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Banda News: भूमि अधिग्रहण की अफवाह के चलते किसानों ने नहीं उठाई आवाज
Wed, 29 Jul 2026 10:56 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Wed, 29 Jul 2026 10:56 PM IST
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बांदा। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के बीच फंसी करीब 300 बीघा जमीन के अधिग्रहण को लेकर अफवाह जोरों पर थी। यही कारण रहा कि किसानों ने रास्ता बंद होने का विरोध नहीं किया। जब उन्हें पता चला कि यह बस अफवाह थी, तब जाकर किसानों की नींद टूटी।
किसानों के अनुसार एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान मवई बुजुर्ग और चाहितारा गांव की बड़ी मात्रा में जमीन अधिग्रहित हुई थी, जिसका मुआवजा भी मिला। इसके बाद करीब 300 बीघा जमीन बच गई। पिछले एक वर्ष से यह चर्चा थी कि शेष जमीन का भी अधिग्रहण कर लिया जाएगा। उन्हें भी यह उम्मीद थी कि या तो यह जमीन एक्सप्रेसवे अथॉरिटी खरीद लेगी या फिर कृषि विश्वविद्यालय। इसी वजह से किसानों ने कोई विरोध नहीं किया लेकिन जब अधिग्रहण की संभावना खत्म होती दिखी तो उन्होंने अपनी जमीन तक रास्ता बहाल कराने की मांग तेज कर दी।
किसानों का कहना है कि उनकी जमीन एक्सप्रेसवे के किनारे और विश्वविद्यालय के फार्म के पास स्थित हैं। वहां पहुंचने का एकमात्र रास्ता एक्सप्रेसवे की खाली जमीन से होकर जाता था, जिसे विश्वविद्यालय की ओर से दीवार बनाकर बंद कर दिया गया। इससे किसान अपनी ही जमीन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। किसानों की मांग है कि या तो रास्ता खोला जाए या फिर जमीन का अधिग्रहण कर उचित मुआवजा दिया जाए।
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जांच के आदेश, लेकिन मौके पर नहीं पहुंची टीम
किसानों की शिकायत पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व कुमार धर्मेंद्र ने मामले की जांच सदर उप जिलाधिकारी को सौंपी है। हालांकि किसानों का आरोप है कि बुधवार तक जांच के लिए कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। न ही किसी किसान का पक्ष जानने के लिए प्रशासन की ओर से संपर्क किया गया है। ऐसे में किसानों को जांच प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार है।
-- -किसान बोले करेंगे आंदोलन
अभी किसानों को प्रशासन से उम्मीद है कि जल्द ही उनके खेतों के लिए कोई रास्ता दिया जाएगा। किसान संतोष शंकर ने कहा किसान कोई विवाद नहीं चाहते हैं लेकिन अगर अपना हक नहीं मिलेगा तो आंदोलन करने से भी किसान पीछे नहीं हटेंगे।
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किसानों के अनुसार एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान मवई बुजुर्ग और चाहितारा गांव की बड़ी मात्रा में जमीन अधिग्रहित हुई थी, जिसका मुआवजा भी मिला। इसके बाद करीब 300 बीघा जमीन बच गई। पिछले एक वर्ष से यह चर्चा थी कि शेष जमीन का भी अधिग्रहण कर लिया जाएगा। उन्हें भी यह उम्मीद थी कि या तो यह जमीन एक्सप्रेसवे अथॉरिटी खरीद लेगी या फिर कृषि विश्वविद्यालय। इसी वजह से किसानों ने कोई विरोध नहीं किया लेकिन जब अधिग्रहण की संभावना खत्म होती दिखी तो उन्होंने अपनी जमीन तक रास्ता बहाल कराने की मांग तेज कर दी।
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किसानों का कहना है कि उनकी जमीन एक्सप्रेसवे के किनारे और विश्वविद्यालय के फार्म के पास स्थित हैं। वहां पहुंचने का एकमात्र रास्ता एक्सप्रेसवे की खाली जमीन से होकर जाता था, जिसे विश्वविद्यालय की ओर से दीवार बनाकर बंद कर दिया गया। इससे किसान अपनी ही जमीन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। किसानों की मांग है कि या तो रास्ता खोला जाए या फिर जमीन का अधिग्रहण कर उचित मुआवजा दिया जाए।
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जांच के आदेश, लेकिन मौके पर नहीं पहुंची टीम
किसानों की शिकायत पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व कुमार धर्मेंद्र ने मामले की जांच सदर उप जिलाधिकारी को सौंपी है। हालांकि किसानों का आरोप है कि बुधवार तक जांच के लिए कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। न ही किसी किसान का पक्ष जानने के लिए प्रशासन की ओर से संपर्क किया गया है। ऐसे में किसानों को जांच प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार है।
अभी किसानों को प्रशासन से उम्मीद है कि जल्द ही उनके खेतों के लिए कोई रास्ता दिया जाएगा। किसान संतोष शंकर ने कहा किसान कोई विवाद नहीं चाहते हैं लेकिन अगर अपना हक नहीं मिलेगा तो आंदोलन करने से भी किसान पीछे नहीं हटेंगे।