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Banda News: बुंदेलखंड के नियोजित विकास को मिल सकेगी रफ्तार
Tue, 04 Aug 2026 11:21 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 04 Aug 2026 11:21 PM IST
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फोटो 04 सीकेटीपी 27 । मानिकपुर के मारकुंडी में बना स्काई ग्लास। आर्काइव।
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बांदा/चित्रकूट। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने आज प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दे दी है।
यह निर्णय प्रयागराज और बुंदेलखंड क्षेत्र के एक बड़े हिस्से के नियोजित एवं समन्वित विकास के उद्देश्य से लिया गया है। इसमें अब प्रतापगढ़ को भी शामिल किया गया है। पहले इसमें सात जिले फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर महोबा और प्रयागराज के काैशांबी को रखा गया था।
इससे प्रयागराज और चित्रकूट के बीच तेजी से बढ़ रही आबादी, औद्योगिक गतिविधियों और पर्यटन को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान के तहत विकास किया जा सकेगा। भवन निर्माण, भूमि उपयोग और लेआउट को एक ही प्राधिकरण के माध्यम से नियंत्रित किया जाएगा।
सड़क, जलापूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज, परिवहन और अन्य शहरी सुविधाओं की योजनाएं क्षेत्रीय दृष्टिकोण से बनाई जाएंगी। यही नहीं डिफेंस कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे और धार्मिक पर्यटन से जुड़े निवेशकों को एकल योजना के तहत सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास होगा।
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जिलों की भूमिका और विकास मॉडल
प्रमुख एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स (कनेक्टिविटी कॉरिडोर) इस क्षेत्रीय विकास योजना के तहत पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी को वैश्विक स्तर का बनाने के लिए दो बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स गेम-चेंजर साबित हो रहे हैं) बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (परिचालन में - गति का नया आधार) लंबाई और लागत: 296 किलोमीटर लंबा यह 4-लेन एक्सप्रेसवे लगभग 14,850 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हो चुका है। इसे भविष्य में 6 लेन तक विस्तारित किया जा सकता है।
कनेक्टिविटी : यह चित्रकूट के भरतकूप से शुरू होकर बांदा, महोबा और हमीरपुर जिलों से गुजरते हुए इटावा में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़ता है। इसके कारण चित्रकूट से दिल्ली एनसीआर तक का सफर सिर्फ 7 से 8 घंटे का रह गया है।
लाभ : इसके दोनों तरफ इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और यूपी डिफेंस कॉरिडोर की झांसी व चित्रकूट इकाइयां विकसित की जा रही हैं।
चित्रकूट पहले से धार्मिक पर्यटन और डिफेंस कॉरिडोर के कारण रणनीतिक महत्व हासिल कर रहा है। प्रयागराज के संगम और चित्रकूट के धार्मिक स्थलों को जोड़कर नए पर्यटन क्षेत्र विकसित करने पर भी जोर रहेगा।
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विशिष्ट जिलों के विकास कार्य
nथीम गेटवे : प्रयागराज, बांदा और कौशांबी से चित्रकूट आने वाले रास्तों पर 3 विशाल थीम गेटवे (प्रवेश द्वार) बनाए जा रहे हैं।
