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Banda News: पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ की मौत की गुत्थी उलझी, मौत का कारण अस्पष्ट
Mon, 20 Jul 2026 11:38 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Mon, 20 Jul 2026 11:38 PM IST
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फोटो-14-पन्ना टाइगर रिजर्व में मिला बाघ का शव। स्राेत: पीटीआर
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करतल (बांदा)। बांदा से सटे मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में मिले करीब चार वर्षीय वयस्क नर बाघ की मौत की गुत्थी अभी नहीं सुलझ सकी है। किशनगढ़ कोर रेंज में पेट्रोलिंग के दौरान मिले बाघ के शव की जांच में सामने आया है कि उसकी मौत करीब 60 घंटे पहले हो चुकी थी। अधिक तापमान और नमी (ह्यूमिडिटी) के कारण शव सड़ने लगा था, जिससे पोस्टमार्टम में मौत का स्पष्ट कारण पता नहीं चल सका।
पन्ना टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला प्राकृतिक मौत का प्रतीत होता है, लेकिन इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए डीएनए प्रोफाइलिंग, हिस्टोपैथोलॉजी, बायोलॉजिकल और फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। नमूने जबलपुर, सागर और बरेली की प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं। करीब 15 दिन में रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि बाघ की मौत का वास्तविक कारण जानना जरूरी है, ताकि भविष्य में अन्य बाघों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें। जांच में बीमारी, अधिक नमी, क्षेत्रीय संघर्ष (टेरिटरी फाइट) समेत सभी संभावित पहलुओं को शामिल किया गया है।
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पन्ना टाइगर रिजर्व के उप निदेशक वीरेंद्र पटेल ने बताया कि पूरे मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।
-- -रेडियो कॉलर नहीं होने से पहचान भी चुनौती
डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि मृत बाघ के गले में रेडियो कॉलर नहीं था। टाइगर रिजर्व के सभी बाघों को रेडियो कॉलर नहीं पहनाया जाता, क्योंकि इसके लिए केंद्र सरकार से अनुमति लेनी होती है। रेडियो कॉलर नहीं होने के कारण बाघ की पहचान करना आसान नहीं है। उसकी पहचान और मूवमेंट का रिकॉर्ड जुटाने के लिए अलग से जांच की जाएगी।
-- -रिपोर्ट बताएगी मौत की असली वजह
पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने के कारण नमूनों की वैज्ञानिक जांच कराई जा रही है। डीएनए, हिस्टोपैथोलॉजी और फॉरेंसिक रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि बाघ की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, किसी बीमारी के कारण हुई या फिर इसके पीछे कोई अन्य वजह थी। वन विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट भविष्य में बाघों के संरक्षण की रणनीति तय करने में भी मददगार होगी।
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पन्ना टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला प्राकृतिक मौत का प्रतीत होता है, लेकिन इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए डीएनए प्रोफाइलिंग, हिस्टोपैथोलॉजी, बायोलॉजिकल और फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। नमूने जबलपुर, सागर और बरेली की प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं। करीब 15 दिन में रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है।
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उन्होंने बताया कि बाघ की मौत का वास्तविक कारण जानना जरूरी है, ताकि भविष्य में अन्य बाघों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें। जांच में बीमारी, अधिक नमी, क्षेत्रीय संघर्ष (टेरिटरी फाइट) समेत सभी संभावित पहलुओं को शामिल किया गया है।
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पन्ना टाइगर रिजर्व के उप निदेशक वीरेंद्र पटेल ने बताया कि पूरे मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।
डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि मृत बाघ के गले में रेडियो कॉलर नहीं था। टाइगर रिजर्व के सभी बाघों को रेडियो कॉलर नहीं पहनाया जाता, क्योंकि इसके लिए केंद्र सरकार से अनुमति लेनी होती है। रेडियो कॉलर नहीं होने के कारण बाघ की पहचान करना आसान नहीं है। उसकी पहचान और मूवमेंट का रिकॉर्ड जुटाने के लिए अलग से जांच की जाएगी।
पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने के कारण नमूनों की वैज्ञानिक जांच कराई जा रही है। डीएनए, हिस्टोपैथोलॉजी और फॉरेंसिक रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि बाघ की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, किसी बीमारी के कारण हुई या फिर इसके पीछे कोई अन्य वजह थी। वन विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट भविष्य में बाघों के संरक्षण की रणनीति तय करने में भी मददगार होगी।