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Banda News: गेहूं खरीद के छह दिन शेष, किसान बेचैन
Tue, 09 Jun 2026 11:53 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 09 Jun 2026 11:53 PM IST
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अतर्रा मंडी में अपने नंबर का इंतजार करते ट्रैक्टर लिए किसान। संवाद
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अतर्रा। गेहूं खरीद के लिए अब सिर्फ छह दिन शेष बचे हैं। इसके बाद किसान अपना गेहूं बाजार में बेचने को मजबूर होंगे। वहीं मंडी में खरीद ठप होने से किसान परेशान हैं। कहा कि शासन बिना तैयारी के खरीद करा रहा है, इसका खामियाजा उन लोगों भुगतना पड़ता है।
कस्बे के मंडी परिसर स्थित खरीद केंद्रों में बोरों की कमी और पूर्व में खरीदे गए गेहूं के उठान न होने से करीब एक सप्ताह से खरीद ठप है। इससे किसान परेशान हैं। किसानों ने बताया कि वह करीब 15 दिन से गेहूं बेचने के लिए केंद्र का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन कोई पूछने वाला नहीं है। कहा कि प्रशासन और शासन की लापरवाही का खामियाजा किसानों को उठाना पड़ता है।
जब तैयारी पूरी नहीं होती तब खरीद कराने का क्या मतलब। केंद्रों में न तो बारदाना है और नहीं कोई सुनने वाला। उन्हें खुले बाजार में कम कीमत पर गेहूं बेचना पड़ेगा। इससे काफी नुकसान होगा। पहले मौसम की मार और अब प्रशासन की लापरवाही बड़ी कीमत वसूल रही है। ऐसे में लागत निकालना मुश्किल हो जाता है। किसान सीताराम ने बताया कि खुले बाजार में 2200 से 2300 रुपये में गेहूं बेचना मजबूरी है।
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वहीं एफसीआई केंद्र प्रभारी सतवंत सिंह ने बताया कि एक हफ्ते से तौल के लिए बोरियां न होने से खरीद बंद है। विपणन केंद्र प्रभारी आशीष कुमार गुप्ता ने बताया कि विपणन के दोनों केंद्रों पर 16 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद की जा चुकी है। खरीदे गए गेहूं का उठान न होने से गोदाम भरे हैं। बारदाने की कमी के चलते खरीद भी ठप है।
किसानों ने कहा
- दो दिन से मंडी में भाड़े के ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर गेहूं की तौल कराने को पड़े हैं। तौल बंद होने से गेहूं नहीं बिका। ट्रैक्टर का रोजाना 15 सौ रुपये भाड़ा देना पड़ता है।
भागवत प्रसाद पांडेय, देवखेर
- दो दिन पूर्व मंडी में दो ट्रैक्टर-ट्रॉली गेहूं लेकर बेचने आए थे। तौल बंद होने से दोनों ट्रैक्टरों का भाड़ा दो हजार रुपये के हिसाब से रोजाना देना पड़ रहा है।
रामनारायण, मुरालिया पुरवा
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कस्बे के मंडी परिसर स्थित खरीद केंद्रों में बोरों की कमी और पूर्व में खरीदे गए गेहूं के उठान न होने से करीब एक सप्ताह से खरीद ठप है। इससे किसान परेशान हैं। किसानों ने बताया कि वह करीब 15 दिन से गेहूं बेचने के लिए केंद्र का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन कोई पूछने वाला नहीं है। कहा कि प्रशासन और शासन की लापरवाही का खामियाजा किसानों को उठाना पड़ता है।
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जब तैयारी पूरी नहीं होती तब खरीद कराने का क्या मतलब। केंद्रों में न तो बारदाना है और नहीं कोई सुनने वाला। उन्हें खुले बाजार में कम कीमत पर गेहूं बेचना पड़ेगा। इससे काफी नुकसान होगा। पहले मौसम की मार और अब प्रशासन की लापरवाही बड़ी कीमत वसूल रही है। ऐसे में लागत निकालना मुश्किल हो जाता है। किसान सीताराम ने बताया कि खुले बाजार में 2200 से 2300 रुपये में गेहूं बेचना मजबूरी है।
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वहीं एफसीआई केंद्र प्रभारी सतवंत सिंह ने बताया कि एक हफ्ते से तौल के लिए बोरियां न होने से खरीद बंद है। विपणन केंद्र प्रभारी आशीष कुमार गुप्ता ने बताया कि विपणन के दोनों केंद्रों पर 16 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद की जा चुकी है। खरीदे गए गेहूं का उठान न होने से गोदाम भरे हैं। बारदाने की कमी के चलते खरीद भी ठप है।
किसानों ने कहा
- दो दिन से मंडी में भाड़े के ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर गेहूं की तौल कराने को पड़े हैं। तौल बंद होने से गेहूं नहीं बिका। ट्रैक्टर का रोजाना 15 सौ रुपये भाड़ा देना पड़ता है।
भागवत प्रसाद पांडेय, देवखेर
- दो दिन पूर्व मंडी में दो ट्रैक्टर-ट्रॉली गेहूं लेकर बेचने आए थे। तौल बंद होने से दोनों ट्रैक्टरों का भाड़ा दो हजार रुपये के हिसाब से रोजाना देना पड़ रहा है।
रामनारायण, मुरालिया पुरवा

अतर्रा मंडी में अपने नंबर का इंतजार करते ट्रैक्टर लिए किसान। संवाद

अतर्रा मंडी में अपने नंबर का इंतजार करते ट्रैक्टर लिए किसान। संवाद