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Banda News: मिलर्स क्रय केंद्रों को बोरे देने को राजी, मांगा 40 रुपये बोरा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 21 Apr 2026 12:25 AM IST
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फोटो- 29 मंडी के विपणन क्रय केंद्र में गेहूं उड़ेलता किसान। संवाद
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बांदा। जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद शुरू हुए एक माह से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन सरकारी क्रय केंद्रों में बोरों की भारी कमी के चलते खरीद प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इस संकट के कारण जरूरतमंद किसान अपनी उपज को औने-पौने दामों पर स्थानीय आढ़तियों को बेचने के लिए मजबूर हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
विपणन विभाग को मिलर्स ने 6.35 लाख जूट के इस्तेमाल किए हुए बोरे उपलब्ध कराने की सहमति तो दे दी है लेकिन इसके लिए उन्होंने प्रति बोरा 40 रुपये की मांग रखी है। यह मांग विभाग के लिए एक बड़ी परेशानी का सबब बन गई है। वहीं जिला पूर्ति विभाग 30 रुपये प्रति बोरा की दर से बोरे देने को तैयार है। हालांकि ये बोरे 30 अप्रैल को राशन की दुकानों में वितरण तिथि समाप्त होने के बाद ही उपलब्ध हो पाएंगे।
इधर, क्रय केंद्रों के प्रभारियों का कहना है कि प्रति केंद्र को प्रतिदिन औसतन 200 से 300 बोरों की आवश्यकता होती है। इतने बोरों की खरीद क्रय केंद्र प्रभारियों के लिए अपने खर्च से करना संभव नहीं है। इस स्थिति में, विपणन विभाग द्वारा गेहूं खरीद का दबाव बनाए जाने से केंद्र प्रभारियों को व्यक्तिगत रूप से बोरे खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। किसानों के लिए यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है।
कई किसानों के घरों में बेटियों की शादी है या फिर परिवार में कोई बीमारी है, जिसके लिए उन्हें तत्काल धन की आवश्यकता है। ऐसे में, जब सरकारी क्रय केंद्रों पर बोरे न होने के कारण उनकी फसल नहीं खरीदी जा रही है, तो वे मजबूरन अपनी उपज को आढ़तियों के हाथों सस्ते दामों पर बेचने के लिए विवश हो रहे हैं।
बोरे न होने से नहीं खरीदा जा रहा गेहूं
पहली अप्रैल से क्रय केंद्र पर चक्कर लगा रहे हैं लेकिन बोरे न होने के कारण उनका गेहूं नहीं खरीदा जा रहा है। उन्हें बोरे के नाम पर प्रति क्विंटल 50 रुपये की मांग का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही नमी, छानन और पल्लेदारी के नाम पर दो से पांच किलो गेहूं की कटौती भी की जा रही है।
दयानंद, गंछा
केंद्र प्रभारी घर से बोरे लाने की दे रहे सलाह
घर में शादी है और उन्हें रुपयों की सख्त जरूरत है। क्रय केंद्रों पर बोरों की अनुपलब्धता के कारण उनका गेहूं नहीं खरीदा जा रहा है। क्रय केंद्र प्रभारी उन्हें घर से बोरे लाने की सलाह दे रहे हैं। भुगतान में देरी के कारण वे भी आढ़तियों को सस्ते दाम पर गेहूं बेचने को मजबूर हैं।
प्रभु, महोखर
धान के उठान में देरी का अतिरिक्त बोझ
एक अन्य समस्या यह है कि खरीफ सीजन में खरीदे गए धान का अभी तक उठान नहीं हुआ है। इससे प्रति बोरा एक से दो किलो धान सूख रहा है, जिसके कारण क्रय केंद्र प्रभारियों को हजारों रुपये का नुकसान हो रहा है। इस सूखे हुए धान के कारण बोरों का आकार भी छोटा हो गया है, जिससे उनकी उपयोगिता पर भी प्रश्नचिन्ह लग गया है।
वर्जन
जिला विपणन अधिकारी रामानंद का कहना है कि बोरों का कोई संकट नहीं है और मिलर्स तथा राशन की दुकानों से बोरे उपलब्ध हो रहे हैं। उन्होंने गेहूं खरीद में लापरवाही पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। हालांकि, किसानों और क्रय केंद्र प्रभारियों की मानें तो स्थिति इसके विपरीत है और बोरों की कमी खरीद प्रक्रिया में एक बड़ी बाधा बनी हुई है।
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इधर, क्रय केंद्रों के प्रभारियों का कहना है कि प्रति केंद्र को प्रतिदिन औसतन 200 से 300 बोरों की आवश्यकता होती है। इतने बोरों की खरीद क्रय केंद्र प्रभारियों के लिए अपने खर्च से करना संभव नहीं है। इस स्थिति में, विपणन विभाग द्वारा गेहूं खरीद का दबाव बनाए जाने से केंद्र प्रभारियों को व्यक्तिगत रूप से बोरे खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। किसानों के लिए यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है।
कई किसानों के घरों में बेटियों की शादी है या फिर परिवार में कोई बीमारी है, जिसके लिए उन्हें तत्काल धन की आवश्यकता है। ऐसे में, जब सरकारी क्रय केंद्रों पर बोरे न होने के कारण उनकी फसल नहीं खरीदी जा रही है, तो वे मजबूरन अपनी उपज को आढ़तियों के हाथों सस्ते दामों पर बेचने के लिए विवश हो रहे हैं।
बोरे न होने से नहीं खरीदा जा रहा गेहूं
पहली अप्रैल से क्रय केंद्र पर चक्कर लगा रहे हैं लेकिन बोरे न होने के कारण उनका गेहूं नहीं खरीदा जा रहा है। उन्हें बोरे के नाम पर प्रति क्विंटल 50 रुपये की मांग का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही नमी, छानन और पल्लेदारी के नाम पर दो से पांच किलो गेहूं की कटौती भी की जा रही है।
दयानंद, गंछा
केंद्र प्रभारी घर से बोरे लाने की दे रहे सलाह
घर में शादी है और उन्हें रुपयों की सख्त जरूरत है। क्रय केंद्रों पर बोरों की अनुपलब्धता के कारण उनका गेहूं नहीं खरीदा जा रहा है। क्रय केंद्र प्रभारी उन्हें घर से बोरे लाने की सलाह दे रहे हैं। भुगतान में देरी के कारण वे भी आढ़तियों को सस्ते दाम पर गेहूं बेचने को मजबूर हैं।
प्रभु, महोखर
धान के उठान में देरी का अतिरिक्त बोझ
एक अन्य समस्या यह है कि खरीफ सीजन में खरीदे गए धान का अभी तक उठान नहीं हुआ है। इससे प्रति बोरा एक से दो किलो धान सूख रहा है, जिसके कारण क्रय केंद्र प्रभारियों को हजारों रुपये का नुकसान हो रहा है। इस सूखे हुए धान के कारण बोरों का आकार भी छोटा हो गया है, जिससे उनकी उपयोगिता पर भी प्रश्नचिन्ह लग गया है।
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जिला विपणन अधिकारी रामानंद का कहना है कि बोरों का कोई संकट नहीं है और मिलर्स तथा राशन की दुकानों से बोरे उपलब्ध हो रहे हैं। उन्होंने गेहूं खरीद में लापरवाही पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। हालांकि, किसानों और क्रय केंद्र प्रभारियों की मानें तो स्थिति इसके विपरीत है और बोरों की कमी खरीद प्रक्रिया में एक बड़ी बाधा बनी हुई है।

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