{"_id":"6a51373eb640c854d101e863","slug":"sufficient-evidence-not-found-three-accused-of-robbery-acquitted-banda-news-c-212-1-akb1003-149504-2026-07-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Banda News: नहीं मिले पर्याप्त साक्ष्य, लूट के तीनों आरोपी बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Banda News: नहीं मिले पर्याप्त साक्ष्य, लूट के तीनों आरोपी बरी
Fri, 10 Jul 2026 11:47 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Fri, 10 Jul 2026 11:47 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। कोर्ट के आदेश पर आठ साल पहले कोतवाली नगर में मारपीट व लूट की प्राथमिकी अधिवक्ता ने दर्ज कराई थी। इस मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र अधिनियम) गगन कुमार भारती की अदालत ने तीनों आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
अधिवक्ता अनूप कुमार सिंह ने आरोप लगाया था कि 17 सितंबर 2018 की रात स्टेशन रोड ओवरब्रिज पर महेंद्र गुप्ता, बृजकिशोर उर्फ रिंकू गुप्ता, दीपक गुप्ता और दो अज्ञात लोगों ने उनकी बाइक रोक कर चाबी निकाल ली, तमंचे के बल पर 1100 रुपये और करीब एक तोला सोने की चेन लूट ली थी। पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज न किए जाने पर उन्होंने न्यायालय में परिवाद दायर किया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि परिवादी ने अपने अतिरिक्त किसी स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी को गवाही के लिए प्रस्तुत नहीं किया।
अदालत ने यह भी माना कि परिवादी ने यह महत्वपूर्ण तथ्य परिवाद में छिपाया कि आरोपी पहले उसके मुवक्किल रह चुके थे। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि घटना के बाद न तो तत्काल पुलिस सहायता के लिए 100 नंबर पर सूचना दी गई और न ही बार एसोसिएशन के माध्यम से कोई कार्रवाई कराई गई, जिससे अभियोजन की कहानी संदिग्ध प्रतीत हुई।
विज्ञापन
इन परिस्थितियों में अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में अभियोजन को आरोप संदेह से परे सिद्ध करने होते हैं, जबकि इस मामले में ऐसा नहीं हो सका। ऐसे में महेंद्र गुप्ता, बृजकिशोर उर्फ रिंकू गुप्ता और दीपक गुप्ता को बरी कर दिया गया। साथ ही उनके जमानती बंधपत्र निरस्त करने के आदेश भी दिए गए।
विज्ञापन
अधिवक्ता अनूप कुमार सिंह ने आरोप लगाया था कि 17 सितंबर 2018 की रात स्टेशन रोड ओवरब्रिज पर महेंद्र गुप्ता, बृजकिशोर उर्फ रिंकू गुप्ता, दीपक गुप्ता और दो अज्ञात लोगों ने उनकी बाइक रोक कर चाबी निकाल ली, तमंचे के बल पर 1100 रुपये और करीब एक तोला सोने की चेन लूट ली थी। पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज न किए जाने पर उन्होंने न्यायालय में परिवाद दायर किया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि परिवादी ने अपने अतिरिक्त किसी स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी को गवाही के लिए प्रस्तुत नहीं किया।
विज्ञापन
अदालत ने यह भी माना कि परिवादी ने यह महत्वपूर्ण तथ्य परिवाद में छिपाया कि आरोपी पहले उसके मुवक्किल रह चुके थे। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि घटना के बाद न तो तत्काल पुलिस सहायता के लिए 100 नंबर पर सूचना दी गई और न ही बार एसोसिएशन के माध्यम से कोई कार्रवाई कराई गई, जिससे अभियोजन की कहानी संदिग्ध प्रतीत हुई।
विज्ञापन
इन परिस्थितियों में अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में अभियोजन को आरोप संदेह से परे सिद्ध करने होते हैं, जबकि इस मामले में ऐसा नहीं हो सका। ऐसे में महेंद्र गुप्ता, बृजकिशोर उर्फ रिंकू गुप्ता और दीपक गुप्ता को बरी कर दिया गया। साथ ही उनके जमानती बंधपत्र निरस्त करने के आदेश भी दिए गए।