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Banda News: चेक बाउंस में दुकानदार को नौ माह की सजा
Sat, 01 Aug 2026 10:51 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 01 Aug 2026 10:51 PM IST
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बांदा। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) शुभांशु दास की अदालत ने चेक बाउंस होने के मामले में दोषी जितेंद्र सिंह को नौ महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है।
इसके साथ ही चार लाख 50 जुर्माना लगाया है। 45 दिन के भीतर जुर्माना अदा न करने पर उसे एक महीने की अतिरिक्त सजा काटनी पड़ेगी।
शहर के शंकर नगर निवासी नरेंद्र गौतम ने कोर्ट में दायर किए वाद में बताया था कि उसकी जितेंद्र सिंह पटेल से मित्रता थी। जितेंद्र ने पटेल ट्रेडर्स के नाम से बिल्डिंग मैटेरियल का कारोबार शुरू करने के लिए नरेंद्र से तीन लाख रुपये की आर्थिक मदद मांगी थी। नरेंद्र ने उसे डेढ़ लाख रुपये नकद और डेढ़ लाख रुपये चेक के माध्यम से दी थी।
तय समय सीमा बीतने के बाद जब नरेंद्र ने पैसा वापस मांगे तो दोषी ने उन्हें दो अलग-अलग बैंकों के चेक एक दो लाख और दूसरा एक लाख रुपये का सौंपा। नरेंद्र ने जब इन चेकों को सितंबर 2022 में बैंक में लगाया तो दोनों चेक बाउंस हो गए। इस पर नरेंद्र अपने अधिवक्ता की ओर से दोषी को नोटिस भेजा, जवाब न मिलने पर उसने कोर्ट में वाद दायर किया।
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कोर्ट में जितेंद्र सिंह ने दावा किया चेक पर उसके हस्ताक्षर नहीं है। पीड़ित ने उसकी दुकान से चेक चुराकर फर्जीवाड़ा किया है। हालांकि बहस के दौरान वह अपने ही बयानों में फंस गया।
न्यायालय ने पाया कि आरोपी पहले भी कई अन्य लोगों के साथ ही ऐसे चेक बाउंस के मुकदमों में शामिल रहा है, इससे साबित होता है कि वह एक पेशेवर डिफाल्टर है। न्यायाधीश ने जितेंद्र को दोषी करार देकर सजा सुनाई।
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इसके साथ ही चार लाख 50 जुर्माना लगाया है। 45 दिन के भीतर जुर्माना अदा न करने पर उसे एक महीने की अतिरिक्त सजा काटनी पड़ेगी।
शहर के शंकर नगर निवासी नरेंद्र गौतम ने कोर्ट में दायर किए वाद में बताया था कि उसकी जितेंद्र सिंह पटेल से मित्रता थी। जितेंद्र ने पटेल ट्रेडर्स के नाम से बिल्डिंग मैटेरियल का कारोबार शुरू करने के लिए नरेंद्र से तीन लाख रुपये की आर्थिक मदद मांगी थी। नरेंद्र ने उसे डेढ़ लाख रुपये नकद और डेढ़ लाख रुपये चेक के माध्यम से दी थी।
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तय समय सीमा बीतने के बाद जब नरेंद्र ने पैसा वापस मांगे तो दोषी ने उन्हें दो अलग-अलग बैंकों के चेक एक दो लाख और दूसरा एक लाख रुपये का सौंपा। नरेंद्र ने जब इन चेकों को सितंबर 2022 में बैंक में लगाया तो दोनों चेक बाउंस हो गए। इस पर नरेंद्र अपने अधिवक्ता की ओर से दोषी को नोटिस भेजा, जवाब न मिलने पर उसने कोर्ट में वाद दायर किया।
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कोर्ट में जितेंद्र सिंह ने दावा किया चेक पर उसके हस्ताक्षर नहीं है। पीड़ित ने उसकी दुकान से चेक चुराकर फर्जीवाड़ा किया है। हालांकि बहस के दौरान वह अपने ही बयानों में फंस गया।
न्यायालय ने पाया कि आरोपी पहले भी कई अन्य लोगों के साथ ही ऐसे चेक बाउंस के मुकदमों में शामिल रहा है, इससे साबित होता है कि वह एक पेशेवर डिफाल्टर है। न्यायाधीश ने जितेंद्र को दोषी करार देकर सजा सुनाई।