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Banda News: भाई और भांजे ने डूबने से बचने के लिए पकड़ लिए थे माधुरी के पैर
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फोटो - 19 चंद्रावल नदी में बच्चों की तलाश करते गोताखोर। संवाद
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जसपुरा (बांदा)। जसपुरा थाना क्षेत्र के गौरीकला गांव निवासी उमाशंकर विश्वकर्मा ने बताया कि अभी हाल ही में मौदहा बांध का पानी नहरों के लिए छोड़ा गया है। नहरों से होकर बांध का पानी चंद्रावल नदी में आने से नदी का बहाव तेज था। इसी दौरान सोमवती अमावस्या में स्नान करने गए भाई-बहन समेत तीन बच्चे नदी में डूबकर बह गए थे। ताऊ उमाशंकर ने बताया कि जब तीनों के शव पानी से बाहर निकाले गए तो भाई और भांजा अपनी बहन के पैर पकड़े हुए थे। जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। इससे पता चलता है कि तीनों ने जान बचाने के लिए कितना संघर्ष किया होगा।
गौरीकला गांव निवासी उमाशंकर के मुताबिक, माधुरी कक्षा नौ में गांव के ही विद्यालय में पढ़ती है। उसका भाई अंश कक्षा छह में था। जबकि प्रतीक कक्षा पांच तक परास गांव में पढ़ा है। प्रतीक माधुरी की चचेरी बहन स्नेहा का पुत्र है। माधुरी और अंश के पिता रमाशंकर विश्वकर्मा मजदूरी करते हैं। घर में मां सुनैना हैं। माधुरी और अंश तीन भाई-बहन हैं। सबसे बड़ा ऋषभ (15) है। जबकि प्रतीक दो भाई एक बहन में सबसे बड़ा था। एक साथ तीनों बच्चों के नदी में डूबकर मौत होने से कोहराम मचा है।
बच्चों समेत पत्नी को घर से दिया था निकाल
बांदा। जसपुरा थाना क्षेत्र के गौरीकला गांव निवासी उमाशंकर विश्वकर्मा ने बताया कि वह तीन भाई हैं। बड़े भाई शिव कुमार की बेटी स्नेहा की शादी कानपुर नगर के घाटमपुर थाना क्षेत्र के परास गांव में हुई थी। स्नेहा का पति पंकज विश्वकर्मा उसे सही तरह से नहीं रखता था और मारपीट करता था। उसने स्नेहा को बच्चों समेत होली के त्योहार में घर से मारपीट कर निकाल दिया था। तब से स्नेहा अपने बेटे प्रतीक समेत तीनों बच्चों के साथ अपने मायके गौरीकला में रह रही है। प्रतीक के पिता पंकज ने 12 अप्रैल को गौरीकला गांव आकर गुस्से में घर में आग भी लगा दी थी, जिससे पूरा परिवार समय रहते आग से जलने से बच गया था।
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10 से 12 गोताखोर लगे, तब तीन घंटे में तलाश पाए तीनों को
बांदा। चंद्रावल नदी में घटनास्थल में इतना तेज बहाव था कि तीनों बच्चाें को तलाश करने में गांव के 10 से 12 गोताखोरों को तीन घंटे से ज्यादा का समय लग गया था। बाद में तीनों को नदी से बरामद किया गया। दो एंबुलेंस से तीनों को जसपुरा सीएचसी ले जाया गया। यहां तीनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया गया था। (संवाद)
बच्वों के शवों को देखकर बेहोश हुईं मां
