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Banda News: विशेष न्यायाधीश ने अपहरण और जबरन संबंध बनाने के आरोपी को दी जमानत
Wed, 29 Jul 2026 10:55 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Wed, 29 Jul 2026 10:55 PM IST
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बांदा। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम प्रदीप कुमार मिश्रा ने आरोपी शक्ति सिंह को शादी के लिए अपहरण और संबंध बनाने के आरोप में जमानत दे दी है। अभियुक्त की रिहाई एक तकनीकी त्रुटि के कारण रुकी थी। उच्च न्यायालय से उसे मुख्य धाराओं में पहले ही जमानत मिल चुकी थी।
शक्ति सिंह को अतर्रा थाने के एक मामले में आरोपी बनाया गया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 3 जुलाई 2026 को उसे सभी मुख्य धाराओं में जमानत दे दी थी। हालांकि जमानत प्रार्थनापत्र और आदेश में इस धारा का उल्लेख छूट गया था। यह धारा आरोपपत्र में बढ़ाई गई थी। इस चूक के कारण शक्ति सिंह का रिहाई परवाना रोक दिया गया था।
उसने इसमें जमानत के लिए विशेष न्यायाधीश के समक्ष नया प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष ने भी स्वीकार किया कि मुख्य धाराओं में जमानत मिलने के बाद यह चूक अनजाने में हुई थी। पत्रावली के अवलोकन से भी यह तथ्य सामने आया।
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विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। उन्होंने पत्रावली का अवलोकन भी किया। न्यायालय ने पाया कि मुख्य धाराओं में जमानत मिलने के बाद इसमें भी रिहाई न्यायोचित है। आरोपी को पूर्व में दाखिल जमानतों, व्यक्तिगत बंधपत्र और अंडरटेकिंग पर रिहा करने का आदेश दिया गया।
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शक्ति सिंह को अतर्रा थाने के एक मामले में आरोपी बनाया गया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 3 जुलाई 2026 को उसे सभी मुख्य धाराओं में जमानत दे दी थी। हालांकि जमानत प्रार्थनापत्र और आदेश में इस धारा का उल्लेख छूट गया था। यह धारा आरोपपत्र में बढ़ाई गई थी। इस चूक के कारण शक्ति सिंह का रिहाई परवाना रोक दिया गया था।
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उसने इसमें जमानत के लिए विशेष न्यायाधीश के समक्ष नया प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष ने भी स्वीकार किया कि मुख्य धाराओं में जमानत मिलने के बाद यह चूक अनजाने में हुई थी। पत्रावली के अवलोकन से भी यह तथ्य सामने आया।
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विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। उन्होंने पत्रावली का अवलोकन भी किया। न्यायालय ने पाया कि मुख्य धाराओं में जमानत मिलने के बाद इसमें भी रिहाई न्यायोचित है। आरोपी को पूर्व में दाखिल जमानतों, व्यक्तिगत बंधपत्र और अंडरटेकिंग पर रिहा करने का आदेश दिया गया।