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Banda News: सकारात्मक वातावरण के लिए जेल में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ शुरू
Sat, 13 Jun 2026 11:50 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 13 Jun 2026 11:50 PM IST
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बांदा। मंडल कारागार में हाल के दिनों में हुई दो घटनाओं के बाद जेल प्रशासन अब बंदियों और कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य तथा सकारात्मक वातावरण पर विशेष ध्यान दे रहा है। इसी क्रम में प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को सुबह-शाम सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ होगा। यह व्यवस्था शनिवार से ही लागू कर दी गई है।
बीते दिनों दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट के मामले में निरुद्ध बंदी अभिषेक सिंह ने जेल परिसर में आत्महत्या कर ली थी। इससे पहले दुष्कर्म के आरोपी बंदी नीतीश की मौत का मामला भी चर्चा में रहा था। इन घटनाओं के बाद जेल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के साथ-साथ बंदियों के मानसिक और भावनात्मक पक्ष पर भी ध्यान दिया है। जेल अधिकारियों का मानना है कि जेल में लंबे समय तक रहने वाले कई बंदी मानसिक तनाव, पारिवारिक चिंताओं और भविष्य की अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं।
ऐसे में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां उन्हें सकारात्मक सोच विकसित करने और अनुशासित दिनचर्या अपनाने में मदद कर सकती हैं। इसलिए हनुमान चालीसा के अलावा योग, ध्यान और नैतिक प्रेरणा से जुड़े कार्यक्रमों को भी बढ़ावा देने की तैयारी की जा रही है। सूत्रों के अनुसार ऐसे बंदियों की भी पहचान की जा रही है जो मानसिक तनाव या अवसाद से ग्रसित हैं। इनकी नियमित काउंसिलिंग और निगरानी की जाएगी।
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वर्जन
बंदियों के मानसिक तनाव को कम करने और जेल में सकारात्मक वातावरण बनाने के उद्देश्य से सामूहिक हनुमान चालीसा के पाठ का निर्णय बंदियों व कैदियों ने स्वेच्छा से लिया है। इसका उद्देश्य अनुशासन, आत्मबल को बढ़ावा देना है।
- शशिकांत सिंह, जेल अधीक्षक
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बीते दिनों दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट के मामले में निरुद्ध बंदी अभिषेक सिंह ने जेल परिसर में आत्महत्या कर ली थी। इससे पहले दुष्कर्म के आरोपी बंदी नीतीश की मौत का मामला भी चर्चा में रहा था। इन घटनाओं के बाद जेल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के साथ-साथ बंदियों के मानसिक और भावनात्मक पक्ष पर भी ध्यान दिया है। जेल अधिकारियों का मानना है कि जेल में लंबे समय तक रहने वाले कई बंदी मानसिक तनाव, पारिवारिक चिंताओं और भविष्य की अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं।
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ऐसे में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां उन्हें सकारात्मक सोच विकसित करने और अनुशासित दिनचर्या अपनाने में मदद कर सकती हैं। इसलिए हनुमान चालीसा के अलावा योग, ध्यान और नैतिक प्रेरणा से जुड़े कार्यक्रमों को भी बढ़ावा देने की तैयारी की जा रही है। सूत्रों के अनुसार ऐसे बंदियों की भी पहचान की जा रही है जो मानसिक तनाव या अवसाद से ग्रसित हैं। इनकी नियमित काउंसिलिंग और निगरानी की जाएगी।
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बंदियों के मानसिक तनाव को कम करने और जेल में सकारात्मक वातावरण बनाने के उद्देश्य से सामूहिक हनुमान चालीसा के पाठ का निर्णय बंदियों व कैदियों ने स्वेच्छा से लिया है। इसका उद्देश्य अनुशासन, आत्मबल को बढ़ावा देना है।
- शशिकांत सिंह, जेल अधीक्षक