जैसी गंभीर बीमारियां होती हैं। इसके अलावा सबसे अधिक नुकसान आग के धुएं और गर्मी से वातावरण का तापमान बढ़ता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अवशेषों को जलाने के बजाय रोटावेटर या मल्चर की मदद से मिट्टी में मिला देना चाहिए। यह खेत में सड़कर प्राकृतिक खाद का काम करते हैं और भूमि की उत्पादकता बढ़ाते हैं।
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हेलमेट लगाए पैदल निकला युवक
दोपहर 2:25 बजे बाबूलाल चौराहे की ओर जाने वाला पुल से एक युवक पैदल जाता दिखाई दिया। वह हाथ में बैग लिए था लेकिन धूप से बचने के लिए हेलमेट भी लगाए था। जानकारी करने पर झल्ला कर जवाब दिया कि इतनी गर्मी है कि कुछ समझ नहीं आ रहा। टोपी लाना भूल गया और बाइक उठाने जा रहा हूं। धूप इतनी तेज लगी कि इसे लगाना उचित समझा। हालांकि हर आता-जाता राहगीर उसे देखता हुए जा रहा था।
अधिकतम पारा 47 डिग्री, 16 किमी की रफ्तार से चली लू
बांदा। बांदा का शनिवार को अधिकतम तापमान 47 व न्यूनतम 28 डिग्री दर्ज किया गया। 16 किमी की रफ्तार से लू चलती रही। दोपहर 12 बजे से तीन बजे तक प्रमुख मार्गों, चौराहों में सन्नाटा छाया रहा। सुबह नौ बजे से ही गरम हवा के थपेड़े लोगों को बेहाल करते रहे। सुबह 11 बजे से तापमान ने रफ्तार पकड़ी, दोपहर दो बजे तक यह 46 डिग्री तक पहुंच गया। दोपहर दो बजे के बाद पारा 47 डिग्री पर तमतमाया। हवा में नमी का प्रतिशत घटकर 16 पर रहा।
(संवाद)
पांच साल में तापमान के आंकड़ों पर एक नजर
वर्ष अधिकतम न्यूनतम
2025- 45 29
2024- 46 30
2023-43 26
2022- 45 32
2021- 34 26
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12:10 मिनट पर मवई बाईपास से बाइक लेकर चले। अभी महज तीन किमी ही चले थे कि बाएं तरफ खेत में धुआं निकल रहा था। जानकारी करने पर पता चला कि इस खेत में उगे फसल अवशेषों को शुक्रवार देर रात ही आग लगाई गई होगी। इसके बाद यह सुबह तक सुलगने के बाद दोपहर तक धुआं देता रहा। पूरे 10 किमी तक बाइक से पड़ताल में हाईवे के दोनों ओर 19 स्थानों पर फसल अवशेष जले मिले। जबकि शासन को सख्त आदेश के बावजूद किसान मनमानी कर रहे हैं। जहां बांदा का तापमान पहले ही देश में सर्वाधिक है, वहीं फसल अवशेष जलाए जाने के बाद इसमें और बढ़ोतरी होना तय है।
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होने वाले नुकसान
फसल अवशेष जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी खतरनाक गैसें निकलती हैं। इसके धुएं से हवा की गुणवत्ता बहुत खराब हो जाती है, जिससे लोगों और पशुओं में दमा, फेफड़ों और आंखों में जलन जैसी गंभीर बीमारियां होती हैं। इसके अलावा सबसे अधिक नुकसान आग के धुएं और गर्मी से वातावरण का तापमान बढ़ता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अवशेषों को जलाने के बजाय रोटावेटर या मल्चर की मदद से मिट्टी में मिला देना चाहिए। यह खेत में सड़कर प्राकृतिक खाद का काम करते हैं और भूमि की उत्पादकता बढ़ाते हैं।
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हेलमेट लगाए पैदल निकला युवक
दोपहर 2:25 बजे बाबूलाल चौराहे की ओर जाने वाला पुल से एक युवक पैदल जाता दिखाई दिया। वह हाथ में बैग लिए था लेकिन धूप से बचने के लिए हेलमेट भी लगाए था। जानकारी करने पर झल्ला कर जवाब दिया कि इतनी गर्मी है कि कुछ समझ नहीं आ रहा। टोपी लाना भूल गया और बाइक उठाने जा रहा हूं। धूप इतनी तेज लगी कि इसे लगाना उचित समझा। हालांकि हर आता-जाता राहगीर उसे देखता हुए जा रहा था।
अधिकतम पारा 47 डिग्री, 16 किमी की रफ्तार से चली लू
बांदा। बांदा का शनिवार को अधिकतम तापमान 47 व न्यूनतम 28 डिग्री दर्ज किया गया। 16 किमी की रफ्तार से लू चलती रही। दोपहर 12 बजे से तीन बजे तक प्रमुख मार्गों, चौराहों में सन्नाटा छाया रहा। सुबह नौ बजे से ही गरम हवा के थपेड़े लोगों को बेहाल करते रहे। सुबह 11 बजे से तापमान ने रफ्तार पकड़ी, दोपहर दो बजे तक यह 46 डिग्री तक पहुंच गया। दोपहर दो बजे के बाद पारा 47 डिग्री पर तमतमाया। हवा में नमी का प्रतिशत घटकर 16 पर रहा।
(संवाद)
पांच साल में तापमान के आंकड़ों पर एक नजर
वर्ष अधिकतम न्यूनतम
2025- 45 29
2024- 46 30
2023-43 26
2022- 45 32
2021- 34 26

फोटो - 14 शहर से 10 किलोमीटर दूर जलने के बाद खेत में बिछी राख। संवाद

फोटो - 14 शहर से 10 किलोमीटर दूर जलने के बाद खेत में बिछी राख। संवाद