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Banda News: उम्र घटाने के खेल की जांच अब प्रयागराज जाएगी जांच टीम
Sat, 13 Jun 2026 01:17 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 13 Jun 2026 01:17 AM IST
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बांदा। पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा में उम्र कम दिखाकर शामिल होने के आरोप में पकड़े गए अभ्यर्थी आदर्श सिंह की जांच अब प्रयागराज तक पहुंचेगी। मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने दस्तावेजों की पड़ताल तेज कर दी है। जांच टीम जल्द ही प्रयागराज जाकर माध्यमिक शिक्षा परिषद के रिकॉर्ड, संबंधित विद्यालयों के अभिलेख और आधार कार्ड में जन्मतिथि परिवर्तन से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेगी।
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में प्रयागराज जिले के फाफामऊ थाना क्षेत्र के सराय गोपाल गांव निवासी अभ्यर्थी आदर्श सिंह ने वर्ष 2001 में पहली बार प्रयागराज के ही बहोरीपुर स्थित भगवानदीन इंटर कॉलेज और वर्ष 2004 में इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण करने की बात स्वीकार की थी। इसके बाद आयु कम करने के उद्देश्य से उसने प्रयागराज के बेरवा स्थित आईवीवीएस इंटर कॉलेज से वर्ष 2014 में दोबारा हाईस्कूल और वर्ष 2016 में इंटरमीडिएट किया था। इन्हीं अंक पत्रों में दर्ज एक जनवरी 1998 आधार कार्ड में भी दर्ज कराई थी, जबकि उसकी वास्तविक जन्मतिथि 29 जून 1985 है।
अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. शिवराज का मानना है कि यदि जन्मतिथि बदलने के लिए कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ है तो मामला केवल भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दस्तावेजी जालसाजी के बड़े नेटवर्क की भी पड़ताल हो सकती है।
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सबसे बड़ा सवाल: दो बार हाईस्कूल कैसे पास किया
मामले में सबसे अहम प्रश्न यह है कि वर्ष 2001 में हाईस्कूल और वर्ष 2004 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अभ्यर्थी आदर्श ने वर्ष 2014 में दोबारा हाईस्कूल परीक्षा किस आधार पर दी। पुलिस यह भी जांच करेगी कि उस समय प्रस्तुत अभिलेखों में क्या जानकारी दी गई थी और क्या संबंधित संस्थानों को वास्तविक तथ्यों की जानकारी की जाएगी।
इन बिंदुओं पर होगी जांच
वर्ष 2001 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की मूल अंकतालिका और प्रमाणपत्र।
वर्ष 2014 में दोबारा दी गई हाईस्कूल परीक्षा का पूरा रिकॉर्ड।
दोनों शैक्षिक अभिलेखों में दर्ज जन्म तिथियों का मिलान।
संबंधित विद्यालयों में दाखिले के समय जमा किए गए दस्तावेज।
आधार कार्ड में जन्मतिथि परिवर्तन के लिए प्रस्तुत अभिलेख।
कहीं किसी कर्मचारी या एजेंट की भूमिका तो नहीं रही।
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पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में प्रयागराज जिले के फाफामऊ थाना क्षेत्र के सराय गोपाल गांव निवासी अभ्यर्थी आदर्श सिंह ने वर्ष 2001 में पहली बार प्रयागराज के ही बहोरीपुर स्थित भगवानदीन इंटर कॉलेज और वर्ष 2004 में इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण करने की बात स्वीकार की थी। इसके बाद आयु कम करने के उद्देश्य से उसने प्रयागराज के बेरवा स्थित आईवीवीएस इंटर कॉलेज से वर्ष 2014 में दोबारा हाईस्कूल और वर्ष 2016 में इंटरमीडिएट किया था। इन्हीं अंक पत्रों में दर्ज एक जनवरी 1998 आधार कार्ड में भी दर्ज कराई थी, जबकि उसकी वास्तविक जन्मतिथि 29 जून 1985 है।
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अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. शिवराज का मानना है कि यदि जन्मतिथि बदलने के लिए कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ है तो मामला केवल भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दस्तावेजी जालसाजी के बड़े नेटवर्क की भी पड़ताल हो सकती है।
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सबसे बड़ा सवाल: दो बार हाईस्कूल कैसे पास किया
मामले में सबसे अहम प्रश्न यह है कि वर्ष 2001 में हाईस्कूल और वर्ष 2004 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अभ्यर्थी आदर्श ने वर्ष 2014 में दोबारा हाईस्कूल परीक्षा किस आधार पर दी। पुलिस यह भी जांच करेगी कि उस समय प्रस्तुत अभिलेखों में क्या जानकारी दी गई थी और क्या संबंधित संस्थानों को वास्तविक तथ्यों की जानकारी की जाएगी।
इन बिंदुओं पर होगी जांच
वर्ष 2001 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की मूल अंकतालिका और प्रमाणपत्र।
वर्ष 2014 में दोबारा दी गई हाईस्कूल परीक्षा का पूरा रिकॉर्ड।
दोनों शैक्षिक अभिलेखों में दर्ज जन्म तिथियों का मिलान।
संबंधित विद्यालयों में दाखिले के समय जमा किए गए दस्तावेज।
आधार कार्ड में जन्मतिथि परिवर्तन के लिए प्रस्तुत अभिलेख।
कहीं किसी कर्मचारी या एजेंट की भूमिका तो नहीं रही।