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Banda News: थाने में युवती की हत्या मामले में थानाध्यक्ष समेत तीन लाइन हाजिर
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फोटो - 24 अजीत प्रताप सिंह। स्त्रोत : पुलिस
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बांदा। बदौसा थाना परिसर में 10 जून को अनुसूचित जाति के युवक से शादी करने वाली युवती शिवानी की हत्या के मामले में थानाध्यक्ष, दिवस अधिकारी और महिला आरक्षी को लाइन हाजिर किया गया है। पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने यह कार्रवाई सीओ सदर की जांच रिपोर्ट के आधार पर की है।
जांच में यह पाया गया कि थानाध्यक्ष अजीत प्रताप सिंह, दिवस अधिकारी उपनिरीक्षक सुरेंद्र मिश्रा और महिला आरक्षी राखी ने सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही और ड्यूटी के दौरान अपेक्षित सतर्कता नहीं बरती। इसी वजह से पिता सत्य कुमार सिंह ने चाकू से वारकर शिवानी की हत्या कर दी। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में युवती की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जाने का भी जिक्र किया गया है।
अब आगे क्या होगी कार्रवाई
पुलिस विभाग में लाइन हाजिर किया जाना प्रारंभिक अनुशासनात्मक कार्रवाई माना जाता है। इसके बाद संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जा सकती है। जांच अधिकारी आरोपों की समीक्षा कर सभी पक्षों के बयान दर्ज करेंगे। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो दोषी पुलिसकर्मियों पर चेतावनी, वेतनवृद्धि रोकने, प्रतिकूल प्रविष्टि, निलंबन अथवा सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई की जा सकती है। कार्रवाई के अगले चरण में यह तय होगा कि थाने के भीतर हुई इस सनसनीखेज हत्या के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की जवाबदेही किस स्तर तक तय की जाती है।
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कई थाना प्रभारी इधर से उधर
एसपी पलाश बंसल ने कोतवाली देहात में तैनात सीपी तिवारी को थाना बिसंडा, अतर्रा प्रभारी संजीव चौबे को देहात कोतवाली, बबेरू थाना में तैनात उपनिरीक्षक राधाकृष्ण तिवारी बदौसा की कमान सौंपी है। इसके साथ ही 10 उपनिरीक्षकों का भी कार्यक्षेत्र परिवर्तित किया गया है।
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प्रेम, प्रतिष्ठा और पुलिस की लापरवाही पर उठे सवाल
19 वर्षीय शिवानी की हत्या का मामला अब केवल हत्या या प्रेम प्रसंग तक सीमित नहीं रह गया है। दो वर्षों तक चले प्रेम संबंध, परिवारों के विरोध, घर छोड़कर की गई शादी और आखिरकार थाने के भीतर हुई हत्या ने पूरे घटनाक्रम को कई गंभीर सवालों के केंद्र में ला खड़ा किया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस युवती को सुरक्षा और न्याय दिलाने के लिए थाने लाया गया था, उसकी जान पुलिस की मौजूदगी में कैसे चली गई।
बरछा-बा गांव निवासी शिवानी और पड़ोस में रहने वाले ललित वर्मा का प्रेम संबंध करीब दो वर्ष पुराना बताया जा रहा है। दोनों के परिवारों को इसकी जानकारी थी और कई बार समझौते के प्रयास भी हुए, लेकिन बात नहीं बनी। 18 मई को शिवानी घर छोड़कर ललित के साथ चली गई और दोनों ने विवाह कर लिया। बेटी के इस फैसले से नाराज पिता सत्यकुमार सिंह लगातार उसे वापस लाने की कोशिश कर रहा था। शुक्रवार को मध्य प्रदेश से शिवानी और उसके पति को पकड़कर बदौसा थाने लाया गया। यहां युवती के बयान और मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान पिता ने जेब से रामपुरी चाकू निकालकर बेटी पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल शिवानी को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद सामने आए तथ्यों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार थाने में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी और न ही आरोपी की प्रभावी तलाशी ली गई।
जांच में यह पाया गया कि थानाध्यक्ष अजीत प्रताप सिंह, दिवस अधिकारी उपनिरीक्षक सुरेंद्र मिश्रा और महिला आरक्षी राखी ने सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही और ड्यूटी के दौरान अपेक्षित सतर्कता नहीं बरती। इसी वजह से पिता सत्य कुमार सिंह ने चाकू से वारकर शिवानी की हत्या कर दी। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में युवती की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जाने का भी जिक्र किया गया है।
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अब आगे क्या होगी कार्रवाई
पुलिस विभाग में लाइन हाजिर किया जाना प्रारंभिक अनुशासनात्मक कार्रवाई माना जाता है। इसके बाद संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जा सकती है। जांच अधिकारी आरोपों की समीक्षा कर सभी पक्षों के बयान दर्ज करेंगे। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो दोषी पुलिसकर्मियों पर चेतावनी, वेतनवृद्धि रोकने, प्रतिकूल प्रविष्टि, निलंबन अथवा सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई की जा सकती है। कार्रवाई के अगले चरण में यह तय होगा कि थाने के भीतर हुई इस सनसनीखेज हत्या के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की जवाबदेही किस स्तर तक तय की जाती है।
कई थाना प्रभारी इधर से उधर
एसपी पलाश बंसल ने कोतवाली देहात में तैनात सीपी तिवारी को थाना बिसंडा, अतर्रा प्रभारी संजीव चौबे को देहात कोतवाली, बबेरू थाना में तैनात उपनिरीक्षक राधाकृष्ण तिवारी बदौसा की कमान सौंपी है। इसके साथ ही 10 उपनिरीक्षकों का भी कार्यक्षेत्र परिवर्तित किया गया है।
प्रेम, प्रतिष्ठा और पुलिस की लापरवाही पर उठे सवाल
19 वर्षीय शिवानी की हत्या का मामला अब केवल हत्या या प्रेम प्रसंग तक सीमित नहीं रह गया है। दो वर्षों तक चले प्रेम संबंध, परिवारों के विरोध, घर छोड़कर की गई शादी और आखिरकार थाने के भीतर हुई हत्या ने पूरे घटनाक्रम को कई गंभीर सवालों के केंद्र में ला खड़ा किया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस युवती को सुरक्षा और न्याय दिलाने के लिए थाने लाया गया था, उसकी जान पुलिस की मौजूदगी में कैसे चली गई।
बरछा-बा गांव निवासी शिवानी और पड़ोस में रहने वाले ललित वर्मा का प्रेम संबंध करीब दो वर्ष पुराना बताया जा रहा है। दोनों के परिवारों को इसकी जानकारी थी और कई बार समझौते के प्रयास भी हुए, लेकिन बात नहीं बनी। 18 मई को शिवानी घर छोड़कर ललित के साथ चली गई और दोनों ने विवाह कर लिया। बेटी के इस फैसले से नाराज पिता सत्यकुमार सिंह लगातार उसे वापस लाने की कोशिश कर रहा था। शुक्रवार को मध्य प्रदेश से शिवानी और उसके पति को पकड़कर बदौसा थाने लाया गया। यहां युवती के बयान और मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान पिता ने जेब से रामपुरी चाकू निकालकर बेटी पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल शिवानी को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद सामने आए तथ्यों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार थाने में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी और न ही आरोपी की प्रभावी तलाशी ली गई।

फोटो - 24 अजीत प्रताप सिंह। स्त्रोत : पुलिस