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Banda News: घरों में आ रहा गंदा पानी, दस्तावेजों में बिल्कुल शुद्ध
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फोटो- 15 भूरागढ़ स्थित मंडलीय प्रयोगशाला में पानी की जांच करता कर्मचारी। संवाद
- प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट और जन शिकायतों में बड़ा अंतर
- 250 नमूनों से सिर्फ दो ही हुए फेल, दावा राज्य स्तरीय जांच में भी साफ
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर जल संस्थान और आम जनता के बीच एक बार फिर मतभेद सामने आया है। जहां जल संस्थान की मंडलीय प्रयोगशाला पानी की गुणवत्ता को लेकर आश्वस्त दिख रही है, वहीं शहरवासी नलों से आ रहे दूषित पानी की शिकायत लगातार कर रहे हैं।
जल संस्थान के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष मार्च से अब तक मंडलीय प्रयोगशाला में पानी के लगभग 250 नमूनों की जांच की गई है। इनमें से केवल दो नमूने ही निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके अतिरिक्त, 56 नमूनों को राज्य स्तरीय बॉयो लॉजिकल प्रयोगशाला, लखनऊ भेजा गया। जहां सभी की गुणवत्ता सही पाई गई।
जल संस्थान के अधिशासी अभियंता शिवराज ने बताया कि जांच में फेल हुए मामलों में कनेक्शन धारकों के नल में लीकेज पाया गया। जिसके कारण दूषित पानी घरों तक पहुंच रहा था। संस्थान के दावों के अनुसार, शहर के लगभग हर मोहल्ले में शुद्ध पानी की आपूर्ति हो रही है। जिसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, आयरन और जिंक जैसे सभी पोषण तत्व मानक के अनुरूप पाए गए हैं।
केस-1
सालों से साफ नहीं हुई पानी की टंकियां
बुंदेलखंड राज्य संघर्ष समिति के संयोजक रमेशचंद्र दुबे का कहना है कि शहर में स्थित पानी की टंकियों की सालों से सफाई नहीं कराई गई। जिससे अक्सर नलों से गंदा पानी निकलता है। हालांकि कुछ देर बाद साफ आने लगता है।
केस-2
ब्लीचिंग पाउडर का नहीं होता प्रयोग
बुंदेलखंड इंसाफ सेना के अध्यक्ष एएस नोमानी का कहना है कि फिल्टर हाउस में काई जमी हुई है। पानी को साफ करने के लिए पर्याप्त मात्रा में फिटकरी व ब्लीचिंग पाउडर नहीं डाला जाता है। जिससे नलों में दूषित पानी आ रहा है।
केस-3
नालियों से होकर गुजरी है पाइप लाइनें
समाजसेवी शिवशरण का कहना है कि शहर में कई जगह पानी लाइनें नालियों से होकर गुजरी हैं। लीकेज होने पर गंदा पानी पाइप लाइन के जरिए लोगों के घरों मेंं पहुंच जाता है। 50 साल पहले डाली गई लोहे की पाइप लाइनें जर्जर हो गई हैं।
जल संस्थान के दावों पर जन असंतोष
शहर की आबादी दो लाख से अधिक है और 33 वार्डों व तीन दर्जन नई व पुरानी बस्तियों में शुद्ध पानी पहुंचाना जल संस्थान की जिम्मेदारी है लेकिन लगातार आ रही शिकायतों से यह स्पष्ट है कि विभाग उपभोक्ताओं को संतोषजनक ढंग से पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध कराने में विफल साबित हो रहा है।
वर्जन-
मार्च से अब तक 250 नमूनों की जांच कराई गई। जिसमें दो नमूने फेल पाए गए। विभाग हकीकत पर पहुंचा तो कनेक्शन धारक का नल लीकेज था। जिससे गंदा पानी आ रहा था। पानी की टंकी पहले एक साल में साफ होती है लेकिन अब छह माह में साफ कराई जाएगी। जल्द टंकियों को साफ कराने के लिए अभियान चलाया जाएगा।-- शिवराज, अधिशासी अभियंता जल संस्थान, बांदा
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संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर जल संस्थान और आम जनता के बीच एक बार फिर मतभेद सामने आया है। जहां जल संस्थान की मंडलीय प्रयोगशाला पानी की गुणवत्ता को लेकर आश्वस्त दिख रही है, वहीं शहरवासी नलों से आ रहे दूषित पानी की शिकायत लगातार कर रहे हैं।
जल संस्थान के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष मार्च से अब तक मंडलीय प्रयोगशाला में पानी के लगभग 250 नमूनों की जांच की गई है। इनमें से केवल दो नमूने ही निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके अतिरिक्त, 56 नमूनों को राज्य स्तरीय बॉयो लॉजिकल प्रयोगशाला, लखनऊ भेजा गया। जहां सभी की गुणवत्ता सही पाई गई।
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जल संस्थान के अधिशासी अभियंता शिवराज ने बताया कि जांच में फेल हुए मामलों में कनेक्शन धारकों के नल में लीकेज पाया गया। जिसके कारण दूषित पानी घरों तक पहुंच रहा था। संस्थान के दावों के अनुसार, शहर के लगभग हर मोहल्ले में शुद्ध पानी की आपूर्ति हो रही है। जिसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, आयरन और जिंक जैसे सभी पोषण तत्व मानक के अनुरूप पाए गए हैं।
केस-1
सालों से साफ नहीं हुई पानी की टंकियां
बुंदेलखंड राज्य संघर्ष समिति के संयोजक रमेशचंद्र दुबे का कहना है कि शहर में स्थित पानी की टंकियों की सालों से सफाई नहीं कराई गई। जिससे अक्सर नलों से गंदा पानी निकलता है। हालांकि कुछ देर बाद साफ आने लगता है।
केस-2
ब्लीचिंग पाउडर का नहीं होता प्रयोग
बुंदेलखंड इंसाफ सेना के अध्यक्ष एएस नोमानी का कहना है कि फिल्टर हाउस में काई जमी हुई है। पानी को साफ करने के लिए पर्याप्त मात्रा में फिटकरी व ब्लीचिंग पाउडर नहीं डाला जाता है। जिससे नलों में दूषित पानी आ रहा है।
केस-3
नालियों से होकर गुजरी है पाइप लाइनें
समाजसेवी शिवशरण का कहना है कि शहर में कई जगह पानी लाइनें नालियों से होकर गुजरी हैं। लीकेज होने पर गंदा पानी पाइप लाइन के जरिए लोगों के घरों मेंं पहुंच जाता है। 50 साल पहले डाली गई लोहे की पाइप लाइनें जर्जर हो गई हैं।
जल संस्थान के दावों पर जन असंतोष
शहर की आबादी दो लाख से अधिक है और 33 वार्डों व तीन दर्जन नई व पुरानी बस्तियों में शुद्ध पानी पहुंचाना जल संस्थान की जिम्मेदारी है लेकिन लगातार आ रही शिकायतों से यह स्पष्ट है कि विभाग उपभोक्ताओं को संतोषजनक ढंग से पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध कराने में विफल साबित हो रहा है।
वर्जन-
मार्च से अब तक 250 नमूनों की जांच कराई गई। जिसमें दो नमूने फेल पाए गए। विभाग हकीकत पर पहुंचा तो कनेक्शन धारक का नल लीकेज था। जिससे गंदा पानी आ रहा था। पानी की टंकी पहले एक साल में साफ होती है लेकिन अब छह माह में साफ कराई जाएगी। जल्द टंकियों को साफ कराने के लिए अभियान चलाया जाएगा।