जसपुरा। गौरी कलां गांव में तीन मासूम बच्चों की मौत से गहरा मातम पसरा है। अस्पताल परिसर में ऐसा कोहराम मचा कि वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं। मां सुनैना अपने बेटे और बेटी के शवों से लिपटकर बार-बार बेहोश हो रही थीं। उनकी दर्द भरी चीखें सुनकर हर किसी का कलेजा कांप उठा। पिता रमाशंकर की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। मृतक प्रतीक की मां स्नेहा भी अपने बेटे का चेहरा देखकर बिलख उठीं। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि बेटे की अर्थी को कंधा देना पड़ेगा। गांव के बुजुर्गों ने इसे अपने जीवन का हृदय विदारक दृश्य बताया। शाम को पोस्टमार्टम के बाद गांव से तीन अर्थियां एक साथ निकलीं तो हर आंख नम थी। (संवाद)
गौरीकला गांव निवासी उमाशंकर के मुताबिक, माधुरी कक्षा नौ में गांव के ही विद्यालय में पढ़ती है। उसका भाई अंश कक्षा छह में था। जबकि प्रतीक कक्षा पांच तक परास गांव में पढ़ा है। प्रतीक माधुरी की चचेरी बहन स्नेहा का पुत्र है। माधुरी और अंश के पिता रमाशंकर विश्वकर्मा मजदूरी करते हैं। घर में मां सुनैना हैं। माधुरी और अंश तीन भाई-बहन हैं। सबसे बड़ा ऋषभ (15) है। जबकि प्रतीक दो भाई एक बहन में सबसे बड़ा था। एक साथ तीनों बच्चों के नदी में डूबकर मौत होने से कोहराम मचा है।
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बच्चों समेत पत्नी को घर से दिया था निकाल
बांदा। जसपुरा थाना क्षेत्र के गौरीकला गांव निवासी उमाशंकर विश्वकर्मा ने बताया कि वह तीन भाई हैं। बड़े भाई शिव कुमार की बेटी स्नेहा की शादी कानपुर नगर के घाटमपुर थाना क्षेत्र के परास गांव में हुई थी। स्नेहा का पति पंकज विश्वकर्मा उसे सही तरह से नहीं रखता था और मारपीट करता था। उसने स्नेहा को बच्चों समेत होली के त्योहार में घर से मारपीट कर निकाल दिया था। तब से स्नेहा अपने बेटे प्रतीक समेत तीनों बच्चों के साथ अपने मायके गौरीकला में रह रही है। प्रतीक के पिता पंकज ने 12 अप्रैल को गौरीकला गांव आकर गुस्से में घर में आग भी लगा दी थी, जिससे पूरा परिवार समय रहते आग से जलने से बच गया था।
10 से 12 गोताखोर लगे, तब तीन घंटे में तलाश पाए तीनों को
बांदा। चंद्रावल नदी में घटनास्थल में इतना तेज बहाव था कि तीनों बच्चाें को तलाश करने में गांव के 10 से 12 गोताखोरों को तीन घंटे से ज्यादा का समय लग गया था। बाद में तीनों को नदी से बरामद किया गया। दो एंबुलेंस से तीनों को जसपुरा सीएचसी ले जाया गया। यहां तीनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया गया था। (संवाद)
बच्वों के शवों को देखकर बेहोश हुईं मां
जसपुरा। गौरी कलां गांव में तीन मासूम बच्चों की मौत से गहरा मातम पसरा है। अस्पताल परिसर में ऐसा कोहराम मचा कि वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं। मां सुनैना अपने बेटे और बेटी के शवों से लिपटकर बार-बार बेहोश हो रही थीं। उनकी दर्द भरी चीखें सुनकर हर किसी का कलेजा कांप उठा। पिता रमाशंकर की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। मृतक प्रतीक की मां स्नेहा भी अपने बेटे का चेहरा देखकर बिलख उठीं। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि बेटे की अर्थी को कंधा देना पड़ेगा। गांव के बुजुर्गों ने इसे अपने जीवन का हृदय विदारक दृश्य बताया। शाम को पोस्टमार्टम के बाद गांव से तीन अर्थियां एक साथ निकलीं तो हर आंख नम थी। (संवाद)

फोटो - 19 चंद्रावल नदी में बच्चों की तलाश करते गोताखोर। संवाद