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Banda News: ट्रैकिंग और तकनीक के माध्यम से शावकों की जा रही निगरानी
Sat, 04 Jul 2026 11:24 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 04 Jul 2026 11:24 PM IST
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करतल (बांदा)। सीमावर्ती मध्य प्रदेश के पन्ना जिला के टाइगर रिजर्व में बाघिन द्वारा जन्मे दो शावकों की देखभाल एवं मॉनिटरिंग की जा रही है।
रिजर्व टाइगर के डिप्टी डायरेक्टर वीरेंद्र पटेल ने बताया कि सुरक्षा वन विभाग की ओर से विशेष ट्रैकिंग और तकनीक के माध्यम से शावकों की निगरानी की जा रही है। शावकों के जन्म के बाद वन विभाग और विशेषज्ञों द्वारा फॉलोअप करते हुए कैमरा ट्रैप और जीपीएस जंगलों में फोटो ट्रैक कैमरे लगाए जाते हैं, जिसे शावकों और उनकी मां की गतिविधियों को ट्रैक किया जाता है। बाघिन की कॉलर आईडी से भी उनके मूवमेंट को मॉनिटर किया जाता है।
डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि सफारी गाइड और पेट्रोलिंग वन कर्मचारी और सरकारी गाइड समय-समय पर शावकों की संख्या और उनके स्वास्थ्य पर नजर रखते हैं। बताया कि सुरक्षा के बड़े इंतजाम शुरुआती महीने में दिए जाते हैं। शावकों को खतरा जैसे अन्य नर बाघ या शिकारी से होता है, इसलिए विभाग क्षेत्र में गश्त को बढ़ा दिया जाता है।
रेस्क्यू के लिए टीम को हाई अलर्ट रखा जाता है। अगर कोई शावक अनाथ हो जाता है तो उसे विशेष बाड़े में रखकर बड़ा किया जाता है और फिर प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाता है।
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रिजर्व टाइगर के डिप्टी डायरेक्टर वीरेंद्र पटेल ने बताया कि सुरक्षा वन विभाग की ओर से विशेष ट्रैकिंग और तकनीक के माध्यम से शावकों की निगरानी की जा रही है। शावकों के जन्म के बाद वन विभाग और विशेषज्ञों द्वारा फॉलोअप करते हुए कैमरा ट्रैप और जीपीएस जंगलों में फोटो ट्रैक कैमरे लगाए जाते हैं, जिसे शावकों और उनकी मां की गतिविधियों को ट्रैक किया जाता है। बाघिन की कॉलर आईडी से भी उनके मूवमेंट को मॉनिटर किया जाता है।
डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि सफारी गाइड और पेट्रोलिंग वन कर्मचारी और सरकारी गाइड समय-समय पर शावकों की संख्या और उनके स्वास्थ्य पर नजर रखते हैं। बताया कि सुरक्षा के बड़े इंतजाम शुरुआती महीने में दिए जाते हैं। शावकों को खतरा जैसे अन्य नर बाघ या शिकारी से होता है, इसलिए विभाग क्षेत्र में गश्त को बढ़ा दिया जाता है।
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रेस्क्यू के लिए टीम को हाई अलर्ट रखा जाता है। अगर कोई शावक अनाथ हो जाता है तो उसे विशेष बाड़े में रखकर बड़ा किया जाता है और फिर प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाता है।
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