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Banda News: केन- बेतवा लिंक विरोध आंदोलन फिर भड़का, अगुवाकार दोबारा गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sun, 10 May 2026 12:23 AM IST
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फोटो - 10 पन्ना एसपी कार्यालय के बाहर धरना देते कांग्रेस विधायक और आदिवासी आदि। स्रोत - सोशल म
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बांदा। बुंदेलखंड की दो प्रमुख राष्ट्रीय नदियों केन और बेतवा को आपस में जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना में अड़चनों और विरोध का दौर थम नहीं रहा। परियोजना से प्रभावित गांवों के आदिवासियों की पैरवी और अगुवाई कर रहे स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर को स्थानीय पुलिस ने शुक्रवार की देररात घर से उठा लिया और कई धाराओं में जेल भेज दिया। तीन माह पूर्व भी अमित को जेल भेजा गया था। अपने नेता की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही आदिवासी भड़क उठे हैं। आंदोलन में कांग्रेस के झाबुआ विधायक भी आदिवासियों का समर्थन कर रहे हैं।
केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों को उनकी ली गई भूमि का मुनासिब मुआवजा और विस्थापन पुनर्वास तथा पर्यावरण बचाने आदि के मुद्दों पर शुरुआत से ही आदिवासियों का विरोध आंदोलन जारी है। पिछले माह प्रतीकात्मक फांसी, जल समाधि, चिता आंदोलन हुआ था। अब शुक्रवार आठ मई से न्याय अधिकार पद यात्रा शुरू की जा रही थी लेकिन इसकी पूर्व संध्या पर ही आंदोलन की अगुवाई कर रहे अमित भटनागर को पन्ना (मध्य प्रदेश) पुलिस ने उनके नौ साथियों समेत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस पर आदिवासी सड़कों पर उतर आए। पन्ना पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर देर रात तक धरने पर बैठे रहे।
मध्य प्रदेश के झाबुआ क्षेत्र से कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत तरिया सहित युवा कांग्रेस नेता सदफ खान, नगर पंचायत सदस्य दिव्या अहिरवार और आदिवासियों ने पन्ना पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया। शनिवार को भी आंदोलनकारी पुलिस अधीक्षक से नहीं मिल पाए। उनका कहना है कि अमित व साथियों की रिहाई सहित अन्य मांगें पूरी न होने तक आंदोलन जारी रहेगा। तीन माह पूर्व नौ फरवरी को भी आंदोलन के दौरान स्थानीय पुलिस ने अमित भटनागर को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आदिवासियों ने कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया था।
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योजना पर एक नजर
केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना है। जिसका उद्देश्य मध्य प्रदेश की केन नदी के अतिरिक्त पानी को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी में स्थानांतरित कर बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त क्षेत्रों (झांसी, बांदा, ललितपुर, महोबा, पन्ना, छतरपुर) को सिंचित करना है। लगभग 44,605 करोड़ की इस परियोजना से 10 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई, 62 लाख लोगों को पेयजल और 103 मेगावाट बिजली
केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों को उनकी ली गई भूमि का मुनासिब मुआवजा और विस्थापन पुनर्वास तथा पर्यावरण बचाने आदि के मुद्दों पर शुरुआत से ही आदिवासियों का विरोध आंदोलन जारी है। पिछले माह प्रतीकात्मक फांसी, जल समाधि, चिता आंदोलन हुआ था। अब शुक्रवार आठ मई से न्याय अधिकार पद यात्रा शुरू की जा रही थी लेकिन इसकी पूर्व संध्या पर ही आंदोलन की अगुवाई कर रहे अमित भटनागर को पन्ना (मध्य प्रदेश) पुलिस ने उनके नौ साथियों समेत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस पर आदिवासी सड़कों पर उतर आए। पन्ना पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर देर रात तक धरने पर बैठे रहे।
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मध्य प्रदेश के झाबुआ क्षेत्र से कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत तरिया सहित युवा कांग्रेस नेता सदफ खान, नगर पंचायत सदस्य दिव्या अहिरवार और आदिवासियों ने पन्ना पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया। शनिवार को भी आंदोलनकारी पुलिस अधीक्षक से नहीं मिल पाए। उनका कहना है कि अमित व साथियों की रिहाई सहित अन्य मांगें पूरी न होने तक आंदोलन जारी रहेगा। तीन माह पूर्व नौ फरवरी को भी आंदोलन के दौरान स्थानीय पुलिस ने अमित भटनागर को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आदिवासियों ने कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया था।
योजना पर एक नजर
केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना है। जिसका उद्देश्य मध्य प्रदेश की केन नदी के अतिरिक्त पानी को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी में स्थानांतरित कर बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त क्षेत्रों (झांसी, बांदा, ललितपुर, महोबा, पन्ना, छतरपुर) को सिंचित करना है। लगभग 44,605 करोड़ की इस परियोजना से 10 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई, 62 लाख लोगों को पेयजल और 103 मेगावाट बिजली

फोटो - 10 पन्ना एसपी कार्यालय के बाहर धरना देते कांग्रेस विधायक और आदिवासी आदि। स्रोत - सोशल म

फोटो - 10 पन्ना एसपी कार्यालय के बाहर धरना देते कांग्रेस विधायक और आदिवासी आदि। स्रोत - सोशल म