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Banda News: खान अधिकारी को पीटने और रंगदारी मांगने के मामले में पूर्व विधायक समेत पांच बरी

Sat, 25 Jul 2026 11:30 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2026 11:30 PM IST
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Five including former MLA acquitted in case of beating up mine officer and demanding extortion
फोटो-6-पूर्व विधायक बृजेश प्रजापति। स्रोत: इंटरनेट
फोटो-6-पूर्व विधायक बृजेश प्रजापति। स्रोत : इंटरनेट
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-घटना के दौरान तिंदवारी से भाजपा के टिकट पर विधायक थे बृजेश प्रजापति
-अभियोजन साबित नहीं कर सका आरोप, एमपी-एमएलए कोर्ट ने सुनाया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। आठ साल पहले तत्कालीन खान अधिकारी को बंधकर बनाकर पीटने और रंगदारी मांगने के मामले में पूर्व विधायक तिंदवारी बृजेश प्रजापति समेत पांच को न्यायालय ने बरी कर दिया। यह आदेश विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए प्रफुल्ल कुमार चौधरी ने दिया है। एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है।
तत्कालीन जिला खान अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने कोतवाली नगर में शिकायत दर्ज कराई थी। कहा कि 9 अक्तूबर 2018 को विधायक के गनर और प्रतिनिधि ने उन्हें सर्किट हाउस बुलाया था। वहां बृजेश प्रजापति ने उनसे कहा कि उनकी विधानसभा में चलने वाले खनन पट्टों से 25 लाख रुपये प्रति माह हिस्सा तय कराएं। मना करने पर बृजेश प्रजापति और नीरज पटेल ने अपने पांच-छह साथियों के साथ मिलकर उन्हें व उनके कर्मचारी अरविंद कुमार पांडेय को कमरे में बंधक बना लिया। उन्हें लात-घूंसों से पीटा गया। दो व्यक्तियों के हाथ में राइफल भी थी। विधायक ने कहा कि बुलेट 150 रुपये में आती है, गोली से उड़वा दूंगा। उन्होंने परिवार सहित जान से मारने की धमकी भी दी। घटना के समय मौजूद सरकारी गनर मूकदर्शक बने रहे।
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शैलेंद्र सिंह की तहरीर पर थाना कोतवाली नगर, बांदा में बृजेश कुमार प्रजापति और पांच-छह अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया। विवेचना के बाद 11 अप्रैल 2022 को बृजेश कुमार प्रजापति, मनोज प्रजापति उर्फ नीतू, देवेन्द्र कुमार प्रजापति उर्फ पप्पू, कुलदीप पटेल उर्फ सीएम, लवलेश प्रजापति और हरिकरण सिंह के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अभियोजन पक्ष ने अपने मामले को साबित करने के लिए छह गवाहों को परीक्षित कराया। इनमें वादी शैलेंद्र सिंह और उनके कर्मचारी अरविंद कुमार पांडेय प्रमुख थे।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने शैलेंद्र सिंह से कई बार प्रतिपरीक्षा की। प्रतिपरीक्षा में शैलेंद्र सिंह ने स्वीकार किया कि उनके खिलाफ अवैध खनन और पारिवारिक विवादों को लेकर शिकायतें दर्ज हुई थीं। उन्होंने यह भी बताया कि अभियुक्तों के नाम उन्हें सर्किट हाउस के एक कर्मचारी ने बताए थे, जिसका नाम उन्हें याद नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने अभियुक्तों की पहचान परेड नहीं कराई थी। शैलेंद्र सिंह ने अपने खिलाफ एक आपराधिक मुकदमा प्रयागराज में दर्ज होने की बात भी स्वीकार की।
गवाहों व अभिलेखीय साक्ष्य से आरोप साबित नहीं हो सके। इसके चलते न्यायालय ने पूर्व विधायक समेत पांच आरोपियों को बरी कर दिया। वहीं हरिकरण की सुनवाई के दौरान पहले ही मौत हो चुकी है।

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इन बिंदुओं के चलते कमजोर पड़ता गया मुकदमा
मुकदमे की सुनवाई के दौरान कई ऐसे बिंदु सामने आए, जिनके चलते धीरे-धीरे मुकदमा कमजोर पड़ता गया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता रावेंद्र सिंह यादव ने बताया कि जिस सर्किट हाउस में बुलाकर बंधक बनाकर मारपीट करने और रंगदारी मांगने का आरोप था वहां घटना के दिन कोई रुका ही नहीं था। पूर्व विधायक के नाम भी उसका आवंटन नहीं हुआ था। इसके अलावा सर्किट हाउस के केयर टेकर को भी गवाह के तौर पर पेश नहीं किया गया। वादी की प्राथमिकी में कर्मचारी अरविंद कुमार पांडेय के साथ भी मारपीट की बात लिखी गई थी, लेकिन प्रतिपरीक्षा में कर्मचारी ने बताया कि वह कमरे के बाहर खड़ा था और उनसे पूर्व विधायक या किसी को नहीं देखा।
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