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Banda News: डीजल विभाग में सालों से अभिलेख नहीं हैं अपडेट, बड़े घोटाले की आशंका
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फोटो-14-बांदा डिपो में लगी मशीनें, यहीं से बसों को डीजल दिया जाता है। ब्यूरो
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फोटो-14-बांदा डिपो में लगी मशीनें, यहीं से बसों को डीजल दिया जाता है। ब्यूरो
= बांदा डिपो में 14 हजार लीटर डीजल की अनियमितता मामले से शुरू हुई जांच
= प्रतिदिन नहीं की गई डीजल स्टॉक की सुबह और शाम गेज से माप
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। जिले के रोडवेज डिपो के डीजल विभाग में कई सालों से अभिलेखों को अपडेट ही नहीं किया गया। इसके चलते यहां बड़े घोटाले की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। लापरवाही इस कदर हावी रही कि सुबह और शाम डीजल के स्टॉक की न तो गेज से माप की गई और न ही रजिस्टर में दर्ज किया गया।
बांदा डिपो में करीब 155 बसें हैं। इन्हें संचालित करने के लिए प्रतिदिन हजारों लीटर डीजल खर्च होता है। यह डीजल बांदा डिपो स्थित डीजल विभाग से दिया जाता है। इतने बड़े पैमाने पर डीजल वितरण के बाद भी विभागीय कर्मचारियों ने हद दर्जे की लापरवाही बरती या फिर यूं कहें कि जान बूझकर यह पूरा खेल किया गया। कई सालों से यहां रजिस्टर में स्टॉक को दर्ज नहीं किया गया है।
नियमानुसार डीजल वितरण से पहले सुबह टैंक में गेज डालकर डीजल की माप की जाती है। यह माप रजिस्टर में दर्ज की जाती है। इसके बाद दिन भर बसों को वितरित किए गए डीजल को भी दर्ज किया जाता है। शाम को फिर से डीजल के स्टॉक की गेज से माप की जाती है। सुबह उपलब्ध स्टॉक से दिन भर में वितरित डीजल को घटाकर शाम का स्टॉक निकाला जाता है। इसमें कोई अंतर आता है तो तत्काल जांच की जाती है, लेकिन बांदा डिपो में ये पूरी प्रक्रिया कर्मचारियों ने बंद रखी। इससे ये जानना ही मुश्किल हो गया कि सुबह डीजल का स्टॉक क्या था और शाम को कितना बचा। अधिकारियों ने जब अभिलेख खंगाले तो रजिस्टर खाली मिले। ऐसे में यहां डीजल के सालों से एक सुनियोजित घोटाले की आशंका प्रबल हो गई है, लेकिन यह जांच निष्पक्ष हो सकेगी या नहीं, इसे भी लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल जांच में कर्मचारियों के साथ कई अधिकारियों की गर्दनें भी फसेंगीं। इस कारण जांच जब तक शासन से न हो इसके निष्पक्ष होने पर सवाल है।
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14 हजार लीटर डीजल मामले से खुला मामला
रोडवेज के अधिकारियों के अनुसार 8 जुलाई को 14 हजार डीजल लेकर एक ट्रक बांदा डिपो आया था। यहां डिपो के टैंक में जगह न होने के कारण वह खाली नहीं हो सका, लेकिन कर्मचारियों ने उसे 8 जुलाई को ही खाली दिखा दिया। अधिकारियों का दावा है कि बाद में 9 जुलाई को टैंकर को खाली कराया गया, लेकिन वास्तव में टैंकर खाली हुआ या नहीं, इसके प्रमाण दे पाना मुश्किल है।
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जांच की बात कह रहे अधिकारी
अधिकारी लगातार पूरे प्रकरण में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। क्षेत्रीय प्रबंधक चित्रकूटधाम मंडल राम लवट ने बताया कि जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के अनुसार ही दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। ये सही है कि अभिलेख अधूरे हैं, लेकिन प्राथमिक जांच में बड़े घोटाले जैसी बात सामने नहीं आई है।
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= बांदा डिपो में 14 हजार लीटर डीजल की अनियमितता मामले से शुरू हुई जांच
= प्रतिदिन नहीं की गई डीजल स्टॉक की सुबह और शाम गेज से माप
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। जिले के रोडवेज डिपो के डीजल विभाग में कई सालों से अभिलेखों को अपडेट ही नहीं किया गया। इसके चलते यहां बड़े घोटाले की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। लापरवाही इस कदर हावी रही कि सुबह और शाम डीजल के स्टॉक की न तो गेज से माप की गई और न ही रजिस्टर में दर्ज किया गया।
बांदा डिपो में करीब 155 बसें हैं। इन्हें संचालित करने के लिए प्रतिदिन हजारों लीटर डीजल खर्च होता है। यह डीजल बांदा डिपो स्थित डीजल विभाग से दिया जाता है। इतने बड़े पैमाने पर डीजल वितरण के बाद भी विभागीय कर्मचारियों ने हद दर्जे की लापरवाही बरती या फिर यूं कहें कि जान बूझकर यह पूरा खेल किया गया। कई सालों से यहां रजिस्टर में स्टॉक को दर्ज नहीं किया गया है।
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नियमानुसार डीजल वितरण से पहले सुबह टैंक में गेज डालकर डीजल की माप की जाती है। यह माप रजिस्टर में दर्ज की जाती है। इसके बाद दिन भर बसों को वितरित किए गए डीजल को भी दर्ज किया जाता है। शाम को फिर से डीजल के स्टॉक की गेज से माप की जाती है। सुबह उपलब्ध स्टॉक से दिन भर में वितरित डीजल को घटाकर शाम का स्टॉक निकाला जाता है। इसमें कोई अंतर आता है तो तत्काल जांच की जाती है, लेकिन बांदा डिपो में ये पूरी प्रक्रिया कर्मचारियों ने बंद रखी। इससे ये जानना ही मुश्किल हो गया कि सुबह डीजल का स्टॉक क्या था और शाम को कितना बचा। अधिकारियों ने जब अभिलेख खंगाले तो रजिस्टर खाली मिले। ऐसे में यहां डीजल के सालों से एक सुनियोजित घोटाले की आशंका प्रबल हो गई है, लेकिन यह जांच निष्पक्ष हो सकेगी या नहीं, इसे भी लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल जांच में कर्मचारियों के साथ कई अधिकारियों की गर्दनें भी फसेंगीं। इस कारण जांच जब तक शासन से न हो इसके निष्पक्ष होने पर सवाल है।
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14 हजार लीटर डीजल मामले से खुला मामला
रोडवेज के अधिकारियों के अनुसार 8 जुलाई को 14 हजार डीजल लेकर एक ट्रक बांदा डिपो आया था। यहां डिपो के टैंक में जगह न होने के कारण वह खाली नहीं हो सका, लेकिन कर्मचारियों ने उसे 8 जुलाई को ही खाली दिखा दिया। अधिकारियों का दावा है कि बाद में 9 जुलाई को टैंकर को खाली कराया गया, लेकिन वास्तव में टैंकर खाली हुआ या नहीं, इसके प्रमाण दे पाना मुश्किल है।
जांच की बात कह रहे अधिकारी
अधिकारी लगातार पूरे प्रकरण में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। क्षेत्रीय प्रबंधक चित्रकूटधाम मंडल राम लवट ने बताया कि जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के अनुसार ही दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। ये सही है कि अभिलेख अधूरे हैं, लेकिन प्राथमिक जांच में बड़े घोटाले जैसी बात सामने नहीं आई है।