-कालिंजर किला (बांदा) : बांदा के ऐतिहासिक कालिंजर किले के पास बुनियादी सुविधाओं और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 3.83 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। बांदा को इस पूरे बुंदेलखंड बेल्ट के मुख्य आर्थिक और प्रशासनिक हब (कमिश्नरी मुख्यालय) के रूप में अपग्रेड किया जा रहा है।
-हमीरपुर-महोबा (खनिज, उद्योग और धरोहर का संगम) महोबा साल्ट फोर्ट : महोबा में साल्ट फोर्ट के पास पर्यटक सुविधा केंद्र और पार्किंग विकसित करने के लिए कुल 11 करोड़ रुपये (7 करोड़ सुविधा केंद्र + 4 करोड़ पार्किंग) खर्च किए जा रहे हैं।
-धार्मिक स्थलों का पुनरुद्धार : हमीरपुर के पातालेश्वर मंदिर और चकरपुर के सोमनाथ मंदिर को पर्यटन सर्किट से जोड़ा जा रहा है।
-मस्तानी महल संरक्षण : हमीरपुर-महोबा क्षेत्र के ऐतिहासिक मस्तानी महल के संरक्षण के लिए विशेष फंड जारी किया गया है। इसके साथ ही हमीरपुर को खनिज और भारी औद्योगिक हब के रूप में प्रमोट किया जा रहा है, जिसे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे बन रहे डिफेंस और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से सीधा लाभ मिल रहा है।
-फतेहपुर (कृषि-व्यापारिक हब) एग्रो-इंडस्ट्रियल हब : फतेहपुर को इस नवगठित विकास प्राधिकरण के तहत मुख्य कृषि व्यापारिक केंद्र के रूप में अधिसूचित किया गया है। यहां बड़ी अनाज मंडियों, कोल्ड स्टोरेज चेन और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।
-कनेक्टिविटी लाभ : नया कानपुर-महोबा ग्रीनफील्ड हाईवे फतेहपुर जिले से होकर गुजरेगा। इससे यहां के किसानों और व्यापारियों के लिए कानपुर, दिल्ली और भोपाल तक अपनी फसलें और उत्पाद तेजी से पहुंचाना आसान हो जाएगा।
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प्रमुख निवेश के अवसर
एग्रो और फूड प्रोसेसिंग (फतेहपुर और बांदा) : फतेहपुर को विशेष रूप से कृषि-व्यापारिक हब घोषित किया गया है। यहां मॉडर्न राइस मिल, आटा मिल, पल्स (दाल) प्रोसेसिंग यूनिट, और फलों/सब्जियों के लिए कोल्ड स्टोरेज चेन बनाने के बेहतरीन अवसर हैं।
कच्चा माल: इस क्षेत्र में गेहूं, चना, दलहन और तिलहन का भारी उत्पादन होता है।
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यह निर्णय प्रयागराज और बुंदेलखंड क्षेत्र के एक बड़े हिस्से के नियोजित एवं समन्वित विकास के उद्देश्य से लिया गया है। इसमें अब प्रतापगढ़ को भी शामिल किया गया है। पहले इसमें सात जिले फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर महोबा और प्रयागराज के काैशांबी को रखा गया था।
इससे प्रयागराज और चित्रकूट के बीच तेजी से बढ़ रही आबादी, औद्योगिक गतिविधियों और पर्यटन को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान के तहत विकास किया जा सकेगा। भवन निर्माण, भूमि उपयोग और लेआउट को एक ही प्राधिकरण के माध्यम से नियंत्रित किया जाएगा।
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सड़क, जलापूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज, परिवहन और अन्य शहरी सुविधाओं की योजनाएं क्षेत्रीय दृष्टिकोण से बनाई जाएंगी। यही नहीं डिफेंस कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे और धार्मिक पर्यटन से जुड़े निवेशकों को एकल योजना के तहत सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास होगा।
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जिलों की भूमिका और विकास मॉडल
प्रमुख एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स (कनेक्टिविटी कॉरिडोर) इस क्षेत्रीय विकास योजना के तहत पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी को वैश्विक स्तर का बनाने के लिए दो बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स गेम-चेंजर साबित हो रहे हैं) बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (परिचालन में - गति का नया आधार) लंबाई और लागत: 296 किलोमीटर लंबा यह 4-लेन एक्सप्रेसवे लगभग 14,850 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हो चुका है। इसे भविष्य में 6 लेन तक विस्तारित किया जा सकता है।
कनेक्टिविटी : यह चित्रकूट के भरतकूप से शुरू होकर बांदा, महोबा और हमीरपुर जिलों से गुजरते हुए इटावा में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़ता है। इसके कारण चित्रकूट से दिल्ली एनसीआर तक का सफर सिर्फ 7 से 8 घंटे का रह गया है।
लाभ : इसके दोनों तरफ इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और यूपी डिफेंस कॉरिडोर की झांसी व चित्रकूट इकाइयां विकसित की जा रही हैं।
चित्रकूट पहले से धार्मिक पर्यटन और डिफेंस कॉरिडोर के कारण रणनीतिक महत्व हासिल कर रहा है। प्रयागराज के संगम और चित्रकूट के धार्मिक स्थलों को जोड़कर नए पर्यटन क्षेत्र विकसित करने पर भी जोर रहेगा।
विशिष्ट जिलों के विकास कार्य
nथीम गेटवे : प्रयागराज, बांदा और कौशांबी से चित्रकूट आने वाले रास्तों पर 3 विशाल थीम गेटवे (प्रवेश द्वार) बनाए जा रहे हैं।
-कालिंजर किला (बांदा) : बांदा के ऐतिहासिक कालिंजर किले के पास बुनियादी सुविधाओं और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 3.83 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। बांदा को इस पूरे बुंदेलखंड बेल्ट के मुख्य आर्थिक और प्रशासनिक हब (कमिश्नरी मुख्यालय) के रूप में अपग्रेड किया जा रहा है।
-हमीरपुर-महोबा (खनिज, उद्योग और धरोहर का संगम) महोबा साल्ट फोर्ट : महोबा में साल्ट फोर्ट के पास पर्यटक सुविधा केंद्र और पार्किंग विकसित करने के लिए कुल 11 करोड़ रुपये (7 करोड़ सुविधा केंद्र + 4 करोड़ पार्किंग) खर्च किए जा रहे हैं।
-धार्मिक स्थलों का पुनरुद्धार : हमीरपुर के पातालेश्वर मंदिर और चकरपुर के सोमनाथ मंदिर को पर्यटन सर्किट से जोड़ा जा रहा है।
-मस्तानी महल संरक्षण : हमीरपुर-महोबा क्षेत्र के ऐतिहासिक मस्तानी महल के संरक्षण के लिए विशेष फंड जारी किया गया है। इसके साथ ही हमीरपुर को खनिज और भारी औद्योगिक हब के रूप में प्रमोट किया जा रहा है, जिसे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे बन रहे डिफेंस और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से सीधा लाभ मिल रहा है।
-फतेहपुर (कृषि-व्यापारिक हब) एग्रो-इंडस्ट्रियल हब : फतेहपुर को इस नवगठित विकास प्राधिकरण के तहत मुख्य कृषि व्यापारिक केंद्र के रूप में अधिसूचित किया गया है। यहां बड़ी अनाज मंडियों, कोल्ड स्टोरेज चेन और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।
-कनेक्टिविटी लाभ : नया कानपुर-महोबा ग्रीनफील्ड हाईवे फतेहपुर जिले से होकर गुजरेगा। इससे यहां के किसानों और व्यापारियों के लिए कानपुर, दिल्ली और भोपाल तक अपनी फसलें और उत्पाद तेजी से पहुंचाना आसान हो जाएगा।
प्रमुख निवेश के अवसर
एग्रो और फूड प्रोसेसिंग (फतेहपुर और बांदा) : फतेहपुर को विशेष रूप से कृषि-व्यापारिक हब घोषित किया गया है। यहां मॉडर्न राइस मिल, आटा मिल, पल्स (दाल) प्रोसेसिंग यूनिट, और फलों/सब्जियों के लिए कोल्ड स्टोरेज चेन बनाने के बेहतरीन अवसर हैं।
कच्चा माल: इस क्षेत्र में गेहूं, चना, दलहन और तिलहन का भारी उत्पादन होता है।

फोटो 04 सीकेटीपी 27 । मानिकपुर के मारकुंडी में बना स्काई ग्लास। आर्काइव।